विश्व आत्महत्या निरोध दिवस

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस World Suicide Prevention Day 10 September

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार हर वर्ष लगभग 8 लाख से अधिक लोग आत्महत्या के कारण मरते हैं। हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति आत्महत्या द्वारा  मृत्यु को प्राप्त होता है, जिनमें से 75% मौतें निम्न व मध्यम आय वाले देशों में होती हैं। 70 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में आत्महत्या की दर अधिक पाई गई है, व 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के वयस्कों में मृत्यु का मुख्य कारण आत्महत्या है।

उच्च आय वाले देशों में पुरुष महिलाओं की तुलना में अधिक आत्महत्या करते हैं। विश्व भर में कुल आत्महत्या का 75% कम आय वाले देशों में पाया जाता है। 15 से 19 वर्ष तक की आयु वाले वयस्कों में मृत्यु का तीसरा सबसे बड़ा कारण आत्महत्या है।

विश्व आत्महत्या निरोध दिवस कब मनाया जाता है?

हर वर्ष 10 सितंबर को इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रीवेंशन IASP तथा WHO द्वारा आयोजित किया जाता है। ताकि आत्महत्या के बारे में जागरूकता फैलाकर इसे रोका जा सके। अंतर्राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम दिवस पहली बार 2003 में मनाया गया।

वर्ल्ड सुसाइड प्रीवेंशन डे थीम 2020

“Working together to prevent suicide.”

आत्महत्या को रोकने के क्या उपाय हैं?

  • आत्महत्या करने में काम आने वाले साधनों तक लोगों की पहुंच कम करना।
  • वयस्कों में जागरूकता लाने के लिए स्कूलों को योगदान देना चाहिए।
  • शराब व अन्य नशीले पदार्थों का उपयोग कम करना चाहिए तथा इनके लिए कड़े नियम बनाने चाहिए।
  • पुराने दर्द या बीमारी से जूझ रहे लोगों का सही इलाज करना चाहिए।
  • किसी परेशानी में चल रहे व्यक्ति के साथ उसके आसपास के लोगों द्वारा सहानुभूति पूर्ण व्यवहार करना चाहिए

आत्महत्या करने के क्या-क्या तरीके हैं?

एक रिपोर्ट के अनुसार आत्महत्या द्वारा  हुई मौतों में अधिकतर जहर खा लेने से, जिनमें कीटनाशक दवाएँ भी शामिल होते हैं। इसके अलावा फांसी पर लटकना या आग में जलना आत्महत्या के आमतौर पर मुख्य तरीके हैं। मानसिक तनाव से गुजर रहे लोग इस तरह का कदम उठा लेते हैं। ऐसे लोगों को प्रेम वह सहयोग की आवश्यकता होती है।

शांत जीवन जीना सीखें:

हमने अक्सर लोगों को कहते सुना है कि हमेशा शांत रहना चाहिए। परंतु शांति का मतलब क्या है, यह बहुत कम लोगों को पता है। शांति का मतलब यह है कि हम अधिक दुख होने पर दुखी ना हो, और बहुत अधिक खुशी होने पर ज्यादा खुश ना हो हर परिस्थिति में एक समान बने रहना ही शांति है। और ऐसा तभी संभव है, जब हम एक दर्शक बनकर जीवन जायेंगे हमें परिस्थितियों का गुलाम नहीं बनना है, बल्कि परिस्थितियों को अपना गुलाम बना है।

सकारात्मक सोच:

हमें हर कार्य में अच्छाइयां ढूंढनी चाहिए ना की बुराइयां हमें परिस्थितियों से सीख लेनी चाहिए ना कि दुखी होना चाहिए अक्सर हम कोई कार्य करने जाते हैं तो पहले नकारात्मक सोचते हैं ऐसा करने से उनका परिणाम भी नकारात्मक ही निकलता है। उदाहरण के लिए एक छोटी सी कहानी बताता हूं। एक बार रामू का झगड़ा उसके दोस्त मनोज से हो गया। अगले दिन रामू को कहीं दूर जाना था, जिसके लिए उसे साइकिल की जरूरत थी। और उसे साइकिल केवल मनोज ही दे सकता था। रामू के माता-पिता ने कहा जाकर मनोज से साइकिल ले लो पर रामू डर रहा था कि मनोज का तो उससे झगड़ा हो गया है वह उसे साइकिल नहीं देगा।

घरवालों के ज्यादा कहने पर वह मनोज से साइकिल लेने के लिए चल पड़ा और रास्ते में बार-बार यही सोचता रहा कि जा तो रहा हूं लेकिन मनोज साइकिल नहीं देगा। उसने मनोज के घर का दरवाज़ा खटखटाया, जैसे ही मनोज बाहर निकला उसे देखते ही रामू बोला “अपनी साइकिल को सिर पर रख रख कर नाच लो”। तो उसका क्या परिणाम निकला होगा वह आप सब समझ ही गए होंगे। तो इसीलिए कहा जाता है, हम जैसा सोचते हैं वैसा ही परिणाम निकलता है। हमें ऐसा विश्वास रखना चाहिए कि जो परिस्थितियां चल रही है, वह सब परमेश्वर की इच्छा से चल रही हैं। यह हमें अच्छी लगे या बुरी परंतु इनमें कोई ना कोई रहस्य अवश्य छुपा हुआ है, जिससे हमारा भला ही होगा। और हमें कुछ सीखने को मिलेगा।

तनाव मुक्त रहने के कुछ अन्य उपाय:

  • नियमित रूप से व्यायाम और ध्यान करें।
  • दिन में कुछ समय पेड़ पौधों और पालतू जानवरों के साथ बिताए।
  • खाली समय में विश्राम ज्यादा से ज्यादा करें।
  • संगीत का आनंद लें।
  • दिनचर्या का पालन करें।
  • अपनी वस्तुओं को सही स्थान पर रखें, व सफाई का ध्यान रखें।
  • जितना हो सके स्वयं पर निर्भर रहें।

यह पढ़े – तनाव (depression) क्या होता है? तनाव मुक्त रहने के उपाय

व्यक्ति को अपना जीवन एक कलाकार बन कर नहीं जीना चाहिए, बल्कि एक दर्शक बनकर जीना चाहिए। हमारे आसपास जो कुछ हो रहा है इस वजह से हमें अपनी मनोदशा को नहीं बदलना चाहिए।  मान लीजिए हमने किसी से फोन पर बात की उसने हमें कुछ ऐसा कहा जिससे हमारा दिमाग खराब हो गया और तब हम तनाव महसूस करने लगते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि हमारा दिमाग हमारे खुद के कंट्रोल में नहीं है।  

कोई बाहर का व्यक्ति कुछ कह कर या किसी कार्य द्वारा हमें तनाव में डाल सकता है।ऐसा व्यक्ति संसार के हाथों की कठपुतली होता है। उसका पूरा जीवन तनावपूर्ण रहता है, और उसके साथ रहने वाले लोग भी दुखी रहते हैं। उसे एक हारा हुआ इंसान कहना सही होगा। लेकिन उसे किसी दूसरे ने नहीं हराया है, उसे उसने खुद हराया है जबकि फोन सुनने वाले व्यक्ति को सामने वाले व्यक्ति की बात को समझना चाहिए था। हो सकता है उसने आप के भले के लिए ही कुछ बताया होगा हर एक बुरी व अच्छी बात से हमें सीख लेनी चाहिए ना की टेंशन।

भारत में कई एनजीओ तथा स्वयंसेवी संस्थाएं आत्महत्या रोकने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाती हैं। तथा तनाव ग्रस्त लोगों को सहयोग करती हैं जसे स्नेहा इंडिया फ़ाउंडेशन और इमोशनल सपोर्ट, लाइफ लाइन फ़ाउंडेशन रोशनी हेल्पलाइन आदि कई संस्थाएं इस क्षेत्र में अच्छा कार्य कर रही हैं। संपूर्ण समाज का यह कर्तव्य बनता है कि, वे अपने आसपास हो रही गतिविधियों पर ध्यान दें तथा तनाव ग्रस्त लोगों  का सहयोग करें।

धन्यवाद।

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