अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस कब मनाया जाता है

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस International Literacy Day 8 September

किसी भी देश की आर्थिक तरक्की के लिए साक्षरता बहुत आवश्यक होती है। अगर किसी देश के नागरिक खूब पढ़े लिखे हो तो वह देश भी हर तरीके से मजबूत व संपन्न होगा। साक्षरता से रोज़गार व तरक्की के रास्ते खुलते हैं। जिससे व्यक्ति, समाज व समुदाय गरीबी व बेरोज़गारी के अभिशाप से बाहर निकलते हैं। साक्षरता से लोग अपने आसपास के बारे में, अपने अधिकारों के बारे में, अपने कर्तव्यों के बारे में, तथा अपने स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक रह सकते हैं। समाज में साक्षरता होने से वहां के लोगों की क्षमता धन व समय सभी की बचत होती है।  साक्षरता किसी भी देश की बुनियादी मुद्रा होती है।

साक्षरता का अर्थ और परिभाषा

साक्षरता शब्द के अनेक अर्थ है, साक्षर होना अर्थ पढ़ना और लिखने की क्षमता होने से है। सभी देशों में साक्षरता के अलग अलग अर्थ हैं, पर भारत में राष्ट्रीय साक्षरता के अनुसार अगर कोई व्यक्ति अपना नाम लिखने और पढने की काबिलीयत हासिल कर लेता है तो उसे साक्षर माना या कहा जाता है।

साक्षरता के उद्देश्य

भारतीय साक्षरता दिवस मनाने का उद्देश्य व्यक्ति और समाज के हर वर्ग को शिक्षा का महत्व बताकर उन्हें साक्षर करना है। साक्षरता का मतलब केवल पढऩा-लिखना या शिक्षित होना ही नहीं है। यह लोगों में उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूकता लाकर सामाजिक विकास का आधार बन सकती है।

विश्व साक्षरता दिवस (भारतीय साक्षरता दिवस) कब मनाया जाता है?

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन UNESCO के 14 वें सत्र में 26 अक्टूबर, 1966 को हर वर्ष 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाने की घोषणा की गई, तथा उसके बाद  8 सितंबर, 1967 को पहली बार अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया गया। यह दिन मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति समाज और समुदाय को शिक्षित करना है। अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का लक्ष्य ‘सबके लिए शिक्षा’ इस बात पर केंद्रित होता है।

राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2020 का थीम

हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के लिए थीम रखा जाता है। 2020 में महामारी का दौर है। इस वर्ष इसका थीम “ Literacy teaching and learning in COVID-19 crisis and beyond” रखा गया है। 2019 में इसका थीम “Literacy and Multilingualism.”रखा गया था।

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का महत्व

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने का लक्ष्य पूरे विश्व में अज्ञान का अंधकार दूर करके ज्ञान की ज्योति जलाना है।   इसका लक्ष्य सभी पुरुषों, महिलाओं, बच्चों सभी को शिक्षित करना है। साथ ही साथ शिक्षा के बल पर जीवन यापन के लिए उनका मार्ग प्रशस्त करना है। इनके साथ साथ साक्षरता दर में बढ़ोतरी होने से गरीबी  की समस्या का उन्मूलन होगा, अज्ञान की वजह से स्वास्थ्य के प्रति जानकारी न होने के कारण  मृत्यु दर में कमी आएगी, आदि कई चीजें शिक्षा के साथ ही जुड़ी हुई हैं।

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस कैसे मनाया जाता है?

इस दिन विश्व भर में साक्षरता के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। देश की सरकार द्वारा लोगों को साक्षर करने के लिए नई नई योजनाएं बनाई जाती हैं। जिससे कि लोगों को अधिक से अधिक संख्या में शिक्षा के साथ जोड़ा जा सके, व उनके जीवन स्तर में सुधार लाया जा सके। स्कूलों, कॉलेजों या अन्य शिक्षण संस्थाओं में इस अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम के तहत भाषण, निबंध, परीचर्चाएं आदि कई प्रकार की गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं।

शिक्षा की दर में कमी के कारण

किसी भी क्षेत्र में शिक्षा की कमी कई बातों पर निर्भर करती है। जिसमें प्रमुख है, शिक्षा का सार्वभौमीकरण न होना अगर लोगों को उनके घर के पास शिक्षा नहीं मिलेगी तो वे अशिक्षित ही रह जाएंगे। इसके अलावा जो लोग अनपढ़ या गरीब हैं, वे हीन भावना से ग्रसित हो जाते हैं, तथा वे अपने आप को पढ़े लिखे लोगों के बराबर नहीं समझते हैं। यह भी एक बहुत बड़ी बाधा है। इसके अलावा भी जातिवाद, जागरूकता की कमी, गरीबी आदि कई कारण हें। लड़कियों में भी साक्षरता दर कम रहने की वजह यही है कि, उनके घरों के पास स्कूल नहीं है, या फिर स्कूलों में शौचालय, स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव,  छेड़छाड़  का डर आदि कई कारण है। जिससे माता-पिता उनकी शिक्षा में रुचि नहीं लेते हैं।

वैश्विक स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में आ रही परेशानियां

यूनेस्को के आंकड़ों के अनुसार आज विश्व में लगभग 773 मिलियन लोग पढ़ लिख नहीं सकते हैं। विश्व भर में COVID-19 महामारी की वजह से 91% विद्यार्थी व 63 मिलियन अध्यापक प्रभावित हुए हैं। अध्यापकों द्वारा डिस्टेंस लर्निंग के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों की अधिकतर प्रतियोगिताएं स्थगित कर दी गई हैं। 2020 में लिटरेसी डे का मुख्य  केंद्र COVID-19  महामारी में शिक्षा में आ रही कमी को दूर करना है। यह समय एक बहुत बड़े बदलाव का समय है। इस समय पढ़ने व पढ़ाने के तरीके में बहुत बड़ा बदलाव लाना होगा। हमें शिक्षा पर खर्च को बढ़ाना होगा, जिससे कि हम किसी भी परिस्थिति में शिक्षा देने से रुकें नहीं। हमें शिक्षा को मजबूत बनाना होगा।  इस समय में हमें अध्ययन व अध्यापन के बारे में कुछ नया सोचना होगा, हमें इस समय सबको साथ लेकर चलना होगा, ताकि कोई पीछे न छूट जाए। तभी हम सतत विकास एजेंडा 2030 के लक्ष्य 4.6 जो कि सभी को बेसिक साक्षरता व गणितीय ज्ञान उपलब्ध कराने की बारे में है, के उस लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे।

भारत में साक्षरता दर

एक अनुमान के अनुसार भारत में 78.9% लोग साक्षर हैं, तथा 59.3% महिलाएं साक्षर हैं। देश में केरल सबसे अधिक साक्षरता दर वाला राज्य है, तथा बिहार सबसे कम साक्षरता दर वाला राज्य है। भारत सरकार ने नेशनल लिटरेसी मिशन 1988 में शुरू किया था। जिसका लक्ष्य सभी को पढ़ना, लिखना तथा बेसिक गणित आदि की जानकारी होना आवश्यक है, रखा गया था। इसके तहत और भी कई योजनाएं शुरू की गई जैसे 2001 में सर्व शिक्षा अभियान इसमें 6 से 14 वर्ष तक बच्चों की स्कूली शिक्षा सुनिश्चित करना था। इसके अलावा महिलाओं के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना तथा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना तथा और भी कई प्रकार की योजनाएं शुरू की गई। ऑनलाइन शिक्षा देने के लिए डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण योजना भी शुरू की गई है। इनका लक्ष्य यही है कि, लोगों को अधिक से अधिक शिक्षित करके गरीबी व बेरोज़गारी के दलदल से निकाल कर मुख्यधारा में लेकर आना है। जिससे कि सभी लोगों में आर्थिक समानता आ जाए।

साक्षरता दर के आधार पर भारत के राज्यो का आंकड़ा देखने के लिए क्लिक करे ।

साक्षरता दर को बढ़ाने के लिए सरकार क्या कर सकती है?

विश्व भर में सभी देशों की सरकार यही चाहती है कि उनके देश में सभी लोग साक्षर हो। इस कार्य के लिए वह अनेक योजनाएं बनाते हैं, तथा उनका क्रियान्वयन करते हैं। शिक्षा को जन जन तक पहुंचाने के लिए सरकार को प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों को आबादी के 1 किलोमीटर के दायरे में उपलब्ध करवाना चाहिए। जिससे छोटे-छोटे  बच्चों और लड़कियों को स्कूल पहुंचने में मुश्किलें ना हो। दूसरा स्कूलों में साफ शौचालय, साफ पीने का पानी तथा स्वास्थ्य सुविधाओं की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए। स्कूलों में अध्यापकों को स्कूल के आसपास के क्षेत्रों में सर्वे करना चाहिए कि किस परिवार के बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं, तथा जो अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं भेजते हैं।  उनकी समस्याओं का पता लगाकर, उन समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए, तथा अभिभावकों को संतुष्ट करके बच्चों को स्कूल में भेजने के लिए मनाना चाहिए। इन सभी कार्यों के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति व परिश्रम की जरूरत होगी। जिन देशों में शिक्षा बहुत कम है, उन देशों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विकसित व विकासशील देशों को वहां की सरकारों से बात करनी चाहिए, तथा जहां तक संभव हो सके उनकी सहायता भी करनी चाहिए।

अज्ञानता या अनपढ़ता किसी भी देश व समाज के विकास में बाधक है, इसके अभिशाप से आर्थिक व सामाजिक असमानता फैलती है, तथा अज्ञानता वश कई समस्याएं पैदा हो जाती हैं। जिससे समय व धन की बर्बादी होती हैं। सरकार कई अभियानों में नीतियों द्वारा देश में साक्षरता दर बढ़ाने के लिए प्रयास करती रहती हैं। जैसे सर्व शिक्षा अभियान बालिका शिक्षा के लिए जेसी कई योजनाएं हैं। देश में साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए जीडीपी का एक बड़ा भाग शिक्षा पर खर्च किया जाता है, तथा आने वाले समय में जीडीपी का 6% शिक्षा के लिए खर्च करने का प्रावधान है। बस आवश्यकता इस बात की है कि, व्यक्ति जागरूक बने योजनाओं का लाभ लें तथा अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाए। जिससे उनका व उनके बच्चों का जीवन अज्ञान के अंधकार से निकलकर ज्ञान के प्रकाश से जगमगा उठे।

धन्यवाद

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