हवा महल जयपुर

हवा महल जयपुर के पर्यटन स्थलों में एक विशेष स्थान रखता है। यह महल अपनी अद्भुत वास्तुकला के कारण जाना जाता है, तथा इस महल में झरोखों व खिड़कियों की अधिकता के कारण हमेशा ठंडी हवाएं चलती रहती हैं। जिस कारण इसे हवा महल कहते हैं।

क्योंकि इस इमारत का निर्माण लाल पत्थरों से किया गया है। इसलिए इसे लाल मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह इमारत बिना किसी नीव के बनी हुई पांच मंजिला इमारत है। इसकी भव्यता के कारण भारतीय व विदेशी फिल्मों के लिए यह अच्छा शूटिंग पॉइंट है। आइए जयपुर के इस महल के बारे में और अधिक जाने।

हवामहल का निर्माण क्यों करवाया गया?

उस समय राजपूत महिलाओं में पर्दा प्रथा का प्रचलन था, व महिलाओं को सार्वजनिक रूप से उत्सवों में शामिल होने की इजाजत नहीं थी। इसलिए वे उत्सव में शामिल होने से वंचित रह जाती थी। इसी समस्या के समाधान के लिए हवा महल का निर्माण करवाया गया।

चैत्र शुक्ल तृतीया को अपनी रानियों को “शाही गणगौर” की सवारी दिखाने के लिए राजपूत शासक सवाई प्रताप सिंह ने हवामहल का निर्माण करवाया। जयपुर की शाही गणगौर की सवारी पूरे देश में प्रसिद्ध है।

हवा महल का निर्माण किसने करवाया?

हवा महल का निर्माण जयपुर के शासक सवाई प्रतापसिंह ने 1799 ईस्वी में करवाया था। इस महल के निर्माण के लिए उस्ताद लाल चंद को हवा महल के वास्तुकार के रूप में चुना गया था।

जयपुर हवा महल का इतिहास History of Hawa Mahal in Hindi

अपने प्रारंभिक काल में  जयपुर के शासक सवाई प्रताप सिंह ने मराठों से संघर्ष किया, तथा बाद में उन्होंने स्थापत्य कला में अपना संपूर्ण योगदान दिया। इनके दरबार में 22 विद्वान होते थे, जिन्हें गंधर्व बाईसी कहा जाता  था। इसके अलावा उनके दरबार में 22 संगीतकार, 22 नृत्यकार तथा अन्य विभागों में भी 22-22 सदस्य नियुक्त किए जाते थे। कहने का तात्पर्य यह है कि, उनकी वास्तुकला में अत्यधिक रुचि थी।

राजा सवाई प्रताप सिंह ने अपने शासनकाल में 1799 ईस्वी में हवामहल का निर्माण करवाया।  इसके निर्माण का उद्देश्य राजपूत महिलाओं को उत्सव  देखने का अवसर प्रदान करना था। जिससे कि उन्हें स्वतंत्रता का एहसास हो सके। इसके अलावा इस महल में  खिड़कियों व झरोकों की अधिकता के कारण इस में तेज ठंडी हवाएं चलती थी। जिससे महिलाओं को प्रसन्नता व स्वास्थ्य की प्राप्ति होती थी।

हवा महल की वास्तुकला

हवा महल वास्तुकला का एक अद्भुत उदाहरण है। यह महल राजपूताना व मुगल दो शलियों में बना हुआ है। इसके वास्तुकार उस्ताद लाल चंद थे।

हवा महल की बनावट “भगवान कृष्ण के मुकुट” की तरह से है, क्योंकि सवाई प्रताप सिंह कृष्ण के बहुत बड़े भक्त थे। जयपुर शहर में एक गोविंद देव जी भगवान श्री कृष्ण का मंदिर है। सवाई प्रताप सिंह ने  गोविंद देव जी को जयपुर का शासक घोषित कर दिया था। तथा खुद दीवान पद पर रहे। इससे उनकी कृष्ण भक्ति का पता चलता है।

यह महल पिरामिड के आकार का है। इसलिए इसे पिरामिडानुकार आकृति का भी कहा जाता है। इसमें लगे जाली व झरोखे मधुमक्खी के छत्ते के समान प्रतीत होते हैं। इस महल में ऊपरी मंजिलों पर जाने के लिए सीढ़ियां नहीं है। ऊपर की मंजिल पर जाने के लिए  चढ़ाई रैंप हैं।

हवा महल में कितनी खिड़कियां है, व कितने झरोखे हैं?

हवा महल में कुल 953 खिड़कियां हैं। तथा इसमें कुल 365 जाली झरोखे हैं। जिनमें से कुछ लकड़ी से भी बने हुए हैं। इनकी यह खास बात है, कि सारी खिड़कियां पूर्व दिशा में खुलती हैं। इन खिड़कियों व जाली झरोखों के कारण यह बहुत हवादार है।

हवा महल में कुल कितनी मंजिलें हैं?

जयपुर का हवामहल एक पांच मंजिला इमारत है इसके नाम इस प्रकार हैं

  1. शरद मंदिर- यह सबसे निचला भाग है, इसे प्रथम तल कह सकते हैं।
  2. रतन मंदिर- यह दूसरी मंजिल है।
  3. विचित्र मंदिर- यह हवा महल की तीसरी मंजिल है।
  4. प्रकाश मंदिर- यह हवा महल का चौथा तल है।
  5. हवा मंदिर- यह सबसे ऊपर वाली पांचवी मंजिल है, इसे हवा मंदिर कहते हैं।

हवा महल संग्रहालय

इस हवा महल के अंदर सन 1983 में एक म्यूजियम का निर्माण करवाया गया, जिसका नाम हवा महल म्यूजियम संग्रहालय रखा गया। इसके अंदर पुरातात्विक वस्तुएं संग्रहित की गई हैं।

हवा महल घूमने का समय

वैसे तो आप साल भर कभी भी यहां जा सकते हैं। परंतु अक्टूबर-नवंबर में यहां अधिक पर्यटक आते हैं। क्योंकि उस समय मौसम सुहावना होता है। अधिक गर्मी या सर्दी नहीं होती, इसे देखने का समय सुबह 9:30 से शाम 4:30 तक रहता है। यह शुक्रवार के दिन पर्यटकों के लिए बंद रहता है। इसमें जाने के लिए सामने से कोई रास्ता नहीं है  इसमें प्रवेश के लिए सिटी पैलेस की तरफ से एक शाही दरवाजा है। जो इसका प्रमुख प्रवेश द्वार है। इस स्थान पर घूमने जाएं तो साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें।

हवामहल अपनी सुंदरता व आकर्षण के कारण जयपुर शहर के बीचो बीच चार चांद लगा रहा है।  इसमें  राजस्थानी में मुगल शैली की मिली जुली झलक मिलती है। जयपुर का हवा महल अपनी भव्यता की वजह से पर्यटकों को अपनी तरफ खींच लेता है। मैं आशा करता हूं कि, हवा महल का इतिहास व हवा महल की वास्तुकला के बारे में जानकर आप यहां जरूर घूमने के लिए आएंगे।

धन्यवाद

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top
Send this to a friend