जयपुर गुलाबी नगरी

भारत  के सबसे प्राचीन पर्वत अरावली पर्वत की गोद मे बसा प्राचीन नगर जयपुर अपनी भव्यता, गौरवशाली इतिहास और दर्शनीय स्थल की दृष्टि से  संपन्न महानगर है। जयपुर राजस्थान का एक ऐसा जिला है, जो सुंदरता की दृष्टि से पेरिस के समान है। आकर्षण की दृष्टि से हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट के समान है। और भव्यता की दृष्टि से मॉस्को नगर के समान है। 30 मार्च, 1949 को पी सत्यनारायण समिति की सिफारिश पर पेयजल की सुविधा के आधार पर जयपुर को राजस्थान की राजधानी बनाया गया था।

जयपुर का इतिहास

इस नगर को खोजने वाले  महाराज सवाई जयसिंह थे। उन्होंने  18 नवंबर, सन 1727 में जयपुर नगर को बसाया। इससे पहले महाराजा सवाई जय सिंह की राजधानी आमेर थी। परंतु बढ़ती जनसंख्या व पानी की कमी के कारण उन्होंने जयपुर को अपनी राजधानी बना लिया। इस नगर को बसने से पहले सवाई जय सिंह ने 1725 में इस नगर के बीचों बीच एक महल बनवाया जिसका नाम है जय  निवास महल। उन्होंने इस नगर का नाम जय नगर “City of victory” रखा। जयपुर शहर भारत का एकमात्र ऐसा शहर है, जो क्रमबद और व्यवस्थित तरीके से बसाया गया है। जयपुर के पहले राजा जय सिंह को  औरंगज़ेब ने सवाई की उपाधि दी थी।

जयपुर की वास्तुकला

वास्तुकला व स्थापत्य कला की दृष्टि से जयपुर में 3 शासकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सवाई जय सिंह ने इस नगर को बसाया। उन्होंने इस नगर को भारतीय वास्तु शास्त्र के अनुसार बसाया। जयपुर नगर के  वास्तुकार एक बंगाली ब्राह्मण विद्याधर भट्टाचार्य थे। वे सवाई जय सिंह के प्रसिद्ध शिल्पी रहे। उन्होंने यह नगर 9 चोकुड़ियों के बीच बसाया। यह नगर मुख्य 18 सड़कों को आधार मानकर बसाया गया है। यह नगर 90 कोण पर बसा है। इसकी सारी सड़कें एक दूसरे को 90 कोण पर काटती हैं। उनके बाद सवाई प्रताप सिंह के काल में इस नगर में चित्रकला का आगमन हुआ। तथा सवाई मानसिंह द्वितीय ने इस शहर को सुंदरता का स्वरूप दिया।

जयपुर नगर के 7 दरवाज़े

जयपुर नगर कुल 7 दरवाजों से सुसजित है। जिनके नाम इस प्रकार हैं – चांदपोल दरवाज़ा,  सूरज पोल दरवाज़ा, ध्रुव दरवाज़ा, घाट दरवाज़ा, न्यू दरवाज़ा, सांगानेरी दरवाज़ा, तथा अजमेरी दरवाज़ा इस नगर के प्रमुख 7 दरवाजे हैं।

जयपुर नगर के उपनाम

  1. गुलाबी नगरी Pink City- सवाई राजसिंह द्वितीय के शासनकाल में 1876 में, एक ब्रिटिश युवराज प्रिंस वेल्स ऑफ अल्बर्ट जयपुर की यात्रा पर आए थे। और इसलिए सवाई राम सिंह ने इस नगर को गुलाबी रंग से रंगवाया। तभी से इस नगर का नाम गुलाबी नगरी पड़ गया।
  2. राजस्थान की दूसरी काशी- जयपुर शहर में मंदिरों की अधिकता के कारण इसे राजस्थान की दूसरी काशी भी कहा जाता है।
  3. भारत का पेरिस- जयपुर नगर को सुंदरता की दृष्टि से भारत का पेरिस कहा जाता है।
  4. भारत का दूसरा वृंदावन- धार्मिक दृष्टिकोण से जयपुर बहुत संपन्न है, इसलिए इसे भारत का दूसरा वृंदावन कहा जाता है।
  5. वैद्य शालाओं का नगर- इस नगर में एक  वैधशाला है। इसलिए इसे वैध शालाओं का नगर कहते हैं।

जयपुर के बारे में कुछ प्रमुख तथ्य

  • जयपुर में मॉम युद्ध संग्रहालय Wax War Museum है।
  • जयपुर में एशिया की सबसे बड़ी सब्जी मंडी है।
  • राजस्थान में सबसे अधिक लाख का काम और जरी का काम जयपुर में होता है।
  • जनसंख्या की दृष्टि से जयपुर देश का दसवाँ सबसे बड़ा शहर है।
  • जयपुर के तीरथ स्थल गलता जी को जयपुर की काशी कहा जाता है।
  • जयपुर में भारतीय उत्तर पश्चिम रेलवे का मुख्यालय है।
  • गुड़िया का संग्रहालय Doll Museum  जयपुर में स्थित है। यहां पर अलग-अलग देश की वेषभूषाओं से सुसज्जित गुड़िया रखी हुई हैं। इसकी स्थापना 7 अप्रैल, 1979 में की गई थी।
  • भारत के भोतीक शास्त्री डॉक्टर सी वी रमन ने जयपुर नगर को वैभव  के नगर Island of glory की संज्ञा दी थी।
  • जयपुर नगर में हेडे की परिक्रमा की जाती है। इसे 6 कोसी परिक्रमा भी कहते हैं। यह परिक्रमा पुराने घाट से आरंभ होकर गोपाल जी मंदिर तक पहुँचती है।
  • राजस्थान का सबसे बड़ा कैंसर हस्पताल भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल जयपुर में है।
  • राजस्थान का ज्योति विद्यापीठ महिला विश्वविद्यालय राजस्थान में महिलाओं का प्रथम विश्वविद्यालय है

जयपुर के कुछ परमुख भोजन

किसी भी नगर के बारे में चर्चा की जाए और वहां के व्यंजनों  का जिक्र न किया जाए तो वह चर्चा अधूरी ही रहती है।  जयपुर का सबसे प्रमुख व्यंजन दाल बाटी चूरमा है। तथा इसके अलावा मेसी रोटी, गट्टे की सब्जी, लहसुन की चटनी, मक्के की घाट, बाजरे की घाट, बाजरे की रोटी, घेवर, फेनी, मावा, कचोरी, गजक, मूंग थाल आदि प्रमुख व्यंजन है।

जयपुर के प्रमुख मंदिर

जयपुर में बहुत से भव्य मंदिर हैं। इसी कारण इसे राजस्थान की दूसरी काशी कहा जाता है। इन मंदिरों का वर्णन इस प्रकार है।

  1. गढ़ गणेश मंदिर- ऐसा माना जाता है, कि यहां पर गणेश भगवान बालक के रूप में विराजमान है। इस मंदिर का निर्माण महाराजा सवाई मानसिंह प्रथम ने करवाया था। हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी गणेश चतुर्थी के दिन यहां मेला भरता है।
  2. गलता जी मंदिर- इसे गालव ऋषि की तपोभूमि माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से गलता जी जयपुर का पुष्कर कहलाता है। यहां बंदरों की अधिकता है। इसलिए इसे monkey valley भी कहा जाता है। यहां पर हर वर्ष मार्ग शीर्ष कृष्ण प्रतिपदा को मेला लगता है।
  3. दिगंबर जैन मंदिर Sanghiji- यह मंदिर लाल पत्थरों से बना वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है।
  4. अक्षरधाम मंदिर- यह  मंदिर भगवान नारायण का मंदिर है। यह पूर्णता सुंदर प्रकृति से घिरा हुआ है। यह मंदिर अद्भुत वास्तुकला का  उदाहरण है।
  5. बिरला मंदिर लक्ष्मी नारायण मंदिर- इसका निर्माण 1988 में बी एम बिरला फ़ाउंडेशन द्वारा सफेद मार्बल द्वारा  करवाया गया। इसकी सुंदरता अद्भुत है।
  6. देवयानी मंदिर- यह मंदिर सांभर जयपुर में स्थित है। यह एक पौराणिक तीर्थ स्थल है। इसे तीर्थों की नानी कहा जाता है।
  7. शीला देवी का मंदिर- इसे अन्नपूर्णा देवी मंदिर भी कहा जाता है। यह जयपुर आमेर मे स्थित है। जिस वंश ने शासन किया उसका नाम कछवाहा वंश है। और शीला देवी उस वंश की आराध्य देवी है। इसका निर्माण अकबर के सेनापति मिर्जा राजा मानसिंह ने करवाया था। तथा इसका पुनर्निर्माण सवाई मानसिंह द्वितीय ने करवाया यहां वर्ष में दो बार  चैत्र नवरात्रि और आश्विन नवरात्रि में मेला लगता है।
  8. जमुवाय माता मंदिर- इसे बुडवाय माता भी कहते हैं। यह मंदिर जयपुर में है। यह कछवाहा वंश की कुलदेवी का मंदिर है।  इसमें वर्ष में दो बार  चैत्र नवरात्रि और आश्विन नवरात्रि में मेले लगते हैं।
  9. शीतला माता मंदिर- इसे चेचक वाली देवी, महामाई माता, माता मावड़ी, सेदंल माता, बच्चों की  रक्षिणी देवी आदि नामों से जाना जाता है। इस देवी का वाहन गधा है। तथा इसका पुजारी कुम्हार होता है। इस देवी की मूर्ति खंडित है। इसलिए इसे खंडित प्रतिमा वाली देवी भी कहते हैं। इस मंदिर का निर्माण सवाई माधव सिंह प्रथम ने करवाया था। इसका मेला चैत्र कृष्ण अष्टमी या शीतला अष्टमी को लगता है। इस दिन खेजड़ी की पूजा की जाती है। इस दिन बासी भोजन किया जाता है। जिसे  बाशोड़ा कहा जाता है।
  10. गोविंद देव जी मंदिर- इसे राधा गोविंद जी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह कछवाहा वंश के आराध्य देव हैं। इसका निर्माण महाराज सवाई जय सिंह ने 1735 ईस्वी में करवाया। यह बिना खंबों वाला एशिया का सबसे बड़ा मंदिर है।  यह मंदिर गौड़ीय संप्रदाय की प्रमुख पीठ वाला मंदिर है।
  11. नरसिंह मंदिर– यह मंदिर आमेर जयपुर में स्थित है। इसका निर्माण कृष्ण दास प्रियहरि ने पृथ्वी राज कच्छवाह के काल में करवाया था।
  12. नकटी माता मंदिर- यह मंदिर जय भवानीपुरा जयपुर में स्थित है। यह प्रतिहार कालीन महामारु शैली में निर्मित मंदिर है।
  13. जगत शिरोमणि मंदिर- यह कृष्ण मंदिर है। इसका निर्माण महाराजा मानसिंह प्रथम की पत्नी कनकावती ने करवाया माना जाता है। यहां पर मीराबाई जिस कृषण की मूर्ति की पूजा करती थी वह मूर्ति स्थापित की हुई है।
  14. तारकेश्वर महादेव मंदिर- माना जाता है कि इस मंदिर में  भगवान शिव का शिव लिंग स्वयं प्रकट हुआ था।
  15. अंबिकेश्वर मंदिर– यह बहुत ही प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर आमेर में स्थित है, यहां पर जो शिव लिंग है, वह भूमि से प्रकट हुआ माना जाता है।
  16. पातालेश्वर मंदिर- यह मंदिर भूमि में 20 से 22 फीट गहराई में है। इसके बनाने वाले का नाम ज्ञात नहीं है, इसे 1977 में खोजा गया था।
  17. छींक माता मंदिर- छींक माता मंदिर भी जयपुर में स्थित है।
  18. ज्वाला माता मंदिर- यह मंदिर जोबनेर जयपुर में स्थित है। यह खंगारोत वंश की कुल देवी का मंदिर है।

जयपुर के प्रमुख दर्शनीय स्थल Jaipur Tourism

  • आमेर का किला Amber Palace
  • जंतर मंतर Jantar Mantar
  • अल्बर्ट हॉल म्यूजियम Albert Hall Museum (Central Museum)
  • नाहरगढ़ का किला Nahargarh Fort
  • अनोखी म्यूजियम Anokhi Museum
  • नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क Nahargarh Biological Park
  • जयपुर वैक्स म्यूजियम Jaipur Wax Museum
  • राज मंदिर Raj Mandir
  • सांभर झील Sambhar Lake
  • माधवेंद्र महल नाहरगढ़ Madhvendra Palace Nahargarh
  • झालाना सफारी पार्क Jhalana Safari Park
  • जल महल Jal Mahal
  • हवा महल Hawa Mahal

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