राष्ट्रीय पोषण सप्ताह National Nutrition Week 1st to 7th September

“पहला सुख निरोगी काया” यह वाक्य सबसे बड़ा सत्य है। अगर मनुष्य के पास कितना भी धन दौलत, सुख साधन अच्छा परिवार, मिलनसार पड़ोसी चाहे कुछ भी हो, परंतु यदि स्वास्थ्य ठीक नहीं है, तो यह सब उसके लिए बेकार है। इसलिए मनुष्य को अपने स्वास्थ्य को बहुत ही गंभीरता से लेना चाहिए। व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में अनाज, हरी सब्जियों, फल व दूध आदि को शामिल करना चाहिए। जिससे  जीवन स्वस्थ व दीर्घायु बन सके।

आज हर व्यक्ति अधिक से अधिक धन व यश प्राप्त करने के लिए दिन रात मेहनत करता है, तथा इस कारण उसे ठीक से खाने पीने का समय नहीं मिल पाता है। वह घर से बाहर मिलने वाले जंक फूड या पैक किए हुए भोजन का सेवन करता है। जिससे धीरे-धीरे उसके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता समाप्त हो जाती है, तथा उस स्थिति में उसका शरीर स्वास्थ्यवर्धक आहार को भी पचाने में असमर्थ हो जाता है, और उस  स्थिति में व्यक्ति द्वारा की गई मेहनत उसके कोई काम नहीं आती, और उसकी मेहनत का फल दूसरे लोग ही भोगते हैं। इस बात पर विचार करके हमें अपने काम के साथ-साथ शारीरिक पोषण को भी बराबर या सबसे अधिक महत्व देना चाहिए, ताकि व्यक्ति अपने जीवन के साथ साथ देश  को भी प्रगति की राह पर आगे बढ़ने में मदद कर सके।

राष्ट्रीय पोषण सप्ताह का इतिहास

राष्ट्रीय पोषण सप्ताह की शुरुआत 1973 में हुई अमेरिका के ‘एकेडमी ऑफ न्यूट्रिशन एंड डायरेक्टिस’  के सदस्यों द्वारा पोषण संबंधी शिक्षा व जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए, इसकी शुरुआत की गई तथा परिणाम स्वरूप लोगों ने इसमें अपने काफी रुचि दिखाई।

राष्ट्रीय पोषण सप्ताह की घोषणा कब की गई?

भारत में केंद्र सरकार द्वारा 1982 में राष्ट्रीय पोषण सप्ताह मनाने की घोषणा की गई थी। राष्ट्रीय पोषण सप्ताह भारत के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा भारत के पोषण और खाद्य बोर्ड द्वारा आयोजित एक वार्षिक पोषण कार्यक्रम है, जिसमें देश के नागरिकों  में जागरूकता फैलाने के लिए कार्यक्रम चलाए जाते हैं।

8 मार्च, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोषण अभियान शुरू किया। इस अभियान की घोषणा झुंझुनू राजस्थान में की गई। इसका उद्देश्य भारत को 2022 तक कुपोषण मुक्त बनाना है, तथा सितंबर महीने को पोषण माह के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया।

राष्ट्रीय पोषण सप्ताह का महत्व

देश में लोग अज्ञानता वश या भोजन की कमी के कारण कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। बहुत से लोगों को भोजन के नियमों का सही ज्ञान नहीं है। परिणाम स्वरूप वे रोगों का शिकार हो जाते हैं, तथा कुछ लोग  गरीबी के कारण सही आहार नहीं पा सकते, इसलिए भारत सरकार द्वारा गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों के लिए पेट भर भोजन के लिए मुफ्त अनाज देने की व्यवस्था की गई है।

राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के अवसर पर भोजन से संबंधित नियमों के बारे में जागरूकता के लिए, सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। ताकि लोगों को स्वास्थ्य जीवन जीने का मार्ग दिखाया जा सके, इस अवसर पर भाषण व चर्चाओं का आयोजन किया जाता है। जिसमें डॉकटर व जानकार लोग संतुलित आहार का महत्व बताते हैं।

राष्ट्रीय पोषण दिवस 2020 थीम

पोषण सप्ताह के लिए प्रतिवर्ष एक थीम रखा जाता है, जो इस प्रकार से है।

राष्ट्रीय पोषण दिवस थीम 2020 “Eat Right, Bite by Bite”

राष्ट्रीय पोषण दिवस थीम 2019 ”Har Ghar Poshan Vyavabhav”

राष्ट्रीय पोषण दिवस थीम 2018 “Go Further with Food”

राष्ट्रीय पोषण दिवस थीम 2017 “Put your best fork forward”

स्वस्थ भोजन के 5 नियम

  1. स्तनपान- जन्म से छह माह की आयु तक शिशु को सारे पोषक तत्व स्तनपान से ही मिलते हैं। जिससे उसमें वृद्धि व विकास सही ढंग से होता है। यह आहार शिशु के लिए दुनिया के किसी भी अन्य आहार से सुरक्षित व पोषक तत्वों से भरपूर होता है।
  2. विविधता पूर्ण भोजन-  हमें अपने भोजन में केवल एक या दो चीजों को शामिल नहीं करना चाहिए, बल्कि हमें सभी तरह का भोजन ग्रहण करना चाहिए, जैसे विविध प्रकार के अनाज सभी प्रकार की सब्जियां दालें व अन्य कई पोषक सामग्री को शामिल करना चाहिए ताकि, शरीर में सभी तत्वों का संतुलन बना रहे।
  3. भोजन में फल व सब्जियों की अधिकता-  हमें कई प्रकार की फल व सब्जियों का  सेवन अधिक से अधिक करना चाहिए। हमें अधिक पके हुए भोजन से बचना चाहिए। क्योंकि अधिक पकाने के बाद भोजन के पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। हम जब डिब्बा बंद या सुखा भोजन लें तब हमें उसमें अधिक चीनी  व नमक वाले भोजन से परहेज करना चाहिए।
  4. वसा युक्त भोजन का सेवन करें- वसा हमारे शरीर में ऊर्जा का प्रमुख  स्रोत है। परंतु अधिक वसायुक्त भोजन से हमारे शरीर में मोटापा हो जाता है, जो बाद में हृदय रोग व कई अन्य रोगों को जन्म देता है। वसा युक्त भोजन के लिए हम दूध, तेल, घी, मक्खन, दही, आदि का सेवन करना अच्छा रहता है। हमें माँस मछली का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इन में वसा की मात्रा बहुत अधिक होती है। जो रोगों को जन्म देती है।
  5. नमक व चीनी कम खाएं- हमें भोजन को स्वादिष्ट बनाने के लिए नमक व चीनी की आवश्यकता होती है। परंतु इन का अधिक सेवन शरीर में कई रोग पैदा करता है, इसलिए हमें अधिक नमक युक्त जंक फूड नहीं खाने चाहिए व कोल्ड ड्रिंक जिनमें चीनी की अधिकता होती है, उन्हें नहीं पीना चाहिए। इसके बजाय हम मीठे फलों का अधिक सेवन कर सकते हैं।

अतः हम कह सकते हैं कि, स्वास्थ्य के लिए पोस्टिक व संतुलित भोजन बहुत आवश्यक है। जब स्वास्थ्यवर्धक भोजन की बात आती है, तब पढ़ा लिखा व्यक्ति भी असमंजस में आ जाता है, और इसके लिए हम सभी को ज्ञान की आवश्यकता होती है। प्रत्येक मनुष्य के अपने आसपास के लोगों को स्वस्थ भोजन के बारे में जागरूकता फैलानी चाहिए इसीलिए राष्ट्रीय पोषण सप्ताह मनाया जाता है, क्योंकि स्वास्थ्य समाज से एक शक्तिशाली देश का निर्माण होता है।

थाली से गायब हो रहे पोषक तत्व

इंडियन डायटिक एसोसिएशन IDA द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, पिछले 30 सालों में फलों, सब्जियों व अनाज में पोषक तत्वों में भारी गिरावट आई है। रिपोर्ट के अनुसार गेहूं में 9% कार्बोहाइड्रेट कम हो चुका है। बाजरे में 8.5% कार्बोहाइड्रेट कम हो चुका है। मूंग की दाल में आयरन 6.12% कम हो चुका है। मसूर की दाल में आयरन 10% कम हो चुका है। टमाटर में विटामिन बी, मैग्नीशियम और जिंक की मात्रा में 62 से 73% की कमी आई है। सेब में आयरन 60% कम हो चुका है।

आजकल पैदावार बढ़ाने व फसलों को रोग मुक्त रखने के लिए रासायनिक खादों व कीटनाशकों का अधिकाधिक प्रयोग किया जा रहा है। जिससे मिट्टी के पोषक तत्व कम हो रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार मिट्टी में 43% जिंक की कमी हो गई है। इसके अलावा बोरान की 18.3%,आयरन की 12.1%, मैग्नीशियम की 5.6% व कॉपर की 5.4% कमी हो गई है।

धन्यवाद

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