भारत के राष्ट्रपति का निवास स्थान राष्ट्रपति भवन की सैर

राष्ट्रपति भवन की सैर

रायसिना  पहाड़ी पर बना यह भवन एक लोकतांत्रिक देश की भव्यता का प्रतीक है। राष्ट्रपति भवन भारत के राष्ट्रपति का निजी निवास स्थान होता है। इस भवन का कोना कोना अपने आप में भव्यता और सादगी के संतुलन की ऐसी अनोखी मिसाल है, जो विश्व भर में और कहीं देखने को नहीं मिलती। यह इमारत भारत जैसे महान गणतंत्र के आगे बढ़ते हुए एक-एक कदम की गवाह है। इस इमारत की भव्यता इसे बनाने वाले कारीगरों के हुनर और मेहनत की गवाह है। आइए भारत के राष्ट्रपति भवन के बारे में और अधिक जानने का प्रयास करें।

राष्ट्रपति भवन का इतिहास / राष्ट्रपति भवन पर टिप्पणी

12 दिसंबर, 1911 को जॉर्ज पंचम द्वारा ब्रिटिश भारत की राजधानी कोलकाता से बदलकर दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की गई। इसके बाद भारत के वायसराय के रहने के लिए राजधानी में एक विशाल व शानदार भवन बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया।

राष्ट्रपति भवन के निर्माण के लिए वास्तुकार एडविन लूटीएन्स को चुना गया। भारत के वायसराय के रहने के लिए यह भवन H आकार में बनाने का निर्णय किया गया, तथा 1912 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ। यह भवन 1929 में बनकर पूर्ण हुआ।  उस समय इसे वायसराय हाउस नाम दिया गया। इस भवन में सर्व प्रथम वायसराय लार्ड इरविन रहे, और उसके बाद लॉर्ड माउंटबेटन रहे जो कि अंतिम वायसराय थे। लॉर्ड माउंटबेटन ने  15 अगस्त, 1947 अर्धरात्रि को पंडित जवाहरलाल नेहरू को स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री की शपथ इसी भवन में दिलाई।

भारत के प्रथम गवर्नर जनरल श्री  चक्रवर्ती राजगोपालाचारी  ने 21 जून, 1948 को इसके मुख्य  डोम गुंबद के नीचे शपथ ली, तथा वहां पर अपना निवास स्थान बनाया। वे उस समय के राष्ट्रीय भवन में रहने वाले पहले भारतीय थे। सी राजगोपालाचारी ने वायसराय के शाही कमरे में रहने के बजाय अन्य छोटे कमरों में  रहने का निर्णय लिया, तथा वायसराय के कमरे को अन्य  प्रतिनिधि मंडलों के रुकने का स्थान बना दिया, और इसके बाद यही प्रथा चली आ रही है। 1950 में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रपति पद संभाला तथा इस भवन को अपना निवास स्थान बनाया। तभी से इसका नाम बदलकर राष्ट्रपति भवन कर दिया गया।

भारत की आजादी के लिए राजनैतिक प्रमुखों में महात्मा गांधी इस भवन में जाने वाले पहले भारतीय थे।  उन्होंने विंस्टन चर्चिल से नमक कर के विरोध में मुलाकात की तथा इन मुलाकातों के परिणाम स्वरूप लॉर्ड इरविन और गांधीजी के बीच 5 मार्च, 1931 को गांधी इरविन समझौता हुआ।

आजादी के बाद इस भवन में स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्रता दिवस  व अन्य कई उत्सव मनाए जाते हैं, तथा नेताओं के शपथ ग्रहण समारोह, बहादुरों को पुरस्कृत करना, विश्व के नेताओं के भाषण, समझौते, निवेश आदि कई निर्णय इसी भवन में लिए जाते हैं।

राष्ट्रीय भवन की वास्तुकला

राष्ट्रपति भवन पूर्वी व पाश्चात्य कला से बना हुआ भवन है। यह एक चार मंजिला भवन है, जिसमें 340 कमरे हैं, तथा 2.5 किलो मीटर लंबाई  वाला गलियारा  है। यह भवन तीन भागों में विभाजित किया गया है। भाग 1 में राष्ट्रपति भवन के मुख्य भवन जैसे अशोक हाल, दरबार हाल, डाइनिंग रूम, बैंक्वेट हॉल आदि शामिल है। भाग 2 में राष्ट्रपति भवन संग्रहालय परिसर आता है, तथा भाग 3 में इसके बाग बगीचे शामिल हैं। जिनमें हर्बल गार्डन, मुगल गार्डन, म्यूजिक गार्डन आदि शामिल हैं। राष्ट्रपति भवन के कुछ मुख्य हिस्सों का वर्णन इस प्रकार है।

जयपुर कॉलम- जहां पर यह भवन बना है, वहां पहले जयपुर रियासत के 2 गांव आते थे। इसीलिए  जयपुर के महाराज माधव सिंह को  सम्मान देने के लिए 145 फीट ऊंचा जयपुर कॉलम बनवाया गया। इस कॉलम के ऊपर एक कांच का सितारा लगा हुआ है, जिसे  स्टार ऑफ इंडिया कहते हैं।

सेंट्रल डोम गुंबद- इस  गुंबद के नीचे आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री श्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 15 अगस्त, 1947 की मध्य रात्रि को प्रधानमंतरी पद की शपथ ली थी। यह गुंबद राष्ट्रपति भवन में एक विशिष्ट पहचान रखता है। इस गुंबद में सांची के स्तूप की एक झलक मिलती है। इसमें लगे हाथी छज्जे जालिया आदि  में भारतीय कला की विशेष झलक दिखाई देती है।

दरबार हॉल- इस हॉल का राष्ट्रपति भवन में एक विशेष स्थान है। इस कक्ष में राष्ट्रपति की कुर्सी से अगर एक सीधी रेखा खींची जाए तो वह रेखा राज पथ होते हुए सीधी इंडिया गेट के बीचो बीच जाकर मिलती है। इस भवन की भव्यता बहुत ही अनोखी है। यहां पर राष्ट्रपति नागरिकों  को पुरस्कार देते हैं।  इस भवन में 227 खंभों के बीच  लगी हुई बुद्ध की प्रतिमा तथा  रामपुरखा बैल की प्रतिमाएं चार चांद लगाती हैं। यह दोनों मूर्तियां भारतीय प्राचीन इतिहास की महत्वपूर्ण धरोहर है।  1948 में इन्हें लंदन के बर्लिंगटन हाउस में प्रदर्शनी में रखा गया था। तथा बाद में इन्हें वापस लाकर राष्ट्रपति भवन में स्थापित कर दिया गया, भारत के राष्ट्रपति इस भवन में नागरिकों को व अन्य सैन्य पुरस्कार देते हैं।

अशोक हॉल-  यहां पर देश के प्रधानमंत्री व कैबिनेट मंत्री शपथ लेते हैं, तथा यह भवन अतिथियों के स्वागत के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है। इस भवन की दीवारों पर बहुत ही मनमोहक चित्रकारी की गई है। जिनमें प्राचीन ईरान साम्राज्य के सुल्तान फतेह अली शाह की चित्रकारी देखने योग्य है।

बैंक्वेट हॉल-  यह हॉल 104 फीट लंबा है, यह हॉल दुनिया भर से आए मेहमानों की मेजबानी के लिए है।  इस भवन में 104 कुर्सियां व एक लंबी मेज है, तथा इस भवन में भूतपूर्व राष्ट्रपतियों के चित्र भी लगे हुए हैं।

पुस्तकालय- राष्ट्रपति भवन में 35 हजार पुस्तकों को संग्रहित करने वाला एक भव्य पुस्तकालय भी है। यह चतुर्भुज आकार आकृति में समाया एक गोलाकार कक्ष है, यहां पर दो हजार दुर्लभ पुस्तकें भी हैं। जिनमें देश के इतिहास के कई लम्हे दर्ज हैं।

मुगल गार्डन- ब्रिटिश  और मुगल शैली में बना यह  उद्यान सदा फूलों से भरा रहता है। यहां पर फूलों के नाम राजा राम मोहन राय, इब्राहिम लिंकन, मदर टेरेसा आदि कई विश्व की महान हस्तियों के नाम पर रखे गए हैं।

क्लॉक टावर– इसे बैंड हाउस के रूप में भी जाना जाता है। इस टावर में लगी हुई क्लॉक इंग्लैंड के प्रसिद्ध जे बी जॉइस कंपनी द्वारा निर्मित है।

राष्ट्रपति भवन म्यूजियम कंपलेक्स- राष्ट्रपति भवन के अस्तबल वह  कोच हाउस को म्यूजियम में बदल दिया गया है।  इसका उदघाटन 25 जुलाई, 2014 को किया गया था। यहां पर भारत के राष्ट्रपति को मिले उपहारों को संरक्षित किया गया है। साथ ही साथ हथियार, फर्नीचर, मूर्तियां, वस्त्र, तस्वीरें, अभिलेख तथा बहुत ही महत्वपूर्ण सामग्री रखी हुई है। यह सब चीजें देखने योग्य हैं।

राष्ट्रपति भवन के दरवाज़े जनता के लिए खुले

भारत के पूर्व राष्ट्रपति, श्री प्रणव मुखर्जी की पहल के पश्चात अगस्त 2012 से लुटियंस के द्वारा निर्मित इस शानदार भवन की भव्यता को निहारने के लिए व इसके संग्रहालय,  उद्यानों आदि  की मनमोहक सुंदरता को  अपनी स्मृतियों में सँजोने के लिए जनता के लिए इस भवन के द्वार खोल दिए गए हैं।

राष्ट्रपति भवन के रोचक तथ्य

  • यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा राष्ट्रपति भवन है, जो 130 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है।
  • आजादी से पहले इसे वायसराय हाउस के नाम से जाना जाता था, जो कि भारत का सबसे बड़ा निवास स्थान है।
  • राष्ट्रपति भवन में लगभग 750 कर्मचारी कार्य करते हैं।
  • भवन को बनाने में लगभग 45  लाख इंटे, 15 लाख पत्थर, 7500 टन सीमेंट तथा 1350 टन लोहा व अन्य  धातुएं लगी हैं।
  • इस भवन के बैंक्वेट हॉल में एक साथ 104 लोग बैठ सकते हैं।
  • इसके उपहार संग्रहालय में जॉर्ज पंचम की 640 किलोग्राम की चांदी की कुर्सी रखी हुई है। जिस पर वे 1911 में दिल्ली दरबार में बैठे थे।
  • इस भवन के पीछे मुगल गार्डन है, जिसे प्रत्येक वर्ष फरवरी में उद्यानोत्सव पर जनता के लिए खोला जाता है।

भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री आर वेंकट रमन ने इस भवन के बारे में कहा है “प्रकृति और मनुष्य, चट्टान और  वास्तु कला ने शायद ही कभी एक उद्देश्य के लिए एक दूसरे का सहयोग किया हो, जैसा कि राष्ट्रपति भवन के लिए किया है।“ 17 वर्षों में  बनकर तैयार होने वाली यह इमारत हजारों मज़दूरों कारीगरों के हुनर की गवाह है। हमें इस बात का गर्व होना चाहिए कि, भारत देश में ना कोई राजा है ना बादशाह है। इस देश में राज अध्यक्ष है, जिसका प्रतीक यह भवन है। एक जमाने का ब्रिटिश राजसी महल आज आम नागरिकों के लिए खुल चुका है।

और जादा जानकारी के लिए आप राष्ट्रपति भवन का भ्रमण पेज या राष्ट्रपति भवन विकिपीडिया को पढ़ सकते है ।

धन्यवाद

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