हृदय रोग क्या है? हृदय रोग के लक्षण एवं उपचार

हृदय रोग Cardiovascular Diseases (CVDs)

विश्व भर में हृदय रोग मृत्यु का सबसे पहला कारण है। इस रोग से किसी अन्य रोग के मुकाबले सबसे अधिक लोग मरते हैं। 2016 में विश्व भर में लगभग 1 करोड 79 हजार लोगों की मृत्यु हृदय रोग से हुई, जो कि किसी भी अन्य रोग से होने वाली मृत्यु का 31% थी। और हृदय रोगों में भी हार्ट अटैक (Ischemic heart Disease) से सबसे अधिक मृत्यु हुई हैं। यह ह्रदय रोगों से होने वाली मौतों का 85% था। ह्रदय रोगों से सबसे अधिक मृत्यु कम आय वाले देशों में होती हैं। मुख्यतः ह्रदय रोग का कारण मोटापा (High BMI) है। तंबाकू का उपयोग, गलत खानपान, शारीरिक कार्य कम करना, शराब आदि हृदय रोग के कारण है।

हृदय रोग क्या है? / हृदय रोग का अर्थ

हृदय रोग विशेषज्ञ अर्थ (Cardiovascular Diseases (CVDs)) हृदय और रक्त वाहिकाओं में होने वाले विकारों से होता है। यह कई बीमारियों का समूह है, इसके अंतर्गत आते हैं।

  1. कोरोनरी ह्रदय रोग (Coronary heart disease)-यह रोग हृदय रक्त प्रवाहित करने वाली रक्त वाहिकाओं में विकार के कारण होता है।
  2. सेरेब्रोवस्कुलर रोग (Cerebrovascular disease)-यह रोग मस्तिष्क में रक्त भेजने वाली रक्त वाहिकाओं का रोग है।
  3. परिधीय धमनी रोग (Peripheral arterial disease)-यह लोग हाथ पैरों में रक्त पहुंचाने वाली रक्त वाहिकाओं का रोग है।
  4. रूमेटिक हृदय रोग (Rheumatic heart disease)-यह रोग रूमेटिक बुखार से होता है। इसमें हृदय की मांसपेशियों और वाल्व को नुकसान पहुँचता है।
  5. जन्म जात हृदय रोग (Congenital heart disease)– यह रोग जन्म के समय हृदय संरचना की विकृतियों के कारण होता है।
  6. गहरी शिरा घनास्त्रता और फुफ्फुसीय अन्त: शल्यता (deep vein thrombosis and pulmonary embolism)– इस रोग में पैर की नसों में थक्के जम जाते हैं। जो हृदय और फेफड़ों को अव्यवस्थित और स्थानांतरित कर सकते हैं।

हृदय या मस्तिष्क को रक्त पहुंचाने वाली नसों में रूकावट होने के कारण रक्त की पूर्ण आपूर्ति नहीं हो पाती है। जिससे दिल का दौरा और स्ट्रोक हो सकता है। यह तीव्र घटनाएं हैं, जो मृत्यु का कारण बनती हैं।

हृदय रोग के कारण

हृदय रोग होने के कई कारण हैं। जिनमें शामिल हैं, गलत आहार, शारीरिक कार्य न करना या कम करना, तंबाकू व शराब का अधिक सेवन करना, बूढ़े व्यक्तियों में रक्तचाप अधिक होना, रक्त में शर्करा (Diabetes) बढ़ना, वजन का बढ़ना आदि इन कारकों पर नियंत्रण कर के दिल का दौरा और स्ट्रोक आदि के जोखिम को रोका या कम किया जा सकता है। इसके अलावा कुछ अन्य कारण हैं। जैसे वैश्वीकरण, शहरीकरण, तनाव, गरीबी और वंशानुगत कारण शामिल हैं। अपनी जीवन शैली में कुछ परिवर्तन करके हृदय रोग के जोखिम को कम किया जा सकता है। जिसमें स्वस्थ खान-पान व स्वस्थ दिनचर्या शामिल हैं।

हृदय रोग के लक्षण

प्राथमिक स्तर पर अक्सर रक्त वाहिकाओं की बीमारियों के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। दिल का दौरा या स्ट्रोक इस बीमारी की पहली चेतावनी हो सकती है। दिल के दौरे के लक्षण में शामिल हैं छाती के केंद्र में दर्द होना, बाजू में दर्द होना, बेचैनी, बाएं कंधे कोनी जबड़े या पीठ पर दर्द होना, इसके अलावा सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। बेहोशी होना शरीर ठंडा होना पीला हो जाना आदि लक्षण हो सकते हैं। स्ट्रोक के कुछ लक्षण जिनमें हाथ पैर चेहरे में अचानक कमजोरी आ जाती है, या शरीर के एक तरफ से हाथ पैर और चेहरा सुन्न होने लगता है। भ्रम का होना, बोलने में, समझने में मुश्किल होना, कम दिखाई देना, चक्कर आना, तेज सिर दर्द होना बेहोशी होना आदि इसके लक्षण हैं।

इसके अलावा रूमेटिक बुखार से भी हृदय रोग के वॉल व हृदय की मांसपेशियों को नुकसान होता है। रूमेटिक हृदय रोग के लक्षण हैं। सांस लेने में तकलीफ, थकान, धड़कन तेज या धीमी होना, सीने में दर्द, बेहोशी इसके बुखार के लक्षण हैं। बुखार से जोड़ों में दर्द और सूजन पेट में ऐंठन और उल्टी आदि हो सकती हैं।

हृदय रोग से बचाव

वसा चीनी और नमक का उपयोग कम करना चाहिए। शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाना चाहिए जैसे पैदल चलना, साइकिल चलाना, व्यायाम करना आदि शराब के सेवन को कम करना चाहिए, तंबाकू का सेवन बंद करना चाहिए, स्वस्थ भोजन का उपयोग करना चाहिए आदि। हृदय रोग को रोकने के साधन है। उच्च रक्तचाप और हाइपर्कोलस्ट्रॉलेमिया को नियंत्रित करना बहुत आवश्यक है।

कभी-कभी हृदय रोग से बचने के लिए तथा लंबा जीवन जीने के लिए महंगा सर्जिकल ऑपरेशन जरूरी होता है। इसमें शामिल है कोरोनरी धमनी बाईपास, गुब्बारा एनजीओप्लास्टि वाल्व की मरम्मत या प्रत्यारोपण हृदय प्रत्यारोपण आदि काफी महंगे विकल्प हैं।

शराब के अधिक उपयोग, शारीरिक निष्क्रियता, अधिक वजन बढ़ना, अधिक नमक के सेवन आदि व्यवहार संबंधी जागरूकता को वैश्विक स्तर पर लागू किया जाना चाहिए। तथा उच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया जाना चाहिए। इसके लिए व्यापक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए

हृदय रोग से तीन चौथाई मौतें कम व मध्यम आय वाले देशों में होती हैं। ऐसे देशों में इन रोगों का प्रारंभिक स्तर पर पता नहीं लग पाता है। तथा वे इस रोग का शिकार हो जाते हैं। इस रोग से मरने वालों में बहुत से व्यस्त भी शामिल हैं। इस रोग के लिए आवश्यक उपकरणों के खर्च व इलाज पर अधिक खर्च होता है। जिससे अर्थव्यवस्था पर अधिक बोझ पड़ता है।

धन्यवाद

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