अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस कब मनाया जाता है – 29 जुलाई

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस Global Tiger Day  29 जुलाई

पृथ्वी पर कोई भी  जीव परिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा होता हैं,  और बाघ उन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।  बाघ बिल्ली की प्रजाति का एक जानवर है, जो कि आज एक  संरक्षित प्रजाति है। माना जाता है कि करीब 100 वर्ष पहले बाघ की विश्व में 9 प्रजातियां पाई जाती थी। लेकिन आज के समय में इनमें से सिर्फ 6  प्रजातियां बची हैं, 3 प्रजातियां पूर्णता विलुप्त हो  चुकी हैं ।

बाघ भारत देश का राष्ट्रीय पशु है। बाघ बहुत शक्तिशाली होते हैं। इनका वजन 300 किलो तक हो सकता है आग 5 मीटर ऊंचाई तक कूद सकते हैं। आज बढ़ती जनसंख्या के कारण वन्य क्षेत्र धीरे-धीरे सिकुड़ते जा रहे हैं, जिस कारण बाघों के लिए निवास स्थान कम होते जा रहे हैं। परिणाम स्वरूप बाघों की संख्या बहुत तेजी से घटती जा रही है। और यह परिस्थितिकी तंत्र के लिए बहुत बड़ा खतरा है, जहां पर बाघों की संख्या में बढ़ोतरी होगी समझ लीजिए वहां पर प्रकृति जीवन के लिए अनुकूल है।

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस की घोषणा

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस  हर वर्ष 29 जुलाई को मनाने की घोषणा 2010 में की गई, यह घोषणा रूस के सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर समिति  मैं की गई, और 29 जुलाई,  2010 को पहला ग्लोबल टाइगर डे मनाया गया। इस अवसर पर कई देश शामिल थे, जिन देशों में  बाघों की प्रजातियां पाई जाती हैं। वे सभी भागों के धीरे-धीरे घटने पर बहुत चिंतित थे, तथा उनके संरक्षण के लिए वह जागरूकता फैलाने के लिए इस दिन की घोषणा की गई।

बाघ संरक्षण के लिए कुछ अन्य संस्थाएं लगातार कार्य कर रहे हैं  जैसे

– WWF-World Wide Fund for Nature

– IFAW-International Fund for Animal Welfare

प्रोजेक्ट टाइगर

  • भारत सरकार ने 1973 में राष्ट्रीय पशु बाघ को संरक्षित करने के लिये ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ लॉन्च किया।
  • ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक सतत केंद्र प्रायोजित योजना है जो नामित बाघ राज्यों में बाघ संरक्षण के लिये केंद्रीय सहायता प्रदान करती है।

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस क्यों मनाया जाता है

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की एक रिपोर्ट के अनुसार 100 साल पहले विश्व भर में एक लाख से ज्यादा शेयर थे लेकिन अब उनमें से 95%  बाघ  समाप्त हो चुके हैं। बाघों की 3 प्रजातियाँ Bali Tiger, Caspian Tiger और Javan Tiger  पूर्णता विलुप्त हो चुकी हैं। और अन्य प्रजातियों में भी बहुत कम बाघ बचे हैं, इन बाघों का संरक्षण बहुत आवश्यक है।

बाघ संरक्षण करने और बाघों के प्राकृतिक आवासओं की सुरक्षा करने के लिए व बाघों की सुरक्षा के लिए जागरूकता फैलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस हर वर्ष मनाए जाने की घोषणा की गई, ताकि बाघों की संख्या में आ रही कमी को दूर करके उनकी संख्या में इज़ाफा किया जा सके।

विश्व बाघ शिखर सम्मेलन 2020 – 29 जनवरी, 2019 को नई दिल्ली में बाघ संरक्षण पर अंतर्राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन का आयोजन किया गया। उल्लेखनीय है कि बाघ संरक्षण पर यह तीसरा अंतर्राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन था।

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस का थीम

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर हर वर्ष कोई न कोई  थीम निश्चित किया जाता है 2020 में इसका थीम है उनका भविष्य हमारे हाथ में है “Their future is in our hands”

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस कब मनाया जाता है

भारत में बाघों की स्थिति

विश्व भर के 70% बाघ भारत में पाए जाते हैं। इसलिए हम कह सकते हैं, कि भारत बागों के लिए संपन्न है बाघ वन्यजीवन अधिनियम 1972 की अनुसूची 1 के भाग 1 में शामिल  किए गए हैं। बाघों के संरक्षण के लिए भारत सरकार ने 1973 में एक प्रोजेक्ट शुरू किया, जिसका नाम था प्रोजेक्ट टाइगर ।

बाघों के संरक्षण के लिए भारत में तीन राज्य प्रमुख हैं। जिनमें मध्यप्रदेश में 526  बाघ संरक्षित हैं, कर्नाटक में 524 उत्तराखंड राज्य में 442 बाघ संरक्षित हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ और मिजोरम राज्य में बाघों की संख्या में गिरावट आई है। जबकि ओडिशा राज्य में बाघों की संख्या अपरिवर्तित रही है।

ऑल इंडिया टाइगर एसोसिएशन की रिपोर्ट

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में ऑल इंडिया टाइगर एसोसिएशन की रिपोर्ट पेश की, यह रिपोर्ट हर 4 वर्ष में प्रस्तुत की जाती हैं। इस रिपोर्ट का शीर्षक था ‘Status of tigurs co-predators prey in India 2018’ यह रिपोर्ट पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के द्वारा  हर 4 वर्ष में प्रस्तुत की जाती है।

इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में बाघों की संख्या बढ़कर 2967 हो गई है। और इस वजह से भारत देश विश्व में बाघों के लिए सबसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास बन गया है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत में बाघों के  संरक्षण के लिए क्षेत्रों की संख्या भी बड़ी है। 2014 में बाघ संरक्षण क्षेत्र 692 थे और 2019 तक यह  860 से अधिक हो जाएंगे। इसके अतिरिक्त बाघों के लिए सामुदायिक स्थलों की संख्या भी 43 से बढ़कर 100 हो गई है।

हर 4 वर्षीय रिपोर्ट के अनुसार 2006 से 2010 में बाघों की संख्या में 21% का इजाफा हुआ था, तथा 2016 से 2014 तक बाघों की संख्या में 30% का इजाफा दर्ज किया गया व 2014 से 2018 तक बाघों की संख्या में सबसे अधिक 33% की बढ़ोतरी पाई गई है।

रिपोर्ट तैयार करने के लिए M-STrIPES  “मतलब ‘मॉनिटरिंग सिस्टम फॉर टाइगर इंटेंसिव प्रोटेक्शन एंड इकोलॉजिकल स्टेटस”’ एप्लीकेशन का इस्तेमाल करके आंकड़े एकत्रित किए गए, तथा इसके डेक्सटॉप वर्जन से आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है।

बाघों की संख्या घटने के कारण

  • बाघों का शिकार वह गैरकानूनी तस्करी करना।
  • जलवायु परिवर्तन होना।
  • संरक्षण के लिए धन व बुनियादी ढांचे की कमियां।
  • जनसंख्या का बढ़ना वह वनों का कम होना।
  • मनुष्य और जानवरों के बीच संघर्ष।

बाघों के बारे में कुछ ज्ञानात्मक तथ्य

  • बाघ को अंब्रेला स्पीशीज भी कहते हैं, क्योंकि इसके संरक्षण के साथ-साथ कई और पर जातियों का संरक्षण भी किया जा सकता है।
  • बाघ का वैज्ञानिक नाम पैंथर टिगरिस Panther Tigris है ।
  • यह felidae  परिवार का सदस्य है।
  • IUCN  की रेट लिस्ट में इसे इनडेंजर स्पीशीज में शामिल किया गया है।

बाघ के अंगों की इतनी ज्यादा कीमत होती है, कि कोई भी व्यक्ति इसका शिकार करने के लिए किसी भी हद तक गिरने के लिए तैयार हो जाता है। जिस तरह मनुष्य को जीने का अधिकार है, उसी तरह जंगली जानवरों को भी जीने का अधिकार है। तो हमें बाघों को बचाने के लिए एकजुट होना चाहिए तथा इसके संरक्षण के लिए उपाय करने चाहिए।

धन्यवाद

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