अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस कब मनाया जाता है

अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस (antarrashtriya ahinsa diwas) 2 अक्तूबर

मनुष्य का जीवन उसके विचारों से निर्धारित होता है। मनुष्य जैसा सोचता है, वैसा ही बन जाता है। अहिंसा मन की एक स्थिति है। जिसमें मनुष्य दूसरे व्यक्ति के सुख से सुखी होता है, तथा दूसरे व्यक्ति के दुख से दुखी होता है, चाहे वह शत्रु ही क्यों ना हो। अहिंसा ऐसा विचार है, जिसके अनुसार मनुष्य मन, वचन व कर्म से दूसरों को हानि नहीं पहुंचाना है। महात्मा गांधी के अनुसार सत्य को प्राप्त करने का सबसे आसान तरीका खुद को दूसरों की सेवा में लगाना है। उन्होंने अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को आजादी दिलाई। उन्हीं के विचारों पर चलकर विश्व शांति भी संभव है। इसीलिए उनके जन्म दिवस के अवसर पर हर वर्ष अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाने का आवाहन किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस की शुरुआत कब हुई? अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस क्या है?

हर वर्ष राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्म दिवस 2 अक्टूबर को विश्व भर में अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाया जाता है। उन्होंने सत्य के बल पर भारत को आजादी दिलवाई तथा विश्व को सत्य व अहिंसा की शक्ति से अवगत करवाया था।

यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली ने 15 जून, 2007 को प्रस्ताव A/RES/61/271 के तहत हर वर्ष 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की, ताकि संपूर्ण मानव जाति में सत्य तथा अहिंसा के प्रति जागरूकता पैदा की जा सके।

अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस का उद्देश्य

इस दिवस को मनाने का उद्देश्य शिक्षा और जागरूकता से अहिंसा के संदेश को फैलाना है। समाज को अहिंसा के सिद्धांतों से अवगत कराना है। इसके साथ-साथ सत्य, शांति, सहिष्णुता, भाईचारे तथा ज्ञान का भी प्रचार करना है। महात्मा गांधी का विश्वास था कि, अहिंसा मानव जाति की सबसे बड़ी शक्ति है। अहिंसा सभी हथियारों से अधिक सुरक्षित व शक्तिशाली है। क्रोध से क्रोध का जवाब कभी नहीं दिया जा सकता, इससे सिर्फ आग में घी डालने का ही काम होता है। जबकि प्रेम से क्रोध को शांत किया जा सकता है।

सत्य और अहिंसा का अर्थ

मानव जाति के लिए महात्मा गांधी का सबसे बड़ा संदेश सत्य और अहिंसा है। महात्मा गांधी के सामाजिक व राजनीतिक जीवन में दो पहिए यही सत्य और अहिंसा थे। उनके अनुसार सत्य ईश्वर का रूप है, जिसकी प्राप्ति जीवन का उद्देश्य है। महात्मा गांधी के अनुसार अहिंसा सत्य का परिणाम है। असत्य के कारण हिंसा, अत्याचार व अन्याय का जन्म होता है, तथा सत्य से इन बुराइयों पर विजय प्राप्त की जा सकती है।

महात्मा गांधी के अनुसार क्रोध से क्रोध पर बुराई से बुराई पर और हिंसा से हिंसा पर विजय प्राप्त नहीं हो सकती अहिंसक तरीकों से ही उत्पीड़न को समाप्त किया जा सकता है। हिंसा तो आग में घी डालने का काम करती है। उनके अनुसार अहिंसक तरीके से शत्रु के मन में सकारात्मक परिवर्तन लाए जा सकते हैं। जिससे शत्रु का दिल जीता जा सकता है, तथा उसे अपनी बात मनवा कर सुखद संबंध स्थापित किए जा सकते हैं।

महात्मा गांधी के अनुसार व्यक्ति को अहिंसा का पालन करना चाहिए, उन्होंने कहा था ऐसा कोई भी काम जो मेरी अंतरात्मा के खिलाफ हो उनका विरोध करने के लिए मैं आत्मबल का प्रयोग करता हूं महात्मा गांधी के अनुसार पृथ्वी पर कोई भी ऐसी शक्ति नहीं है, जो व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध कुछ करा सके एक इंसान की निजी स्वतंत्रता को बनाए रखना आवश्यक है।

महात्मा गांधी का जीवन परिचय

जन्म- महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहन दास करमचंद गांधी है। उनका जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ। उनके पिता का नाम करमचंद गांधी था, जो कि काठियावाड़ की रियासत मैं दीवान थे। उनकी माता का नाम पुतलीबाई था, जो कि करमचंद की चौथी पत्नी थी। रवींद्रनाथ टैगोर ने उन्हें महात्मा की उपाधि दी।

विवाह- महात्मा गांधी का विवाह 13 वर्ष की आयु में कस्तूरबा बाई से हुआ। उनसे महात्मा गांधी के 4 पुत्र हुए जिनके नाम हरीलाल गांधी, मणिलाल गांधी, रामदास गांधी और देवदास गांधी थे।

शिक्षा- महात्मा गांधी ने और पोरबंदर से मिडिल की शिक्षा प्राप्त की तथा राजकोट से हाई स्कूल की शिक्षा प्राप्त की। महात्मा गांधी का परिवार उन्हे बैरिस्टर (वकील) बनाना चाहता था। इसलिए वे वकालत की पढ़ाई के लिए लंदन यूनिवर्सिटी कॉलेज इंग्लैंड चले गए। वहां जाने से पहले उन्होंने अपनी माता को शराब और मांसाहार न करने का वचन दिया।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान- महात्मा गांधी ने अहिंसा के बल पर अंग्रेजों को देश छोड़कर जाने के लिए मजबूर कर दिया। महात्मा गांधी ने गोपाल कृष्ण गोखले की सलाह पर 1 वर्ष तक भारत भ्रमण किया। जिससे उन्हें देश की स्थिति का पता चला। उन्होंने देशवासियों के उत्थान के लिए, कुरीतियों की समाप्ति के लिए तथा देश की आजादी के लिए कई आंदोलन चलाए। जिनमें चंपारण और खेड़ा सत्याग्रह, खिलाफत आंदोलन, असहयोग आंदोलन नमक सत्याग्रह और स्वराज, हरिजन आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन आदि के जरिए देशवासियों को स्वच्छता, भाईचारे, आत्मनिर्भरता का तो संदेश दिया ही साथ ही साथ देश को आजादी भी दिलवाई। उन्होंने देस की आजादी के लिए करों या मारो का नारा दिया।

मृत्यु- 30 जनवरी, 1948 को जब महात्मा गांधी शाम के समय भ्रमण कर रहे थे, उस समय नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी को तीन गोलियां मारी। इस कृत्य के लिए नाथूराम गोडसे को 1949 में मौत की सजा दी गई। महात्मा गांधी की मृत्यु के समय उनके मुख से ‘हे राम’ शब्द निकला, जो कि भगवान राम को पुकारने का सूचक है।

निष्कर्ष

महात्मा गांधी के अनुसार मनुष्य जीवन का लक्ष्य स्वयं को जानना है। जिसका मतलब है, सत्य को पहचानना खुद को जानने के लिए गांधी जी ने सत्य, अहिंसा, असत्य, अपरिग्रह तथा ब्रह्मचर्य के नियम बताएं। गांधी जी ने सत्य को भगवान से जोड़ा। भगवान सच्चिदानंद है, जो सत, चित और आनंद से मिलकर बना है। उनके अनुसार सत्य न केवल बोलने में होना चाहिए, बल्कि विचारों में भी सत्यता होनी चाहिए।

अहिंसा को बढ़ावा देने के लिए माता-पिता, शिक्षक, फ़िल्मकार, पत्रकार आदि की महत्वपूर्ण भूमिका है। यही लोग सबसे अधिक नई पीढ़ी को प्रभावित करते हैं। हमें अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर अहिंसा के बारे में विचार करना चाहिए। मनुष्य को सभी प्राणियों के जीवन का आदर करना चाहिए, उसको भावनात्मक रूप से प्रेम करना चाहिए उन्हें कष्ट पहुंचाने के स्थान पर उनके कष्टों के प्रति संवेदनशील रहते हुए उनको प्रेम व सहायता प्रदान करनी चाहिए।
धन्यवाद

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