अंतर्राष्ट्रीय चैरिटी दिवस 5 सितंबर

अंतर्राष्ट्रीय चैरिटी दिवस World Charity Day 5 September

परोपकारी मनुष्य दान देने से कभी पीछे नहीं हटता है। ऐसा मनुष्य अपने मन से समस्त संसार को एक परिवार की भांति समझता है, तथा सदा अपनी क्षमता के अनुसार दान आदि कार्यों में लीन रहता है। दान करने वाले मनुष्य की आंखों  से आनंद के आँसू बहते हैं। उसके मन में दान लेने वाले के प्रति आदर होता है, वह मीठे वचन बोलता है। जिससे उसकी आत्मा पवित्र होकर ईश्वर के सन्निकट हो जाती है।

सुपात्र व्यक्ति को दान देने के बाद ऐसे व्यक्ति को जिस आनंद की प्राप्ति होती है, उसकी तुलना संसार की किसी भी अन्य वस्तु से नहीं की जा सकती है, और जो व्यक्ति किसी संकटग्रस्त व्यक्ति से मुंह मोड लेता है, निष्ठुर वचन बोलता है, या दान  देने के बाद पश्चाताप करता है। ऐसा करने से  पाप ही लगता है।

अंतर्राष्ट्रीय चैरिटी दिवस क्या है?

2030 तक सतत विकास के लिए सितंबर 2015 में अपनाए गए एजेंडा के तहत गरीबी के उन्मूलन के लिए यह दिन मनाया जाता है। वैश्विक स्तर पर गरीबी बहुत बड़ी चुनौती है, यह दिन गरीबी से जूझ रहे सबसे कमजोर लोगों के लिए समर्पित है। गरीबी के उन्मूलन के लिए कई राष्ट्रीय बहु राष्ट्रीय संस्थाएं व परोपकारी संगठन कार्य कर रहे हैं। यह संगठन व संस्थाएं ज़रूरतमंद लोगों की समस्याओं को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाते रहते हैं। ताकि बेहतर भविष्य लाया जा सके तथा एजेंडा 2030 के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।

विश्व दान दिवस क्यों मनाया जाता है? 

5 सितंबर, 1997 को इस दिन दान के क्षेत्र में अपना सब कुछ न्योछावर कर देने वाली महान हस्ती मदर टेरेसा का निधन हुआ था। उन्होंने ग़रीबों के संकटों को दूर करने में  कोई भी कमी नहीं छोड़ी। इसीलिए 5 सितंबर को उनकी मृत्यु के दिन को विश्व दान दिवस के रूप में मनाया जाता है। हंगरी देश की सरकार ने यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली के समक्ष 17 दिसंब,र 2011 को विश्व दान दिवस मनाए जाने का प्रस्ताव रखा। जिसका समर्थन किया गया, तथा 5 सितंबर को विश्व दान दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की गई।

मदर टेरेसा कौन थी?

मदर टेरेसा एक प्रसिद्ध नर्स और मिशनरी थी। उनका जन्म 1910 में हुआ। 1928 में वे भारत आई, और यहां पर दुखी  गरीब व बेघर लोगों को देखकर उन्होंने अपने आप को उनके लिए समर्पित कर दिया। 1948 में उन्होंने भारतीय नागरिकता स्वीकार की, तथा 1950 में उन्होंने कोलकाता में ‘मिशनरी ऑफ चैरिटी’ की स्थापना की, जिस से गरीबों के लिए उनका काम शहर तथा विश्व में विख्यात हो गया। उन्होंने अपने जीवन का 45 साल से अधिक समय बेघर, गरीब, बीमार, आनाथ तथा मरते हुए लोगों की सेवा में बिताए। उनका यह कार्य विश्व विख्यात हो गया।  तथा 1979 में उनके कार्यों के लिए उन्हें ‘नोबेल शांति पुरस्कार’ दिया गया, तथा उन्हें अन्य भी कई सम्मान दिए गए। गरीब व बेसहारा लोगों की सहायता करते हुए हुए 5 सितंबर, 1997 को 87 साल की आयु में वे मृत्यु को प्राप्त हुई।  उनकी मृत्यु के दिवस को विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय दान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

मदर टेरेसा के विचार Mother Teresa Quotes in Hindi

मदर टेरेसा ने अपने जीवन काल में स्वयं तो परोपकार के पथ का अनुसरण किया, साथ ही साथ दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित किया। उनके द्वारा कही गई कुछ बातें निम्न प्रकार से हैं।

“प्यार की भूख को मिटाना, रोटी की भूख को मिटाने से कहीं मुश्किल है।”

“दयालुता भरे शब्द बोलने में आसान हो सकते हैं, लेकिन इसकी गूँज वास्तव में अंतहीन होती है।”

“शांति के लिए आप क्या कर सकते हैं, घर जाओ और अपने परिवार से प्यार करो।”

“भगवान को हमारी सफलता नहीं चाहिए, उन्हे सिर्फ हमारे प्रयास देखने हैं।”

“मैं अकेले दुनिया को नहीं बदल सकती, लेकिन मैं कई लहरों को पैदा करने के लिए पानी में पत्थर डाल सकती हूं।”

“जब कोई व्यक्ति भूख से मरता है, तो ऐसा नहीं हुआ कि भगवान ने उसकी देखभाल नहीं की। यह इसलिए हुआ है, क्योंकि न तो आप और ना ही मैंने, उस व्यक्ति की देखभाल की जिसकी उसे जरूरत थी।”

“यह जरूरी नहीं कि आप दूसरों के लिए कितना करते हैं, बल्कि यह जरूरी है कि आप कितने मन से करते हैं।”

“हम सभी महान कार्य नहीं कर सकते, परंतु हम छोटे छोटे काम बड़े प्यार से कर सकते हैं।”

“हर जगह ख़ुशियाँ फैलाओ, जो आपके पास आए वह खुशी लेकर जाए।

“हम खुद महसूस करेंगे कि जो हम कर रहे हैं, वह सब समंदर में एक बूँद के समान है परंतु उस लुप्त बूँद के बिना समुंदर भी कुछ नहीं है।”

वेदों में दान का महत्व

वेदों में दान को हाथ का सर्वश्रेष्ठ आभूषण माना गया है, ना की किसी जेवर को वेदों में कहा गया है। कि मनुष्य को हजारों हाथों से  कमाना चाहिए, तथा लाखों हाथों से दान देना चाहिए, जो मनुष्य परोपकार के लिए जीते हैं। उसी को जीना कहा जाता है, वैसे तो सभी मनुष्य जीते ही हैं। वेदों में यह भी कहा गया है कि, दान व सहायता सिर्फ ज़रूरतमंद व्यक्ति की ही करनी चाहिए, किसी कुपात्र को दान करना व गलत काम के लिए दान करना भी गलत है।

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। अतः समाज के लिए मनुष्य के कुछ कर्तव्य भी बनते हैं, और इन कर्तव्य में सबसे प्रमुख दूसरों की मदद करना है। दान करने वाला मनुष्य करुणावान, त्यागी व सतकर्मी होता है। यह गुण एक अच्छे मनुष्य की पहचान है। पेड़ पौधे हमें फल देते हैं, नदियां जल देती हैं, जबकि वे इसके बदले हमसे कभी कुछ नहीं  मांगते। शास्त्रों में विद्या के दान को सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। क्योंकि अगर हम किसी के मन के अंधकार को दूर कर उसमें ज्ञान की ज्योति जलाते हैं, तो इससे उस मनुष्य का सारा जीवन सुखमय हो जाता है।

धन्यवाद

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