भारतीय वायु सेना दिवस कब मनाया जाता है

भारतीय वायु सेना दिवस Indian Airforce day 8 October

भारतीय वायु सेना विश्व की चौथी सबसे शक्तिशाली वायु सेना है। भारतीय वायु सेना भारतीय सीमाओं की रक्षा करती है, प्राकृतिक आपदाओं में सहायता करती है, दुर्गम स्थानों में युद्ध व रक्षा का कार्य भारतीय वायु सेना के मजबूत कंधों ने उठा रखा है।

भारतीय वायु सेना के पास दुश्मन के मंसूबों को धूल चटाने के लिए एक से बढ़कर एक लड़ाकू विमान और हेलिकाप्टर हैं। बीते कुछ वर्षों में वायु सेना ने अपने विमानों का आधुनिकरण किया है, तथा नए व शक्तिशाली एयरक्राफ़्ट को भी वायु सेना में शामिल किया है। भारतीय वायु सेना में लगभग 1700 से अधिक विमान व 1 लाख 20 हजार  से अधिक कर्मचारी हैं।

भारतीय वायु सेना की स्थापना कब हुई?

8 अक्टूबर, 1932 को ब्रिटिश शासन काल में भारतीय वायु सेना की स्थापना हुई। उस समय उसे रॉयल इंडियन एयरफोर्स कहा जाता था। आजादी के बाद इसका नाम भारतीय वायु सेना रखा गया। भारतीय वायु सेना की पहली उड़ान 1 अप्रैल, 1933 में भरी, उस समय भारतीय वायुसेना के पास 4 एयरक्राफ़्ट तथा 6 ट्रेंड ऑफिसर व 19 हवाई सैनिक थे।

भारतीय वायु सेना दिवस कब मनाया जाता है?

हर वर्ष 8 अक्टूबर को भारतीय वायु सेना दिवस मनाया जाता है। 8 अक्टूबर के दिन ही भारतीय वायु सेना की स्थापना की गई थी। इस दिन की याद में हर वर्ष यह दिन धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन भारतीय वायु सेना के सम्मान में विशेष कार्यक्रम होते हैं। जिनमें वायु सेना अपना शक्ति प्रदर्शन करती है। इस अवसर पर वायु सेना में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सैनिकों को पुरस्कृत भी किया जाता है।

भारतीय वायु सेना का मुखिया कौन होता है?

वायु सेना का कमांडर इन चीफ भारत का राष्ट्रपति होता है, तथा वायु सेना का अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल होता है, जो कि सेना का नेतृत्व करता है।

वायु सेना का मुख्यालय कहाँ है?

भारतीय वायुसेना मुख्यालय नई दिल्ली में है।

भारतीय वायु सेना के पद

वायुसेना अफसरों के निम्नलिखित पद है:
एअर चीफ मार्शल, एअर मार्शल, एअर वाइस मार्शल, एअर कमोडोर, ग्रुप कैप्टन, विंग कमांडर, स्क्वॉड्रन लीडर, फ्लाइट लेफ्टिनेंट, फ्लाइंग अफसर तथा पाइलट अफसर।

गैर कमिशन अधिकारियों के पद निम्नलिखित हैं:
मास्टर वारंट अफसर, वारंट अफसर, जूनियर वॉरेंट ऑफिसर या फ्लाइट सारजेंट, सारजेंट, कार्पोरल, लीडिंग एअरक्राफ्ट मैन, एअरक्राफ्ट्स मैन क्लास १ तथा एअरक्राफ्ट्स मैन मैन क्लास २

भारतीय वायु सेना का इतिहास

8 अक्टूबर, 1932 को भारतीय वायु सेना के गठन के समय उसमें सिर्फ एक दस्ता था। जिसमें 6 ऑफिसर तथा 19 सिपाही शामिल थे। इसके लगभग 4 साल बाद पहली बार उत्तरी वजीरिस्तान में बागी भिटानी जनजाति के खिलाफ लड़ाई में हिस्सा लिया। जून 1938 में सी फ्लाइट का गठन किया गया। द्वितीय विश्व युद्ध के समय वायु सेना में 16 अफसर और 622 सैनिक थे। 1939 में चैटफील्ड समिति द्वारा मुख्य बंदरगाहों की सुरक्षा हेतु 5 हवाई दस्तों का गठन करने की सिफारिश की गई, तथा इसके सुझाव अनुसार मुंबई, मद्रास, कराची, कोलकाता तथा कोच्चि में पांच हवाई दस्ते बनाए गए, तथा विशाखापट्टनम में छठा हवाई दस्ता बनाया गया। द्वितीय विश्व युद्ध में योगदान के लिए मार्च 1945 में भारतीय वायु सेना को रॉयल की उपाधि दी गई। आजादी के समय भारतीय वायु सेना को भारत व पाकिस्तान में बांट दिया गया। जनवरी 1950 में गणतंत्र भारत में वायु सेना की रॉयल की उपाधि हटा दी गई। भारतीय वायु सेना की 7 कमान है। पूर्वी कमान शिलांग में है, पश्चिमी कमान दिल्ली में है, दक्षिणी कमान गांधी नगर में है, केंद्रीय कमान इलाहाबाद में है, ओर दक्षिणी कमान तिरुअनंतपुरम में स्थित है।

वायु सेना का योगदान

वायु सेना का देश की सुरक्षा व आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के साथ चार बार व चीन के साथ एक बार हुए युद्ध में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। वायु सेना द्वारा चलाए गए सफल ऑपरेशन ऑपरेशन विजय, ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन कैक्टस आदि कुछ महत्वपूर्ण है। भारतीय वायु सेना ने द्वितीय विश्व युद्ध में अपनी भूमिका निभाई है। भारतीय वायु सेना ने आजादी के तुरंत बाद कश्मीर में पाकिस्तान की  घुसपैठ को रोकने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी।

भारत के पास कुल कितने लड़ाकू विमान है?

भारतीय वायुसेना विश्व की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना मानी जाती है। भारतीय वायुसेना के पास 900 लड़ाकू एयरक्राफ्ट हैं जबकि कुल सक्रिय हवाई जहाजों की संख्या 1,720 है।

भारतीय वायुसेना की ताकत।

भारतीय वायु सेना के पास अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस शक्तिशाली कई लड़ाकू विमान और हेलीकाप्टर हैं, जो कि हर तरह से दुश्मन का सामना करने के लिए सक्षम है। इनमें सुखोई 30MKI, 2 सीट व 2 इंजन वाला रूस में निर्मित विमान है। जो कि अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। इसकी अधिकतम गति 2500 किलोमीटर प्रति घंटा है। मिराज 2000, 1 सीट व एक इंजन वाला लड़ाकू विमान है। मिग 29 यह 1 सीट व 2 इंजन वाला रूस में बना हुआ अत्याधुनिक विमान है। mig-27 यह भी रूस में बना हुआ एक इंजन में 1 सीट वाला विमान है। मिग-21BISON यह एक इंजन वाला  लड़ाकू विमान है। जगुआर दो इंजन व 1 सीट वाला स्ट्राइक लड़ाकू विमान है। इसके अतिरिक्त भारतीय वायु सेना में फ्रांस में निर्मित अत्याधुनिक लड़ाकू विमान रफाल को शामिल किया गया है। जिससे वायु सेना की शक्ति और भी अधिक बढ़ गई है।

इसके अतिरिक्त भारतीय वायु सेना में कई अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं, जो की लड़ाई करने के लिए, सैनिकों को दुर्गम स्थानों तक पहुंचाने के लिए व उन्हें सामान व स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए काम में लाए जाते हैं। भारत के पास MI-25, MI-35, दो इंजन वाला लड़ाकू हेलीकॉप्टर है। MI-26 रूस में बना टर्बो सैफ कॉप्टर है। इसके अलावा चेतक, चिता आदि कई तरह के आधुनिक हेलीकॉप्टर वायु सेना में शामिल है।

भारतीय वायु सेना ने अपने पूर्ण समर्पण और निष्ठा से सभी कर्तव्यों को निभाया है, तथा वायु सेना ने अपने शौर्य के बल पर हर मोर्चे पर देश का सिर गर्व से ऊंचा उठाया है। देश की किसी भी आपदा के समय एयर फोर्स के विमान व सैनिक राहत व बचाव कार्यो में सबसे आगे रहते हैं। वायु सेना के कंधों पर देश की बाह्य व आंतरिक सुरक्षा की बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है, जो कि वायु सेना पिछले 88 वर्षों से लगातार निभाती आ रही है।

जय हिंद

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