कच्छ भूकंप गुजरात त्रासदी 2001 (Gujarat Earthquake 2001)

26 जनवरी 2001 का दिन था, सुबह का समय था, सारा देश गणतंत्र दिवस की ख़ुशियाँ मना रहा थाI अचानक गुजरात में एक भयानक भूकंप का झटका महसूस हुआ, और देखते ही देखते सब कुछ तहस-नहस हो गयाI हर तरफ मलबा ही मलबा बिखरा पड़ा था, लाशें ही लाशें बिखरी पड़ी थीI किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था, इस तरह की स्थिति किसी ने नहीं देखी थीI यह ऐसी भयानक त्रासदी थी, जिसने संपूर्ण देश को हिला कर रख दिया थाI हजारों घर उजड़ चुके थे, कुछ लोग मर चुके थे, कुछ घायल थेI आइए इस भूकंप के द्वारा किए गए नुकसान को समझने की कोशिश करेंI

26 जनवरी 2001 को सुबह 8:46 पर 2 मिनट के लिए एक भूकंप का झटका महसूस हुआ, इसका एपी सेंटर चौबारी गांव, भचाऊ तहसील से 9 किलोमीटर दूर और भुज से 20 किलोमीटर दूरी पर स्थित थाI इसकी गहराई 16 किलोमीटर थीI भारतीय मौसम विभाग द्वारा इसकी तीव्रता 6.9 रिएक्टर होने का अनुमान लगाया गया, परंतु अमेरिकी वैज्ञानिकों के सर्वेक्षण के अनुसार इसकी तीव्रता 7.6 से 7.7 रिएक्टर के बीच थी इसमें लगभग 19,000 लोगों की मौतें हुई केवल कच्छ जिले में 12,290 मौतें हुईI जिनमें 7,065 0 से 14 वर्ष के बच्चे थेI व 9110 महिलाएं शामिल थीI

इस भूकंप त्रासदी में 1,67,000 लोग घायल हुए, जिनमें ज्यादातर जीवन भर विकलांग रहेI इसमें 348 अनाथ हुए व 826 विधवा हुईI इस भूकंप त्रासदी में चार लाख मकान तबाह हो गए इस भूकंप त्रासदी का असर 700 किलोमीटर तक हुआ इसका कुछ असर पाकिस्तान में भी हुआ पाकिस्तान में इसके द्वारा 18 लोगों की मौत हुईI भारत में गुजरात के अहमदाबाद, राजकोट, जामनगर, सुरेंद्र नगर और पाटन जिलों में भारी तबाही हुईI इससे 12 जिलों में लगभग 6,00,000 लोग बेघर हो गएI इस भूकंप त्रासदी में 450 गांवों का नामो निशान मिट गयाI यह भूकंप पिछले 180 सालों मैं हुए भूकंप में सबसे भयावह थाI

इस भूकंप का मुख्य कारण भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट सीमा के बीच अभिसरण प्लेट सीमा पर हुए दबाव को माना जाता हैI भारत में कुल क्षेत्र का 56% भूकंपीय गतिविधियों के लिए रेड जोन माना जाता हैI यह भूकंप रिवर्स डूप स्लीप (जोर फाल्ट) के कारण हुआI

भूकंप का कारण मुख्यतः भूमि गत गतिविधियाँ होती हैंI मोटे तौर पर हम देखें तो पृथ्वी मुख्यतः सात बड़ी टेक्टोनिक प्लेट से बनी हैI वह भी छोटी प्लेटों से बनी है यह प्लेटें अपना स्थान बदलती रहती हैं जब दो प्लेटें आपस में टकराती हैं, या रगड़ खाती हैं, तो भूकंप की स्थिति पैदा होती हैI

भारत में हुई कच्छ भूकंप त्रासदी के कारण जनसंख्या की बहुत बड़ी हानि हुई जिससे श्रम वह बाजार पर बहुत बड़ा असर पड़ा, इससे लोगों की संपत्ति नष्ट हो गईI इसका भारत की जीडीपी पर भी बहुत गहरा प्रभाव पड़ा, वित्तीय खातों पर बहुत बुरा असर पड़ा, इस त्रासदी में लगभग 99 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ, तथा इसके पुनर्निर्माण में 106 अरब रुपए का खर्च आयाI उस समय प्रधानमंत्री पद का कार्यभार श्री अटल बिहारी वाजपेई जी के हाथ में था, उनके अथक प्रयासों से इस भयानक त्रासदी में हुए नुकसान की भरपाई की गई, व जनजीवन को फिर से पटरी पर लाया गयाI इस त्रासदी में हुए जान और माल के नुकसान को वापस नहीं लाया जा सकता, परंतु भारत देश ने जिस दृढ़ संकल्प व इच्छाशक्ति का परिचय दिया वह अविस्मरणीय है I
धन्यवादI

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