7 अगस्त राष्ट्रीय हथकरघा दिवस

7 अगस्त राष्ट्रीय हथकरघा दिवस (National Handloom Day 7 August)

भारत में हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए, हथकरघा उद्योग में कार्यरत लोगों को सम्मान दिलाने के लिए, बुनकरों की आय में बढ़ोतरी करने के लिए व उनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए, हथकरघा दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य महिलाओं व लड़कियों को सशक्त बनाना है। यह लोग हथकरघा उद्योग में ज्यादा संलग्न है।

राष्ट्रीय हथकरघा उद्योग मनाने से देश में इस उद्योग को सम्मान मिलेगा, लोगों का ध्यान इस भारतीय उद्योग की तरफ आकर्षित होगा। जिसका सीधा असर उस उद्योग में संलग्न लोगों के जीवन पर व भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान से जुड़ा हुआ है।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस कब मनाया जाता है, व इसकी घोषणा कब की गई?

29 जुलाई, 2015 को भारत सरकार द्वारा राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से हर वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाए जाने की घोषणा की गई थी। जबसे नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद संभाला तभी से उनका ध्यान हथकरघा उद्योग में संलग्न बुनकरों की दयनीय स्थिति पर था। उनके द्वारा किए गए कार्यों को पहचान दिलाने के लिए व उनकी आजीविका में सुधार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर वर्ष 7  अगस्त को यह दिवस मनाने की घोषणा की, तथा बुनकरों की स्थिति सुधारने के लिए उनके द्वारा बनाए गए वस्तुओं की बिक्री आदि के लिए कई स्कीमें चलाई गई।

7 अगस्त की तारीख का चयन करने के पीछे एक महत्वपूर्ण घटना जुड़ी हुई है। इस दिन गांधी जी के स्वदेशी मिशन आंदोलन के अंतर्गत सन 1950 में कोलकाता के टाउन हाल में एक जनसभा में स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत की औपचारिक घोषणा की गई थी।

1926 में गांधी जी ने खादी को स्वराज्य का प्रतीक बताया था। इस आंदोलन में देश में बनी वस्तुओं का उपयोग करने का आवाहन किया गया था, तथा विदेशी सामान के बहिष्कार का आवाहन किया गया था। जिससे भारतीय घरेलू उद्योगों का पुनरुत्थान हुआ था। इस दिवस की फिर से याद दिलाने के लिए व राष्ट्रीय हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 7 अगस्त की तारीख का चयन किया गया।

पहला राष्ट्रीय हथकरघा दिवस

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की घोषणा के पश्चात, पहली बार इसके लिए समारोह का आयोजन 7 अगस्त, 2015 को मद्रास यूनिवर्सिटी चेन्नई में आयोजित किया गया। इस अवसर पर महिला व बाल विकास मंत्री तथा कपड़ा उद्योग मंत्री श्रीमती स्मृति इरानी शामिल हुई। उन्होंने हथकरघा से बने कपड़ों या अन्य वस्तुओं को लोकप्रिय बनाने के लिए अभियान चलाए।

इसके लिए उन्होंने “मैं हथकरघा पहनती या पहनता हूं” (I wear handloom) के अभियान द्वारा देश का ध्यान बुनकरों की तरफ आकर्षित किया।  उनके इस अभियान में देश की बड़ी-बड़ी हस्तियों ने भी काफी सहयोग किया, तथा अपनी हथकरघा  से बने वस्त्र पहने हुए तस्वीरें शेयर की, इस अभियान से बुनकरों को सम्मान का एहसास हुआ तथा हथकरघा उद्योग को बल मिला।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2020

7 अगस्त, 2020 को देश का छठा राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाएगा। इस पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा कि, हमारे देश का हैंडलूम सैकड़ों वर्षो का गौरवमई इतिहास समेटे हुए है। हम सभी का प्रयास होना चाहिए कि ना सिर्फ भारतीय हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट का उपयोग करना होगा बल्कि इसके बारे में ज्यादा से ज्यादा प्रचार व प्रसार करना चाहिए। भारतीय हैंडलूम  बहुत सी विविधता लिए हुए है। दुनिया को इसका जितना पता चलेगा उतना ही हमारे देश के बुनकरों को लाभ मिलेगा

भारत में हैंडलूम

हैंडलूम के लिए कच्चा माल व हस्तकला में संपन्नता होनी बहुत आवश्यक है, और इन दोनों चीजों  कि भारत में कोई कमी नहीं है। भारत में कुल 23.77 लाख लोग हथकरघा कार्य में संलग्न है। जिसका 70% उत्तर पूर्वी भारत में हैं। विश्व के लगभग 85% हैंडलूम का उत्पादन भारत में होता है।  वैश्विक वस्त्र उद्योग में 61% भारत की हिस्सेदारी है। सूती धागा उद्योग में विश्व में भारत की 25% हिस्सेदारी है।

हैंडलूम के लिए कच्चे माल के उत्पादन में भी भारत काफी संपन्न है। भारत का विश्व में जूट उत्पादन में प्रथम स्थान है। इसके अलावा रेशम उत्पादन में भारत का दूसरा स्थान है, तथा कपास उत्पादन में भारत दुनिया भर में तीसरे स्थान पर है।

भारत में प्रसिद्ध हथकरघा उद्योग

भारत में विविध प्रकार का हैंडलूम बनाया जाता है, जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं।

  • फुलकारी पंजाब में
  • कुची कशीदाकारी गुजरात में
  • चिकनकारी उत्तर प्रदेश में
  • भागलपुर सिल्क बिहार में
  • कोसा सिल्क छत्तीसगढ़ में
  • गोल्डन फाइबर असम में
  • कुल्लू शॉल हिमाचल में
  • कुचाई सिल्क झारखंड में
  • मैसूर सिल्क कर्नाटक में
  • बंधिनी का काम गुजरात में
  • कसाउ केरल में
  • चंदेरी साड़ी मध्य प्रदेश में
  • मबनारसी साड़ी उत्तर प्रदेश में
  • पैठनी हैंडलूम महाराष्ट्र आदि कुछ मुख्य हथकरघा उद्योग हैं, जो काफी प्रसिद्ध हैं।

हैंडलूम का प्रचार व प्रसार

देश को सशक्त बनाने के लिए हमें अपने देश की वस्तुओं का उपयोग करना होगा, तथा अपने देश में बने सामान का प्रचार व प्रसार भी करना होगा। जिससे हमारे देश  के सामान को ब्रांड बनाया जा सके, इस कार्य  के लिए फिल्मी हस्तियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। भारतीय वस्तुओं का प्रयोग  फिल्मों में करके उन्हें विश्व प्रसिद्ध बनाया जा सकता है। बहुत से लोग ऐसा कर भी रहे हैं, जिनके शानदार नतीजे मिले हैं। उनका यह योगदान देश के उन गरीब बुनकरों को सम्मान व अच्छा जीवन दिलाने में बहुत सहयोग करेगा।

भारत में हैंडलूम वह बुनकरों के लिए चलाई गई स्कीम

भारत में बनाए गए हैं हँडलूम सामान की बिक्री, प्रचार प्रसार व गुणवत्ता सुधार उद्योगों के विकास तथा कच्चे माल की उपलब्धता को सुनिश्चित करना आदि के लिए अनेक स्कीम चलाई गई हैं। साथ ही साथ बुनकरों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए। उनके लिए भी अनेक स्कीम सरकार द्वारा लाई गई हैं। तथा इसके साथ-साथ इन स्कीमों का सही लाभ पहुंचाने के लिए सहायता केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। सरकार द्वारा चलाई गई स्कीमों की जानकारी आप आगे दिए गए लिंक द्वारा प्राप्त कर सकते हैं।

http://handlooms.nic.in/user_panel/userview.aspx?typeID=1194

भारत में हथकरघा बुनकरों में हथकरघा उद्योगों पर प्रकाश डालने के लिए हर वर्ष 7 अगस्त को  हथकरघा दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य देश के विकास में हथकरघा के योगदान को बढ़ावा देना, तथा बुनकरों की आय में बढ़ोतरी करना है।

इस उद्योग के विकास से घरेलू उत्पादन, उत्पादन प्रक्रिया में नई ऊर्जा का संचार होगा। तथा इससे गुणवत्ता में सुधार आएगा। अब इन उद्योगों के प्रचार और प्रसार की आवश्यकता है। जिसका बेड़ा देश की जनता को उठाना होगा। इसके लिए उन्हें घरेलू वस्तुओं का उपयोग करना होगा, जिससे उन उद्योगों की गुणवत्ता सुधरेगी, तथा विश्व स्तर पर वे अपनी पहचान बना सकेंगे।

धन्यवाद

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