अंतराष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस 30 अगस्त

लघु उद्योग दिवस Small Industry Day 30 August

लघु उद्योगों का भारतीय अर्थव्यवस्था में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। भारत में प्राचीन काल से ही लघु उद्योगों के द्वारा उच्च गुणवत्ता वाली वस्तुओं का उत्पादन होता रहा है। लघु उद्योगों के द्वारा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा किए जाते हैं। तथा उत्पादों के विकास व उनके निर्यात को बढ़ावा दिया जाता है, जोकि भारतीय अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख अंग है।

इन उद्योगों की सहायता से देश की प्राचीन संस्कृति व परंपरा को जीवित रखा जा सकता है, तथा देश की अर्थव्यवस्था में भी योगदान दिया जा सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस कब मनाया जाता है?

देश में लघु उद्योगों को बढ़ावा देने और बेरोजगारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, प्रत्येक वर्ष 30 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस मनाया जाता है। भारत एक विकासशील देश है, तथा लघु उद्योग देश के विकास में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

लघु उद्योग दिवस की घोषणा कब की गई?

30 अगस्त, 2020 को SSI क्षेत्र के विकास के लिए एक पैकेज की घोषणा की गई थी। जिसमें छोटे छोटे उद्योगों के उत्थान के लिए उपाय सुझाए गए। इसी अवसर पर लघु उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रत्येक वर्ष 30 अगस्त को लघु उद्योग दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गई।

लघु उद्योग दिवस कैसे मनाया जाता है?

इस दिन कुछ चुने गए लघु उद्योगों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया जाता है। इसके साथ-साथ उद्योगों से संबंधित चर्चाओं का आयोजन किया जाता है। हर वर्ष उद्योग दिवस के लिए एक थीम रखा जाता है। नवाचार उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाती है, तथा देश भर में भाषण व चर्चाओं का भी आयोजन किया जाता है।

लघु उद्योग की परिभाषा

लघु उद्योग छोटे पैमाने पर चलाए जाने वाले उद्योग हैं, जो श्रमिकों की सहायता से मुख्य व्यवसाय के रूप में चलाए जाते हैं। इस प्रकार के उद्योगों में 10 से लेकर 50 तक श्रमिक कार्य करते हैं। ऐसे उद्योगों में निवेश 10 करोड़ से कम तथा सालाना टर्नओवर 50 करोड़ से कम होना चाहिए। ऐसे उद्योगों के लिए कच्चा माल तथा तकनीकी कुशलता के लिए बाह्य साधनों को उपयोग में लाया जा सकता है।

सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग Micro, Small and Medium Enterprises (MSME)
सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योगों को उनके सालाना कारोबार के हिसाब से बांटा गया है।
सूक्ष्म उद्योग – वह उद्योग, जिनमें विनिर्माण व सेवा क्षेत्र में सालाना निवेश एक करोड़ से कम व टर्नओवर 5 करोड़ से कम हो।
लघु उद्योग – वह उद्योग, जिनमें विनिर्माण व सेवा क्षेत्र में निवेश 10 करोड़ से कम तथा टर्नओवर 50 करोड़ से कम हो।
मध्यम उद्योग – वह उद्योग, जिनमें विनिर्माण व सेवा क्षेत्र में निवेश 20 करोड से कम तथा टर्नओवर 100 करोड़ से कम हो।

लघु उद्योगों का प्रभाव

  • इन उद्योगों के द्वारा देश में लगभग 12 करोड लोगों को रोजगार मिला है।
  • लघु उद्योगों ने भारत के कुल निर्यात मे 45% योगदान दिया है।
  • देश में लगभग 3 करोड़ 60 लाख लघु उद्योग हैं।
  • उद्योगों ने निर्माण क्षेत्र में GDP का 6.11% योगदान दिया है, तथा सेवा क्षेत्र में 24.3% का योगदान दिया है।
  • लघु उद्योग ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रो में फैले हुए हैं। जिससे लोगों को वहीं रोजगार मिल जाता है, तथा पलायन की समस्या नहीं आती है।

लघु उद्योगों का उद्देश्य

लघु उद्योगों का मुख्य उद्देश्य रोजगार के अवसरों में वृद्धि करना है, तथा बेरोजगारी व अर्ध बेरोजगारी को समाप्त करना है। इन उद्योगों में श्रमिकों की आवश्यकता होती है। इसलिए लोगों को रोजगार के अधिक अवसर मिलते हैं।

लघु उद्योगों के विकास से आर्थिक समानता आती है। तथा आर्थिक सत्ता का विकेंद्रीकरण होता है। इसके साथ-साथ औद्योगिक विकेंद्रीकरण भी होता है, जिससे आर्थिक विकास व प्रौद्योगिक विषमता को संतुलित करने में सहायता मिलती है।

ऐसे उद्योगों के द्वारा कलात्मक व परंपरागत वस्तुओं का निर्माण किया जाता है, जिससे सभ्यता व संस्कृति पोषित होती है। यह उद्योग श्रम प्रधान होते हैं, इससे पारस्परिक सद्भावना, सहकारिता, समानता व भाईचारे की भावना को बल मिलता है। इससे प्राकृतिक संसाधनों का भी सदुपयोग होता है।

भारत में लघु उद्योग

भारत देश में कई प्रकार के लघु उद्योग चलाए जा रहे हैं। जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं, जैसे वस्त्र उद्योग, चमड़ा उद्योग, कागज उद्योग, लकड़ी के सामान का उद्योग, धातु उद्योग, रबड़ व प्लास्टिक उद्योग, रासायनिक उद्योग, भोजन उत्पाद उद्योग, बिजली व मशीनरी का सामान उद्योग, आदि कुछ प्रमुख उद्योग धंधे हैं।

लघु उद्योग मंत्रालय

भारत में लघु उद्योगों की वृद्धि व विकास के लिए लघु उद्योग मंत्रालय लगातार कार्यरत है। यह मंत्रालय लघु उद्योगों के विकास के लिए नई नई नीतियां बनाता है, तथा उन्हें लागू करता है। तथा साथ ही साथ उनमें प्रतिस्पर्धा करवाता है। ये इस प्रकार से हैं।

  1. राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड (NSIC)- इसके कार्य लघु उद्योगों का विकास करना उनकी सहायता करना वह उन्हें पोषित करना है
  2. लघु उद्योग विकास संगठन (SIDO)- यह संगठन नीतियों का निर्माण करता है,तथा उनका क्रियान्वयन करता है तथा योजनाएं बनाता है। यह सरकार की सहायता करने वाला प्रमुख संगठन है
उधम विकास संस्थान

लघु उद्योग मंत्रालय ने लघु उद्योगों के विकास के लिए प्रशिक्षण उपक्रम अनुसंधान व परामर्श के लिए संस्थान विकसित किए हैं, जो इस प्रकार हैं।

  1. हैदराबाद राष्ट्रीय लघु उद्योग विस्तार प्रशिक्षण संस्थान।
  2. नोएडा राष्ट्रीय उद्यान एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान।
  3. गोवाहाटी भारतीय उधम संस्थान।

भारत के समग्र आर्थिक विकास को ध्यान में रखते हुए लघु उद्योगों के विकास पर विशेष बल दिया गया है। इसलिए लघु उद्योगों के लिए सरकार द्वारा नीति समर्थन की प्रवृत्ति, लघु उद्यम वर्ग के विकास में सहयोगी रही है। ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में लघु उद्योग को भारी क्षति पहुंची थी परंतु आजादी के पश्चात इसका फिर से विकास शुरू हो गया है।

भारत सरकार सूक्ष्म मध्यम व लघु उद्योगों के उत्थान के लिए मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत नए-नए उपाय कर रही है। जिससे कि इन उद्योगों का विकास हो सके, तथा बेरोजगारी की समस्या समाप्त हो जाए, तथा भारत देश आत्मनिर्भर बन सके।
धन्यवाद

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