आतंकवाद विरोधी दिवस 21 मई

आतंकवाद विरोधी दिवस 21 मई (Anti-terrorism day 21st, May)

हम सब आए दिन टीवी व समाचार पत्र के माध्यम से आतंकवादी गतिविधियों के बारे में देखते व सुनते हैं। इससे समाज में एक भय का वातावरण पैदा होता है। जोकि समाज में देश की तरक्की तथा लोगों की आजादी में बाधा डालता है। आतंकवाद संपूर्ण विश्व में एक भयंकर बीमारी की तरह से पनप रहा है। जिसके कारण आए दिन कोई न कोई दुखद समाचार सुनने को मिलता है।

समाज में आतंकवाद के प्रति जागरूकता का होना बहुत अनिवार्य है। शिक्षा के अभाव में युवा आतंकवाद के हाथ मजबूत कर सकते हैं इसलिए समाज में जागरूकता पैदा करने के लिए सरकार द्वारा आतंकवाद विरोधी दिवस 21 मई को मनाया जाता है। यह दिवस भारत के सातवें प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि के रूप में भी मनाया जाता है। उनकी हत्या एक आतंकवादी हमले में कर दी गई थी, इस दिन कई संगठनों द्वारा जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं।

आतंकवाद विरोधी दिवस का महत्व

आतंकवाद विरोधी दिवस मनाए जाने का उद्देश्य वैश्विक शांति और अहिंसा के संदेश को लोगों तक पहुंचाना है। युवाओं को गुमराह होने से रोकना तथा सत्य अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना है। यह दिवस आतंकवाद के विरुद्ध अपना बलिदान देने वाले शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए एक उपयुक्त समय है।

आतंकवाद विरोधी दिवस क्यों मनाया जाता है?

आतंकवाद विरोधी दिवस मनाने की घोषणा प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या, जो कि 21 मई, 1991 को एक आतंकवादी हमले में तमिलनाडु में की गई थी, के पश्चात की गई। तभी से यह दिवस संपूर्ण देश में 21 मई को मनाया जाता है। इस दिन प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी एक रैली में भाग लेने तमिलनाडु के Sriprumbudur नामक स्थान पर गए थे। वहां एक महिला जो कि के एक आतंकवादी समूह liberation of tamil tigers eelam (LTTE) की सदस्य थी। उसने अपने कपड़ों में विस्फोटक सामग्री छुपा रखी थी, जैसे ही वह राजीव गांधी जी के निकट पहुंची उसने विस्फोट कर दिया, जिसमें राजीव गांधी जी के साथ कई अन्य लोग मारे गए। जिससे एक भय का वातावरण पैदा हो गया।

यह दिवस आतंकवादी गतिविधियों के प्रति सचेत करने के लिए मनाया जाता है। इस दिन सामाजिक शांति व मानवता का संदेश दिया जाता है। समाज में एकता और जागरूकता को बढ़ावा दिया जाता है। युवाओं को आतंकवाद के विरुद्ध जागरूक करने के लिए कई कार्यक्रम किए जाते हैं। ताकि वे आतंकवादी गतिविधियों में शामिल ना हो तथा आतंकवाद अंत करने के लिए प्रयासरत रहे रहे।

आतंकवाद विरोधी दिवस के उद्देश्य

  • समाज मे शांति और मानवता को फैलाना।
  • लोगों मे जागरूकता बढ़ाना ताकि आतंकवाद को कम किया जा सके।
  • एकता को बढ़ावा देना ताकि एकजुट होकर आतंकवाद को जड़ से खतम किया जा सके।
  • शिक्षा और प्रशिक्षण देना ताकि वे गुमराह होकर आतंकवादी समूहों में शामिल न हों जाए।

राजीव गांधी जी के बारे में

राजीव गांधी जी का जन्म 20 अगस्त, 1944 को मुंबई में हुआ, उनकी माता का नाम इंदिरा गांधी तथा पिता का नाम फिरोज गांधी था। 1984 से 1989 तक भारत वे सातवें प्रधानमंत्री रहे। वे प्रधानमंत्री बनने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति थे, तथा राजनीतिक रूप से सक्षम नेहरू परिवार के सदस्य थे। जिनका संबंध कांग्रेस पार्टी से था। पंडित जवाहरलाल नेहरू उनके नाना थेI। 1968 उन्होंने सोनिया गांधी से उनकी शादी की, उनकी दो संतान हुई राहुल गांधी और प्रियंका गांधी।

उन्होंने अपने भाई संजय गांधी की मृत्यु के पश्चात ना चाहते हुए भी राजनीति में प्रवेश किया और अमेठी से सांसद बने, तथा लोकसभा के सदस्य बनेI वे कांग्रेस पार्टी के महासचिव भी बने, 31 अक्टूबर 1984 को उनकी माता इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई, इसके बाद उन्हें प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त किया गया चुनाव प्रचार के दौरान एक आतंकवादी संगठन के द्वारा उनकी हत्या कर दी गई। उनके बाद उनकी पत्नी सोनिया गांधी 1998 में कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष बनी व 2004 तथा 2009 में चुनाव में जीत दिलाईI राजीव गांधी को उनकी मृत्यु के पश्चात 1991 में भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें रिवॉल्यूशनरी लीडर ऑफ मॉडर्न इंडिया अवार्ड भी मृत्यु के पश्चात दिया गया।

आतंकवाद विरोधी दिवस कैसे मनाया जाता है?

इस दिन आतंकवाद के खिलाफ लड़े सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जाती है। इस दिन स्कूल व कॉलेजों में चर्चा का आयोजन किया जाता है। आतंकवाद के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। इस दिन सरकारी कार्यालयों में, सामाजिक संगठनों में, सार्वजनिक जगहों पर आतंकवाद के विरुद्ध प्रतिज्ञा ली जाती है।

आतंकवाद के विरुद्ध प्रतिज्ञा “हम भारतीय, हमारे राष्ट्र की परंपरा, अहिंसा और सहिष्णुता पर विश्वास रखते हुए, हर प्रकार के आतंकवाद व हिंसा का विरोध अपनी शक्ति से करेंगेI हम शांति व सामाजिक सामंजस्य बनाए रखने की कामना करते हैं। हम सब मिलकर मानव जीवन व मानव मूल्यों को बाधित करने वाली शक्तियों से लड़ेंगे” अंत में हम यही कहना चाहते हैं कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। इसमें सभी धर्मों के लोग सदभावना पूर्ण तरीके से रहते हैं। हमें कभी आपस में बैर भाव नहीं रखना चाहिए।

आतंकवाद एक बहुत ही भयावह समस्या है, जिसका सामना सब लोग एकजुट होकर ही कर सकते हैं। इसलिए हम सबको मिलकर आतंकवाद को पूर्ण कर समाप्त करने की प्रतिज्ञा लेनी होगी।

धन्यवाद

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