अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस 15 सितंबर

अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस International Democracy Day 15 September

लोकतंत्र सरकार व शासन का स्वरूप है, तथा साथ-साथ जीवन मूल्यों, स्वतंत्रता, समानता, सामाजिक आर्थिक न्याय आदि से भी जुड़ा हुआ है। दुनिया में यूनान, इटली जैसे देशों में लोकतंत्र बहुत पहले से है। लोकतंत्र किसी भी समाज की सर्वाधिक प्रिय तथा सबसे अधिक स्वीकृत की जाने वाली प्रणाली है।

लोकतंत्र जनता द्वारा, जनता के लिए, जनता का प्रशासन है। इस व्यवस्था में स्वच्छ व निष्पक्ष चुनाव के साथ-साथ कानूनी व्यवस्था, लोकतांत्रिक मूल तत्व, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, अभिव्यक्ति की आजादी, शक्तियों का बँटवारा भाषा, संपत्ति, धर्म, आदि की आजादी होती हैं।

अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस की घोषणा/कब मनाया जाता है?

8 नवंबर, 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने लोकतंत्र की आवश्यकता को पहचानते हुए हर वर्ष 15 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने कहा कि सभी देशों में लोकतंत्र के लक्षण लगभग एक समान हैं, इनका कोई आदर्श रूप नहीं है। लोकतंत्र एक वैश्विक मूल्य है, जो कि लोगों द्वारा व्यक्त की गई राजनीतिक, सांस्कृतिक, सामाजिक व आर्थिक व्यवस्थाओं को निर्धारित करने और जीवन के प्रत्येक पहलू में लोगों की भागीदारी को सुनिश्चित करना है।

अंतर सदस्य संघ ने सितंबर 1997 में लोकतंत्र को वैश्विक स्तर पर लाने के लिए प्रस्ताव पेश किया था, तथा 1998 में फिलीपींस में इंटरनेशनल कॉन्फ़्रेंस ICNRD के सम्मेलन में सरकारों, सांसदों तथा नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। 2006 में दोहा में ICNRD के छठे सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय लोकतांत्रिक दिवस का प्रस्ताव रखा गया। जिसके बारे में संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने मिलकर एक मत होकर 8 नवंबर, 200 7 को अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस की घोषणा कर दी 15 सितंबर, 2008 को यह दिवस पहली बार मनाया गया।

लोकतंत्र का अर्थ क्या है?

लोकतंत्र शब्द संस्कृत भाषा के शब्द लोक तथा तंत्र से मिलकर बना हुआ है। इसमें लोक का अर्थ होता है जनता, तथा तंत्र का अर्थ होता है शासन। अर्थात लोकतंत्र वह है जिसमें शासन, जनता द्वारा चलाया जाता है। अंग्रेजी भाषा का शब्द डेमोक्रेसी ग्रीक शब्द डेमोक्रेटिका से बना है, और इसका अर्थ होता है ‘लोगों का शासन’।

लोकतांत्रिक शासन पद्धति में जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनती है, तथा वे जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि जनता की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर शासन चलाते हैं। यह एक उत्तरदाई शासन प्रणाली होती है, जिसमें जनता के प्रतिनिधि एक दायित्व पूर्ण तरीके से जनता की सेवा करते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस का थीम

हर वर्ष अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस के लिए कोई एक थीम का चुनाव किया जाता है। जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:-

2017 का थीम “Democracy and Conflict Prevention.”

2018 का थीम “Democracy under Strain: Solutions for a Changing World.”

2019 का थीम “Participation.”

2020 का थीम

अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है?

अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस का उद्देश्य

विश्व में लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के बारे में विश्व भर में जागरूकता फैलाने के लिए 2007 में संयुक्त  राष्ट्र महासभा द्वारा अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस मनाने की घोषणा की गई। इसी वजह से हर वर्ष लोकतांत्रिक मूल्यों को पोषित करने के लिए हर वर्ष 15 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस मनाया जाता है। अंतर संसदीय संघ IPU ने दुनिया भर की सांसदों से इस दिन को मनाने के लिए विशेष आग्रह किया है, क्योंकि लोकतंत्र का केंद्र बिंदु संसद है, इसलिए लोकतंत्र को बढ़ावा देना भी संसद का ही कार्य है। स्वतंत्रता के मूल्य और मानव अधिकारों की रक्षा लोकतंत्र के मूल स्तम्भ है। इस दिन को मनाने का मकसद लोकतंत्र की रक्षा व लोकतांत्रिक सिद्धांतों को प्रोत्साहित करना है।

लोकतंत्र का इतिहास

आधुनिक युग में इंग्लैंड में लोकतांत्रिक संस्थाओं की शुरुआत सबसे पहले हुई। इसके बाद अमेरिका, स्विटज़रलैंड, फ्रांस आदि में ऐसी कनकई संस्थाएं बनाई गई इन्हें लोकतंत्र का गढ़ कहा जाता है।

आधुनिक लोकतंत्र की शुरुआत यूरोप में पुनर्जागरण और धार्मिक आंदोलनों के द्वारा हुई। 1688 में इंग्लैंड की रक्तहीन क्रांति, 1767 में अमेरिका की क्रांति, 1789 में फ्रांसीसी क्रांति द्वारा स्वतंत्रता समानता व भाईचारे के सिद्धांतों की नींव रखी। लोकतंत्र के बारे में  जॉन लॉक, जॉन स्टूअर्ट मिल, एडम स्मिथ, जेरेमी बेंथम, थॉमस हॉब्स, जीन जैक्स रूसो आदि ने कई लोकतांत्रिक सिद्धांतों की राह दिखाई।

लोकतंत्र का स्वरूप

विश्व में दो तरह के लोकतंत्र पाए जाते हैं। एक संसदीय शासन प्रणाली जो कि भारत, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड आदि देशों में मिलती है, तथा दूसरा राष्ट्रपति शासन प्रणाली जैसे कि अमेरिका में पाई जाती है। इन दोनों प्रणालियों में राज्यपाल या राष्ट्रपति शासन के सर्वोच्च अधिकारी होते हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति को वोट के अधिकार मिलते हैं।  जबकि संसदीय प्रणाली में राष्ट्रपति राज्यपाल सिर्फ नाम के ही सर्वोच्च होते हैं कयोऊनकी वे चुने गए मंत्रिमंडल की सलाह पर ही कार्य कर सकते हैं।

मानव अधिकारों के बिना लोकतंत्र की कल्पना अधूरी ही होती है। इसलिए 10 दिसंबर, 1948 को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार घोषणापत्र की चर्चा पूरी दुनिया भर में हुई। संयुक्त राष्ट्र में अलग से संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग स्थापित किया हुआ है। जिसका कार्य है पूरी दुनिया में मानव अधिकारों का संरक्षण करना।

भारत में लोकतंत्र का इतिहास

भारत में वैदिक काल से ही लोकतंत्र प्रचलन में है। प्राचीन समय में राजा जनता का प्रतिनिधि होता था, जो कि जन कल्याण के लिए शपथ लेता था। राजा की सहायता के लिए सभा समितियां आदि  होती थी। गुप्त काल, मौर्य काल, हर्ष काल में भी ग्राम पंचायतें होती थी। इन्हीं का आगे विकास होकर गणराज्य बने। बोद्ध काल में 1700 जनपद व 16 महाजनपद थे। यह जनपद वर्तमान संसदीय प्रणाली से मिलते जुलते थे। भारत में लोकतांत्रिक मूल्य प्राचीन काल से ही प्रचलन में थे।

आजाद भारत के संविधान के लिए संविधान सभा के सदस्यों ने एकमत होकर लोकतांत्रिक देश की इच्छा रखी। जिससे विविधताओं से भरे, इस बड़े देश को एक सूत्र में पिरो कर रखा जा सकता था।  भारत के संविधान की प्रस्तावना में कहा गया है कि “भारत एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न, लोकतांत्रिक, समानतावादी, धर्मनिरपेक्ष गणराज्य है।” भारत में संसद देश का सबसे मजबूत और शक्तिशाली सदन है। भारत में कार्यपालिका व्यवस्थापिका के प्रति उत्तरदाई होती है। संविधान में नागरिकों को विशेष अधिकार दिए गए हैं, जिनका हनन होने पर वे न्यायालय की सहायता ले सकते हैं। आजादी के बाद पहली बार 1951-1952 में व्यस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव किए गए। भारत का संविधान लिखित रूप में है, और यही इसकी सबसे मजबूत कड़ी है।

भारत दुनिया के सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। देश की जनता को अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार है। जिसके लिए चुनाव आयोग गठित किया गया है। जनता को अभिव्यक्ति और समानता का अधिकार है। इन सभी अधिकारों की जानकारी व रक्षा के लिए शिक्षा का अधिकार भी दिया गया है। अगर देश की जनता शासन के कार्यों से असंतुष्ट हो तो, वह विरोध भी जता सकती है। लोकतंत्र दुनिया में सबसे बेहतरीन शासन प्रणाली माना जाता है।

लोकतंत्र में कुछ ख़ामियाँ भी पैदा हो गई हैं। जैसे कि जोड़-तोड़ की राजनीति करना, राजनैतिक अपराध, राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार, न्याय और अधिकारों की पूर्ण पहुंच न होना। संसदीय वाद विवाद की कमी होना।  आदि कुछ बातों से शिक्षित समाज का राजनीति में रुझान धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, तथा यह लोकतंत्र के लिए बहुत ही चिंतनीय विषय है। इन्हीं विषयों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस हर वर्ष 15 सितंबर को मनाया जाता है।

धन्यवाद

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