नीले आकाश के लिए साफ हवा अंतर्राष्ट्रीय दिवस 7 सितंबर

नीले आकाश के लिए साफ हवा अंतर्राष्ट्रीय दिवस International Day of Clean Air for Blue Skies 7 September

वायु प्रदूषण आज के समय में पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा खतरा है, तथा वैश्विक स्तर पर वायु प्रदूषण से होने वाले  रोग मृत्यु कारक हैं। विकासशील देश वायु प्रदूषण के लिए अधिक जिम्मेदार हैं,  तथा कम आय वाले देशों में महिलाएं बच्चे व बुजुर्ग इससे अधिक प्रभावित होते हैं। एक अनुमान के अनुसार 2016 में 6.5  मिलियन लोगों की वायु प्रदूषण के कारण अकाल मृत्यु हुई थी, तथा 2050 तक 50% अकाल मृत्यु का कारण वायु प्रदूषण होने का अनुमान लगाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि, हम अरबों डॉलर  खर्च करके भी प्रकृति और इसकी जैव विविधता को वापस नहीं पा सकते हैं। इसीलिए वायु प्रदूषण को विभिन्न स्तरों पर रोकने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।

इंटरनेशनल डे ऑफ क्लीनऐयर फॉर ब्लू स्काई कब मनाया जाता है?

यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली द्वारा 19 दिसंबर, 2019 को 74 वीं बैठक के दौरान हर वर्ष 7 सितंबर को इंटरनेशनल डे ऑफ क्लीन एयर फॉर ब्लू स्काई मनाने की घोषणा की गई। इस दिन को मनाने का निर्णय रेजोल्यूशन A/ RES/74/2012 के अंतर्गत  लिया गया। इसी अवसर पर यूनाइटेड नेशन एनवायरमेंटल प्रोग्राम UNEP  का भी आवाहन किया गया।  इस दिन को मनाए जाने का निर्णय सभी स्तरों पर पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय साबित होगा। मानव विकास के साथ-साथ आ रही पर्यावरण संबंधी चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुट होकर काम करने की प्रेरणा मिलेगी।

नीले आकाश के लिए साफ हवा अंतरराष्ट्रीय दिवस का थीम Theme for International Day of Clean air for Blue Sky.

नीले आसमान के लिए  साफ वायु का पहला अंतरराष्ट्रीय दिवस 7 सितंबर, 2020 को मनाया जाएगा। इस दिन के लिए  थीम सबके लिए साफ हवा “Clean Air For All” रखा गया है।

वायु प्रदूषण क्या है?

आयु में अवांछनीय पदार्थों का मिल जाना प्रदूषण कहलाता है। वायु ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड आदि गैसों से मिलकर बनी है। जो कि एक निश्चित अनुपात में वायुमंडल में विद्यमान है तथा  इनके अनुपात में असंतुलन आने से वायु प्रदूषण होता है। हमारे वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर क्लोरोफ्लोरोकार्बन का स्तर बढ़ रहा है। जिससे प्राणवायु विषैली होती जा रही है।

वायु प्रदूषण कैसे होता है?

वायु प्रदूषण के  लिए प्राकृतिक व मानव जनित कई कारण जिम्मेदार होते हैं। प्राकृतिक कारणों में ज्वालामुखी, वायु में धूल व मिट्टी के कण, वनों में आग लग जाना आदि कुछ प्रमुख कारण है। इसके विपरीत मानव जनित का कारणों में मुख्यतः बिजली का उत्पादन करना, यातायात के साधनों का अधिक प्रयोग करना, उद्योग धंधे, घरेलू इंधन,  कृषि के लिए प्रयोग में लाए जा रहे रासायनिक उर्वरक, निर्माण कार्य,  कूड़ा करकट को जलाना, वनों को काटना, जनसंख्या का बढ़ना आदि  वायु प्रदूषण के फैलने के मुख्य कारण है।

वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव

वायु प्रदूषण के द्वारा स्वास्थ्य पर कई दुष्प्रभाव पड़ते हैं। जेेसे सल्फर डाइऑक्साइड के कारण सांस संबंधी समस्याएं पैदा हो जाती हैं, कार्बन मोनोऑक्साइड से कैंसर, थकावट, व मानसिक विकार पैदा हो जाते हैं,  नाइट्रोजन ऑक्साइड से इनफ्लुएंजा बचाव में  कमी आ जाती  है, ट्रॉय ऑक्सीजन से आंखों, त्वचा के रोग खांसी आदि हो जाते हैं। इनके अतिरिक्त कैडमियम से स्वशन रोग, फ्लोराइड से हड्डियों तथा दातों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

WHO के एक अनुमान के अनुसार प्रतिवर्ष 7 मिलियन लोगों की अकाल मृत्यु वायु प्रदूषण के कारण होती है। वायु प्रदूषण से भोजन, फसलों, वनों में जैव विविधता पर भी बुरा असर पड़ता है। ओज़ोन, सल्फर और नाइट्रोजन गैस आदि की इसमें मुख्य भूमिका होती है।

वायु प्रदूषण की वजह से अम्लीय वर्षा होती है सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड पानी के साथ अभिक्रिया करके सल्फ़्यूरिक एसिड ओर नाइट्रिक एसिड बनाते हैं, जिससे अम्लीय वर्षा होती है। अम्लीय वर्षा पेड़ पौधों व भूमि को नुकसान पहुँचाती है। इससे पेड़ पौधों की उत्पादकता में कमी आ जाती है।

वायु प्रदूषण के कारण लंबी दूरी तक देखने में बाधा आती है। जब से प्रदूषण बढा है, तब से आसमान में तारे भी ठीक से दिखाई नहीं पड़ते हैं। उत्तर भारत में इसका एहसास तब हुआ जब, COVID-19 के कारण लोकडाउन लगाया गया, तथा इससे वायु प्रदूषण कम हुआ, तथा नंगी आंखों से हिमालय की चोटियां दूर तक दिखाई देने लगी।

वायु प्रदूषण रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठा सकती है?

जनता को साफ हवा उपलब्ध करवाना एक सरकार की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी होती है। इसके लिए सरकार को विभिन्न कदम उठाने चाहिए सरकार को लगातार वायु प्रदूषण के स्तर पर नजर रखनी चाहिए, तथा  सरकार को आवश्यक नियम, नीतियाँ तथा परिवर्तन तंत्र को बढ़ावा देना चाहिए। सरकार को यह पता होना चाहिए कि वायु प्रदूषण कहां से आ रहा है, तथा इसके लिए उच्च प्रभाव वाले नियम बनाने चाहिए।

वायु प्रदूषण के लिए उद्योग धंधों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। क्योंकि उद्योग धंधे प्रदूषण का स्त्रोत है, तथा जो लोग इस कार्य में लगे हुए हैं। उन्हें निजी क्षेत्र में प्रदूषण को कम करने के लिए विशेष कदम उठाने चाहिए। जिससे उद्योगों द्वारा हो रहे प्रदूषण की भरपाई की जा सके।

सरकार को यातायात द्वारा हो रहे प्रदूषण को भी रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए। लोगों को निजी साधनों के उपयोग के बजाय सार्वजनिक साधनों का जरूरत पड़ने पर उपयोग करना चाहिए। सरकार को भी ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि, लोगों को उनके घर के आसपास रोज़गार मिल सके, ताकि उन्हें यातायात के साधनों का उपयोग कम से कम करना पड़े। लोगों को भी अपने आसपास प्रदूषण को कम करने के लिए उपाय करते रहना चाहिए।  कुछ उपाय इस प्रकार हैं।

  • यातायात के निजी साधनों के बजाय सार्वजनिक साधनों का उपयोग करना चाहिए।
  • डीजल से चलने वाली गाड़ियों के बजाय हाइब्रिड या इलेक्ट्रॉनिक वाहन खरीदने चाहिए।
  • खाना पकाने के लिए धुआँ रहित स्वच्छ इंधनओं का प्रयोग करना चाहिए।
  • अक्षय ऊर्जा स्रोतों का अधिक उपयोग करना चाहिए।
  • घरेलू व कृषि अपशिष्ट पदार्थों को जलाना नहीं चाहिए।
  • ऊर्जा की खपत कम से कम करनी चाहिए।
  • केरोसिन, लकड़ी, कोयला आदि का प्रयोग इंधन के रूप में नहीं करना चाहिए।
  • घर के आसपास वातावरण को स्वच्छ बनाने के लिए अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाने चाहिए।

वनों का महत्व

जैव विविधता से संपन्न वन कार्बन डाइऑक्साइड के प्रमुख आवश्यक होते हैं। तथा यही गैस वायु प्रदूषण के लिए सबसे अधिक उत्तरदाई है, इसीलिए वनों की कटाई पर रोक लगानी चाहिए, व अधिक से अधिक पेड़ लगाने पर बल  देना चाहिए। जिससे कि वायु प्रदूषण कम हो सके तथा साफ हवा हमारे फेफड़ों तक पहुंच सके। वन जैव विविधता को बनाए रखने में व ग्लोबल वार्मिंग को भी कम करने में सहायता करते हैं।

पर्यावरण के प्रति लोगों की उदासीनता सबसे बड़ी समस्या है। मनुष्य खाने व पानी के बिना तो 2 से 3 सप्ताह तक जीवित रह सकता है। परंतु हवा के बिना 2 से 3 मिनट भी जीवित नहीं रह सकता। हम रोज के खाने पीने का तो बहुत ध्यान रखते हैं, परंतु हम यह भूल जाते हैं कि, हम हवा कैसी ग्रहण कर रहे हैं। प्रदूषण आज के समय में एक छिपा हुआ हत्यारा है। 2030 के सतत विकास एजेंडा के चौथे और 15वें लक्ष्य को  प्राप्त करने के लिए वायु प्रदूषण का उन्मूलन अति आवश्यक है। इसके लिए वायु की गुणवत्ता में सुधार के लिए नई नई नीतियों को बढ़ावा व समर्थन देना चाहिए, तथा वायु प्रदूषण रोकने के लिए नवाचरों को आमंत्रित करना चाहिए।

धन्यवाद

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