रोग प्रतिरोधक क्षमता क्या है व बढ़ाने के उपाय

रोग प्रतिरोधक क्षमता क्या होती है?

शरीर को रोग ग्रस्त करने वाले कारकों के खिलाफ लड़ने की शारीरिक क्षमता को रोग प्रतिरोधक क्षमता कहते हैं। यह हमारे शरीर में इंफेक्शन फैलाने वाले माइक्रो ऑर्गेज्म को नष्ट कर देती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता दो प्रकार की होती है।

  1. प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता एक जन्मजात रोग प्रतिरोधक क्षमता है। यह क्षमता किसी व्यक्ति के अंदर जन्म से ही होती है, और यह बीमार करने वाले बाह्य कारकों से लड़ने में मदद करती है।
  2. कृत्रिम रोग प्रतिरोधक क्षमता यह रोग प्रतिरोधक क्षमता हमें बाह्य कारकों द्वारा दी जाती है। जिसमें टीकाकरण, जीवन रक्षक दवाएं आदि शामिल हैं। उदाहरण के लिए हेपेटाइटिस बी का टीका, पोलियो की दवा आदि कृत्रिम रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास करते हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता Immunity system के कार्य

रोग प्रतिरोधक क्षमता का मुख्य कार्य हमारे शरीर को बाह्य व आंतरिक रूप से पूर्णत: स्वस्थ रखना है।  यह हमें रोगाणु जैसे वायरस, बैक्टीरिया आदि जो  हमारे शरीर में रोग पैदा करते हैं। उससे शरीर की रक्षा करता है। यह एक तरह से शरीर की सुरक्षा प्रणाली है। इम्यून सिस्टम का कार्य शरीर की हर एक कोशिका को रोगाणुओं  के प्रभाव से मुक्त करके शरीर को स्वस्थ रखना है।

कुछ बाह्य व आंतरिक कारक जैसे वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, दूषित भोजन, अवसाद, चिंता, तनाव आदि से हमारे शरीर में रोग उत्पन्न करने वाले कारकों को उभारते हैं। हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इन कारकों से लड़ती है, तथा शरीर को स्वस्थ रखती है। लेकिन जब इन कारकों का प्रभाव अधिक होने लगता है, तो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है, तथा शरीर रोग ग्रस्त हो जाता है।

मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता क्यों आवश्यक है?

स्वस्थ व लंबा जीवन जीने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता का मजबूत होना बहुत आवश्यक है। इसके लिए हमें प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखना होगा, कुछ लोग दूषित, तला हुआ, ज्यादा मसालेदार भोजन खाते हैं, या अधिक तनाव में रहते हैं, प्रदूषण का सामना करते हैं आदि तो उनके शरीर में प्रतिरोधक क्षमता पर ज्यादा भार पड़ता है। जिससे वह धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाती है। तथा व्यक्ति की जीवन रेखा छोटी होती चली जाती है। मान लीजिए हमने सामान ढोने के लिए एक नई गाड़ी ली है। अगर हम उस में उसकी क्षमता से ज्यादा सामान ढोना शुरू कर दें, तो उस गाड़ी का इंजन जल्दी खराब हो जाएगा, और जिस गाड़ी को 20 साल चलना था, वह समय से पहले ही खटारा हो जाएगी। यही स्थिति हमारे शरीर के इम्यूनिटी सिस्टम के साथ है।

अगर हम गलत गलत खाते पीते रहे और कहते रहे हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है, हमें कुछ नहीं होगा तो यह हमारी सबसे बड़ी भूल है। ऐसा करके हम अपने साथ ज्यादती कर रहे हैं। जिसका खामियाजा हमें निकट भविष्य में भुगतना पड़ेगा। इसके बजाय अगर हम स्वस्थ भोजन करें, तनावमुक्त रहें, व्यायाम करें तो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता सदा जवान रहेगी, और हमें रोगों से बचा कर रखेगी, और कोई बाहरी बैक्टीरिया या वायरस शरीर पर हमला करेगा तो, उसको समाप्त करके हमारे शरीर को बचा लेगी। अगर हम अपनी बुरी आदतों की वजह से प्रतिरोधक क्षमता पर दबाव बनाए रखेंगे तो वह बाहरी रोग का हमला होने पर हमारे शरीर की रक्षा नहीं कर पाएगी, इसलिए हमें अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखना बहुत आवश्यक है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले फल व आहार

कुछ भोजन हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक हैं, वे इस प्रकार हैं

  1. खट्टे फल- यह बात सत्य है कि, खट्टे फल हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। विटामिन सी हमारे शरीर में श्वेत रुधिर कोशिकाओं को बढ़ाता है, जो कि सीधा हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है। विटामिन सी अधिकतर खट्टे फलों में पाया जाता है। जैसे संतरा नींबू आदि इसके अलावा लाल शिमला मिर्च में भी विटामिन सी का स्रोत है, इसमें खट्टे फलों से 3 गुना अधिक विटामिन सी पाया जाता है। अगर कोई व्यक्ति विटामिन सी के लिए दवाइयों का सहारा लेता है, तो उसे इन्हें अधिक मात्रा में नहीं लेना चाहिए। एक व्यस्क पुरुष को प्रतिदिन 90 मिलीग्राम व महिला को प्रतिदिन 75 मिलीग्राम विटामिन सी की आवश्यकता होती है।
  2. लहसुन- लहसुन को पश्चिमी देशों में दवाओं का राजा माना जाता है यह पोषक तत्वों का समूह है। इसका उपयोग लगभग सभी प्रकार के भोजन में किया जाता है। या फिर इसे कच्चा भी खाया जाता है।  इसमें कई प्रकार के पोषक तत्व होते हैं। जो हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को एकदम से बढ़ाते हैं, ऐसा कहा जाता है कि जो लहसुन का नित्य उपयोग करता है, उसे सर्दी जुकाम की समस्या कभी नहीं होती है। इसके अलावा यह निम्न रक्तचाप रोग में भी लाभदायक है। इसमें  संक्रामक रोगों से लड़ने की क्षमता है।
  3. अदरक-अदरक का उपयोग भोजन को स्वादिष्ट बनाने में किया जाता है। इसके अनेकों फायदे हैं। यह गले की समस्या, जुखाम, संक्रामक रोग, पेट के रोग आदि से बचाता है। अदरक के उपयोग से थकान और कमजोरी समाप्त हो जाती है। अदरक का उपयोग मधुमेह रोग में भी लाभदायक है।
  4. दही- उपयोग करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। दही खाना बहुत ही अधिक लाभदायक है। आप इसे शहद के साथ या सादा भी खा सकते हैं। यह विटामिन डी का स्त्रोत् है। जो कि रोगों के खिलाफ लड़ने के लिए शरीर को ताकत देता है। दही पेट के लिए भी बहुत लाभदायक है।  यहां तक भी कहा गया है कि, जो व्यक्ति दही खाता है, वह कभी मर नहीं हो सकता।
  5. हल्दी- यह बात पूरी तरह से साबित हो चुकी है कि, हल्दी हमारे शरीर और स्वास्थ्य के लिए बहुत अधिक लाभदायक है। इसका उपयोग भारत में हजारों सालों से मसालों के रूप में किया जाता है। यह हृदय रोग, मस्तिष्क रोग, कैंसर एलर्जी जोड़ों का दर्द आदि बहुत से रोगों में लाभदायक है। इसका प्रतिदिन उपयोग करने से शरीर रोगों से पूरी तरह मुक्त रहता है।  यह हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।
  6. कीवी kiwi- कीवी में कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं, जैसे विटामिन सी, विटामिन के, पोटेशियम जो कि हमारे शरीर में श्वेत रुधिर कोशिकाओं के बढ़ने में मदद करते हैं। तथा हमारे शरीर को रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करते हैं।
  7. पपीता- पपीता भी विटामिन सी, पोटैशियम, मैग्निशियम आदि का अच्छा स्त्रोत्र है। इससे हमारे शरीर की पाचन शक्ति अच्छी होती है। तथा हमारा शरीर सदा स्वस्थ रहता है।
  8. अंकुरित अनाज Sprouts- अंकुरित अनाज कई प्रकार के पोषक तत्वों का भंडार है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, या जो शारीरिक रूप से कमजोर दुबले पतले होते हैं। उन्हें अंकुरित अनाज खाने की सलाह दी जाती है। साथ ही साथ यह हृदय रोग, मधुमेह में भी सहायक है। इसके लिए चने, दालें, सोयाबीन आदि अनाजों को 6 से 8 घंटे तक पानी में भिगोया जाता है। इसके बाद उन्हें अच्छे से धो कर किसी सूती कपड़े में बांध कर रख दिया जाता है। एक-दो दिन में इनमें से एक शाखा निकल आती है, और तब इनका सेवन करना चाहिए। यह पचने में थोड़ा मुश्किल होते हैं, इसलिए इनका सेवन कम मात्रा में करना चाहिए। अधिक अंकुरित अनाज खाने से उल्टी होना या जी मिचलाना आदि लक्षण हो सकते हैं। तथा इन्हें अच्छी तरह धोकर ही खाना चाहिए।
  9. तुलसी- तुलसी गुणों का भंडार है। इसलिए इसे भारत में देवताओं का दर्जा दिया जाता है, तथा भारत में इसकी पूजा की जाती है। हर घर में तुलसी का पौधा उगाना बहुत आवश्यक है। क्योंकि यह वायरस और बैक्टीरिया को हवा में ही नष्ट करने की क्षमता रखता है। इसके पत्तों के सेवन से या इसके पत्तों का काढ़ा पीने से हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसके पत्तों को कूटकर या पीसकर कम मात्रा में खान चाहिए। सिर्फ एक या दो पत्ते खाने चाहिए, इसे दांतो से चबाना नहीं चाहिए।

वैश्विक टीकाकरण

टीकाकरण एक विधि है, जिससे किसी विशेष संक्रामक रोग के खिलाफ शरीर में प्रतिरोधक क्षमता पैदा की जाती है। तथा शरीर उस रोग से जीवन भर ग्रसित नहीं होता। जिससे वह रोग दुनिया से समूल नष्ट हो सके। इस प्रकार की दवाओं के कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं।

  1. हेपेटाइटिस बी- यह एक यकृत रोग है।
  2. HPV यह गर्भाशय ग्रीवा कैंसर रोग है।
  3. खसरा Measles यह एक प्रकार का बुखार है।
  4. मैनिजाइटिस ए Meningitis A यह एक मस्तिष्क रोग है।
  5. कंठमाला Mumps इससे कान की ग्रंथियों में दर्द होता है।
  6. पोलियो यह संक्रामक वायरल रोग है, जो एक परिवर्तनशील पक्षाघात का कारण बन जाता है।
  7. रोटावायरस बच्चों में दस्त का रोग है।
  8. टेटनस यह जीवाणु जनित रोग है। जिससे घाव पर विष बन जाता है। और यह मृत्यु कारक हो सकता है। आदि कई रोग हैं, जिनके लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करने के लिए टीकाकरण का उपयोग वैश्विक स्तर पर किया जा रहा है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता क्या है व बढ़ाने के उपाय

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के उपाय

नियमित योगासन करना, प्राणायाम करना, ध्यान करना,  संयम पूर्ण जीवन जीना आदि ऐसी चीजें हैं, जिनकी सहायता से आप पूरा जीवन बिना डॉक्टर के दर्शन किए जी सकते हैं। यह हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को खराब करने वाले कारकों के प्रभाव को समाप्त कर देते हैं, तथा हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बराबर बनाए रखते हैं। इसलिए हमें प्रतिदिन योग, ध्यान, व्यायाम आदि करना चाहिए।

अतः हम कह सकते हैं, कि अगर हम अपने जीवन में कुछ छोटे-छोटे बदलाव करके एक स्वस्थ व लंबा जीवन जी सकते हैं। जैसे कि नित्य योग व ध्यान करना, दूषित भोजन न करना, सिगरेट शराब तंबाकू आदि का सेवन न करना आदि, हमारे जीवन से रोगों को पूरी तरह समाप्त कर सकते हैं। तथा हम एक स्वस्थ व सुखी जीवन जी सकते हैं।

धन्यवाद

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