अंतरराष्ट्रीय परमाणु हथियार उन्मूलन दिवस

अंतरराष्ट्रीय परमाणु हथियार उन्मूलन दिवस international day for total elimination of nuclear weapons 26 September

1946 में जब विश्व युद्ध समाप्त हुआ, तो पूरी दुनिया ने इस युद्ध के भयानक परिणामों को देखा। हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमलों के परिणाम को देखकर सारी दुनिया से सहम गई। इन हमलों की वजह से 2,13,000  बेकसूर नागरिकों की मृत्यु हो गई थी। तभी से परमाणु हथियारों  की समाप्ति के लिए लगातार चर्चाएं संधि और फैसले लिए जा रहे हैं। इस बारे में सबसे पहले 1946 में कदम उठाए गए उसके बाद 1958, 1967, 2013, 2017 में परमाणु हथियारों के उन्मूलन के लिए प्रयास किए गए। दुनिया भर में आज तक 2000 से अधिक परमाणु  हथियार परीक्षण हो चुके हैं।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु हथियार उन्मूलन दिवस की घोषणा कब की गई?

परमाणु हथियारों के खतरों को देखते हुए 26 सितंबर, 2013 को संयुक्त राष्ट्र महासभा की एक बैठक हुई, तथा एक प्रस्ताव पारित किया गया। तथा उसके बाद दिसंबर 2013 में हर वर्ष 26 दिसंबर का दिन अंतरराष्ट्रीय परमाणु हथियार उन्मूलन दिवस के रूप में मनाए जाने का निर्णय हुआ। इस प्रस्ताव के पक्ष में 137 देशों ने समर्थन किया, जबकि 28 देशों ने इसका विरोध किया, 20 देशों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। उसके बाद 2014 से हर वर्ष यह दिवस परमाणु हथियारों के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप मे मनाया जाता है।

24 जनवरी, 1946 को संयुक्त राष्ट्र महासभा का पहला प्रस्ताव पारित हुआ, और यह प्रस्ताव भी परमाणु हथियारों से ही जुड़ा हुआ था। इसके अनुसार परमाणु ऊर्जा का उपयोग शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए तथा विश्व को परमाणु हथियार मुक्त बनाया जाना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु हथियारों उन्मूलन दिवस के उद्देश्य क्या है?

यह दिवस मनाने का प्रमुख उद्देश्य दुनिया के सभी देशों को परमाणु हथियारों के खतरे के बारे में जागरूक करना है, तथा उनके उन्मूलन के लिए भी जागरूक करना है। सभी देशों की सरकारों के साथ-साथ समाज, एनजीओ, पत्रकारिता आदि को भी जागरूक करना होगा, ताकि वह भी इन हथियारों के उन्मूलन के लिए अपने देश में जागरूकता फैला सकें। साथ ही साथ जो देश परमाणु शक्ति हैं, उन्हें भी आपस में मिलकर समझौता करना चाहिए तथा अपने परमाणु हथियारों को नष्ट करना चाहिए तथा नए परमाणु हथियार बनाने पर भी रोक लगानी चाहिए।

परमाणु हथियारों के उन्मूलन के लिए क्या कदम उठाए गए?

2 सितंबर, 1945 को जब द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुआ तो इस युद्ध में हुए परमाणु हथियारों के प्रयोग से सारी दुनिया सहम गई तथा, तभी से परमाणु हथियारों को दुनिया से समाप्त करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए 1946 में यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली ने अपना पहला रेजोल्यूशन परमाणु हथियारों के उन्मूलन के लिए ही लिया, तथा इसके बाद लगातार प्रयास जारी रहे। 1982 में न्यूयॉर्क में परमाणु हथियारों को समाप्त करने के लिए एक विशाल जन आंदोलन हुआ, जिसमें लगभग 10 लाख से अधिक लोग शामिल हुए।

जनवरी 1998 में संयुक्त राष्ट्र ने यूनोडा का गठन किया। जिसका कार्य परमाणु हथियारों को बनाने से रोकना व प्रयोग करने से रोकना है। 2 दिसंबर, 2009 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 29 अगस्त को हर वर्ष परमाणु परीक्षण के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाने का फैसला लिया। 26 सितंबर, 2013 को परमाणु हथियारों के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाने का फैसला लिया। 1985 में दक्षिणी प्रशांत परमाणु मुक्त संधि हुई। 8 दिसंबर, 1987 को सोवियत संघ और अमेरिका के बीच हथियार सीमित करने के लिए एक संधि हुई।

परमाणु हथियार अप्रसार संधि NPT

1968 में विश्व के कई देशों में परमाणु हथियार  अप्रसार संधि हुई। इसे NPT के नाम से भी जाना जाता है। इस संधि को 5 मार्च, 1970 में लागू किया गया। इस संधि के अनुसार 1 जनवरी, 1967 के बाद कोई भी देश परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। इस संधि पर भारत, पाकिस्तान, दक्षिणी सूडान और इजराइल ने हस्ताक्षर नहीं किए, तथा इन  देशों ने अपने परमाणु हथियार बनाए। NPT के सदस्यों अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन व फ्रांस के पास इस संधि के पहले से ही परमाणु हथियार मौजूद थे, फलस्वरूप इन पर इस संधि का कोई असर नहीं हुआ। उत्तर कोरिया ने 2003 में इस समझौते को मानने से इंकार कर दिया, तथा अपने लिए परमाणु  हथियार परीक्षण किए।

परमाणु हथियार उन्मूलन संधियों का असर

परमाणु हथियारों के उन्मूलन के लिए लगातार चल रहे प्रयासों का काफी हद तक असर हुआ। इसमें सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका ने 1993 में अपने हथियार नष्ट कर दिए। इसके बाद 1995 में बेलारूस, कजाकिस्तान और यूक्रेन ने अपने परमाणु हथियार रूस को वापस लौटा दिए। ये देश पहले सोवियत संघ का हिस्सा थे। अल्जीरिया ने अपने परमाणु कार्यक्रम स्थगित कर दिए। ब्राज़ील और अर्जेंटीना ने भी परमाणु अप्रसार संधि  को मानना तथा परमाणु हथियार नहीं बनाए। लीबिया ने परमाणु कार्यक्रम छोड़ दिया स्विटज़रलैंड व स्वीडन ने परमाणु हथियारों पर अपना शोध बंद कर दिया। परंतु जो 9 देश परमाणु शक्ति है, उन पर इन संधियों का कुछ खास असर दिखाई नहीं दे रहा है।

परमाणु हथियारों का इतिहास

दुनिया में सबसे पहले 16 जुलाई, 1945 को अमेरिका ने न्यू मैक्सिको में परमाणु परीक्षण किया। इस परीक्षण के 21 दिन बाद 6 अगस्त, 1945 को यह बम जापान के हिरोशिमा पर गिराया गया। जिससे 1 महीने के अंदर लगभग1.5  लाख लोग मारे गए। इस हमले के 3 दिन बाद 9 अगस्त, 1945 को नागासाकी में भी एक और बम गिराया गया जिसमें 75 हजार के लगभग आमजन मारे गए। इसके बाद 24 जनवरी, 1946 को संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया को परमाणु हथियार मुक्त करने के लिए प्रण लिया। 29 अगस्त, 1949 को सोवियत संघ ने कजाकिस्तान में पहली चिंगारी नाम से परमाणु परीक्षण किया।

2 अक्टूबर, 1952 को ब्रिटेन ने ऑस्ट्रेलिया में पहला परमाणु परीक्षण किया। 1 नवंबर, 1952 को अमेरिका ने हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया। 13 फरवरी 1960 को फ्रांस ने सहारा रेगिस्तान में परमाणु परीक्षण किया। 30 अक्टूबर, 1961 को सोवियत संघ ने आज तक का सबसे बड़ा परमाणु परीक्षण किया। 16  अक्टूबर, 1964 को चीन ने परमाणु परीक्षण किया। भारत ने 18 मई, 1974 को पोखरण में स्माइलिंग बुद्धा नाम से परमाणु परीक्षण किया, तथा इसके बाद 1998 में भारत ने एक और परमाणु परीक्षण किया।

विश्व में किस देश के पास कितने परमाणु  हथियार हैं?

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया भर में लगभग 13,400 परमाणु हथियार हैं, तथा आज तक लगभग 2000 परमाणु परीक्षण हो चुके हैं। किस देश के पास कितने परमाणु हथियार हैं, इसके बारे में कुछ सटीक जानकारी प्राप्त नहीं है। परंतु कुछ रिपोर्टों के अनुमान के अनुसार रूस के पास लगभग 6,850 परमाणु हथियार हैं। उसके बाद अमेरिका के पास 6,550 हथियार हैं। फ्रांस के पास 300 परमाणु हथियार हैं। चीन के पास 280, ब्रिटेन के पास 215, पाकिस्तान के पास 145, भारत के पास 135 इजराइल के पास 80, और उत्तर कोरिया के पास 15 परमाणु हथियार हैं। यह आंकड़े अलग-अलग रिपोर्ट के अनुसार अलग हो सकते हैं। इनकी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है, इन राष्ट्रों का मानना है कि देश की सुरक्षा के लिए परमाणु हथियार बहुत जरूरी हैं। परंतु इनमें से किसी देश में राजनीतिक अस्थिरता के कारण परमाणु बम आतंकवादियों के पास जाने का भी खतरा है।

निष्कर्ष

पूरी दुनिया को परमाणु हथियारों से बचाने के लिए केवल एक ही उपाय है, और वह उपाय है हथियारों को नष्ट करना आज दुनिया में नौ देश परमाणु हथियारों से लैस हैं, तथा यह अपने परमाणु हथियारों को नष्ट करने के लिए तैयार नहीं है। इन सभी को चाहिए कि आपस में मिलकर कुछ संधियां करें अगर यह सभी अपने परमाणु हथियारों को नष्ट करने के लिए राजी हो जाते हैं, तभी विश्व से परमाणु हथियार नष्ट हो पाएंगे। इसलिए इन सभी देशों को मिलकर इस बारे में बात करनी चाहिए, तथा विश्व को परमाणु हथियार मुक्त बनाने के लिए कदम उठाने चाहिए।

धन्यवाद

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top
Send this to a friend