नेल्सन मंडेला दिवस 18 जुलाई Nelson Mandela Day

नेल्सन मंडेला दिवस, 18 जुलाई Nelson Mandela International Day 18th july

 

नेल्सन मंडेला दिवस क्यों मनाया जाता है?

नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रीका के पहले ऐसे राष्ट्रपति थे, जो अश्वेत थे।  उन्होंने रंगभेद नीति के विरुद्ध काम किया। जिस वजह से उन्हें जेल में जाना पड़ा।  उन्हें 1993 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला। उन्होंने जीवन भर रंगभेद की नीतियों व ग़रीबों के हक व न्याय के लिए शांति पूर्वक कार्य किया। उनका जीवन सत्य व अहिंसा से प्रेरित थाI नवंबर 2009 में संकल्प 70/175 के तहत संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 18 जुलाई को उनके जन्म दिवस के अवसर पर हर वर्ष नेल्सन मंडेला दिवस मनाए जाने की घोषणा की गईI उनका जन्म 18 जुलाई 1918 के दिन हुआ था। उनके जन्म दिवस पर लोगों को 24 घंटे में से 67 मिनट दूसरों की सहायता करने व दान आदि करने के लिए प्रेरित किया जाता है। क्योंकि उन्होंने अपने जीवन के 67 साल रंगभेद विरोधी संघर्ष में दूसरों की सहायता के लिए व न्याय के लिए कार्य करते हुए बताएं। उनका संपूर्ण जीवन महात्मा गांधी के जीवन से प्रेरित था, इसलिए वे अहिंसा के मार्ग पर चलते थे। उनका जीवन संपूर्ण समाज के लिए एक प्रेरणादायक है, इसलिए हम उनके जीवन के बारे में कुछ मुख्य बातें जानने का प्रयास करते हैं।

नेल्सन मंडेला कौन थे?

नेल्सन मंडेला एक सामाजिक कार्यकर्ता थे। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की सरकार के रंगभेद की नीतियों के विरुद्ध शांतिपूर्ण तरीके से अभियान चलाए। उनका पूरा नाम नेल्सन रोहिल्ला मंडेला Nelson Rolihlahal Mandela था। उनका जन्म 18 जुलाई, 1918 को व उनकी मृत्यु 9 दिसंबर, 1913 में हुई। वे अफ्रीका में रंगभेद की नीति का विरोध करने वाली संस्था अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे। उनकी इन विरोधी गतिविधियों के कारण उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई गई, जिससे उन्हें जीवन के अमूल्य 27 वर्ष रॉबेन द्वीप के कारागार में बताए। जहां उन्होंने कोयला खनन का कार्य किया। 1990 में वहां की सरकार के साथ हुए समझौते के बाद उन्होंने दक्षिण अफ्रीका का निर्माण किया। वे संपूर्ण विश्व में रंगभेद का विरोधी के रूप में जाने जाते हैं।

जीवन परिचय (नेल्सन मंडेला जीवनी)

नेल्सन मंडेला का जन्म 18 जुलाई, 1918 को हुआ। उनके पिता का नाम हेनरी म्वेजो था। उनके पिता एक जनजाति के मुखिया थे, और मुखिया के बेटे को मंडेला कहा जाता था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा क्लार्क बेरी मिशनरी स्कूल में हुई, उसके बाद की शिक्षा मेथाडिस्ट मिशनरी स्कूल में हुई। जब वह 12 वर्ष के थे तब उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। उन्होंने 1942 में अपनी स्नातक की परीक्षा पास की, उनकी अपनी विचारधारा के कारण उनका संपूर्ण जीवन संघर्ष में रहा।

वे जीवन भर अश्वेत लोगों के लिए संघर्ष करते रहे तथा इस कारण उन्होंने 27 वर्ष जेल में भी बिताऐ। दक्षिण अफ्रीका में उन्हें राष्ट्रपिता माना जाता है। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में लोकतंत्र की स्थापना की थीI दक्षिण अफ्रीका में उन्हें मदीबा कहा जाता है, जो कि बुजुर्गों के लिए एक सम्मान सूचक शब्द है। जोहांसबर्ग में सेंडटन स्क्वेयर शॉपिंग मॉल में नेल्सन मंडेला की मूर्ति स्थापित की गई है, और वहां का नाम बदलकर नेल्सन मंडेला स्क्वायर कर दिया गया है। नेल्सन मंडेला ने जीवन में तीन शादियाँ कि व उनकी छह संताने थी। 95 वर्ष की आयु में 5 दिसंबर, 2013 को फेफड़ों के संक्रमण की वजह से जोहांसबर्ग में उनके घर पर उनकी मृत्यु हो गई। 2018 में 18 जुलाई को उनके जन्म के 100 साल पूरे होने पर सालगिरह मनाई गई।

जीवन का संघर्ष काल

जीवन यापन के लिए नेल्सन मंडेला ने जोहांसबर्ग में क्लर्क का कार्य किया, परंतु उनका झुकाव राजनीति में अधिक था।  इस वजह से वह इस कार्य में सक्रिय हो गए। उन्होंने रंग के आधार पर चल रहे भेदभाव का विरोध किया उन्होंने अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस यूथ लीग की स्थापना भी की। 12 जुलाई, 1964 को मज़दूरों को हड़ताल के लिए उकसाने के आरोप में, व बिना अनुमति देश से बाहर जाने के आरोप में उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई गई। उन्होंने 27 वर्ष तक रॉबेन द्वीप पर जेल में भी अश्वेत कैदियों के लिए कार्य किए। 27 वर्ष बाद जब वह जेल से रिहा हुए तो उन्होंने अपने शांतिपूर्ण संघर्ष के कारण अफ्रीका में लोकतंत्र की स्थापना की, तथा 1994 के चुनाव में उन्होंने चुनाव जीता, और 10 मई, 1994 को अफ्रीका के पहले अश्वेत प्रधानमंत्री बने। 1997 में उन्होंने राजनीति छोड़ दी, और उसके 2 साल बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद पर भी छोड़ दिया।

नेल्सन मंडेला के विचार

नेल्सन मंडेला अहिंसा के पथ पर चलने वाली व्यक्ति थे। उनका जीवन महात्मा गांधी जी के जीवन से अत्यधिक प्रभावित था। उन्होंने जीवन भर शांति व अहिंसा का साथ न छोड़ा, तथा इसी के बलबूते पर दक्षिण अफ्रीका के लोगों को न्याय व समानता का अधिकार दिलवाया। उन्होंने जीवन में बहुत सी बातें कहीं जो कि संपूर्ण विश्व के लिए प्रेरणादायक हैं उन पर अमल करके मनुष्य एक सम्मान पूर्ण जीवन शांति व सम्मान पूर्वक व्यतीत कर सकता है।

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नेल्सन मंडेला अनमोल वचन या नेल्सन मंडेला कोट्स कुछ इस प्रकार है ।

कठिनाइयाँ कुछ पुरुषों को तोड़ देती हैं। लेकिन कुछ को बना देते हैं। कोई कुल्हाड़ी इतनी तेज नहीं है, जो की कोशिश करने वाले की आत्मा को काट सके। जिसे यह उम्मीद है कि, वह अंत में भी उठेगा।

अगर आप दुश्मन के साथ शांति बनाना चाहते हैं, तो आपको अपने दुश्मन के साथ कार्य करना होगा। इससे वह आपका साथी बन जाएगा।

आज हम सभी को खुद से पूछना चाहिए जो लोग मेरे आस-पास रहते हैं, उनमें सुधार करने के लिए मैंने क्या किया है? क्या मैं, अपने आसपास की सुरक्षा करता हूं? क्या मैं चोरी का सामान खरीदता हूं? या अपराध को कम करने में मदद करता हूं?

 ऐसे नायकों को तोड़ना और समाप्त करना आसान है, जो शांति और निर्माण करते हैं।

स्वतंत्रता की लड़ाई हमारे लिए अटल है। हमें डर को अपने रास्ते में नहीं आने देना चाहिए।

तोड़ना और नष्ट करना बहुत आसान काम है। नायक भी होते हैं, जो निर्माण करते हैं। तथा शांति कायम करते हैं।

एक व्यक्ति किसी राष्ट्र को तब तक नहीं समझ सकता, जब तक वह जेल नहीं गया हो। किसी राष्ट्र का चरित्र इस  इस बात से नहीं पता चलता है कि, वह अमीरों के साथ कैसा व्यवहार करता है। बल्कि इस बात से पता चलता है कि, वह ग़रीबों से कैसा व्यवहार करता है।

मैंने श्वेत के खिलाफ वर्चस्व लड़ाई लड़ी है। मैंने काले वर्चस्व के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। मैंने एक  लोकतांत्रिक समाज, जिसमें सब आजाद हों, सबको समान अवसर मिलें, सब मिलकर सौहार्द से रहें।  इसका सपना देखा है। यही मेरा लक्ष्य है, और इसे प्राप्त करने के लिए मैं मर सकता हूं।

नेल्सन मंडेला पुरस्कार / उपलब्धियाँ

संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा उनके द्वारा दक्षिण अफ्रीका के अश्वेत लोगों के लिए किए गए कार्यों के लिए उनके जन्मदिन 18 जुलाई को नेल्सन मंडेला दिवस घोषित किया गया। उन्हें उनके कार्यों के लिए 1993 में नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया। उन्हें कुछ अन्य पुरस्कार भी मिले जैसे प्रेसिडेंट मेडल ऑफ फ़्रीडम, ऑर्डर ऑफ लेनिन, नेल्सन मंडेला भारत रत्न, निशान ए पाकिस्तान व 23 जुलाई, 2008 को गांधी शांति पुरस्कार दिया गया। इनके अलावा विभिन्न देशों में संस्थाओं द्वारा उन्हें अनेकों सम्मान प्रतीक दिए गए।

नेल्सन मंडेला जी ने अपने संपूर्ण जीवन काल में एक भी हिंसा की घटना नहीं होने दी। जबकि उस समय अश्वेतओं के अंदर गोरे शासन के प्रति भरपूर गुस्सा था। लेकिन मंडेला जी ने कभी भी सत्य व अहिंसा का दामन नहीं छोड़ा, और यह सिद्ध कर दिया कि शांति व अहिंसा से वह सब संभव है जो गुस्से से नहीं हो सकता है।

उनके बारे मे और जादा जानकारी के लिए आप wikipedia पे पढ़ सकते है ।

धन्यवाद।

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