विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 17 सितंबर

विश्व रोगी सुरक्षा दिवस World Patient Safety Day 17 September

स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में लापरवाही या कमियों के कारण होने वाली विकलांगता व समय से पहले मृत्यु होना मृत्यु के 10 प्रमुख कारणों में से एक है। इलाज के दौरान दवाओं का गलत उपयोग हो जाना व गलत इलाज या नुस्खों के कारण होने वाली मौतों का इसमें सबसे अधिक योगदान है। एक अनुमान के अनुसार हर मिनट 5 लोग इसी वजह से मरते हैं।

असुरक्षित देखभाल की वजह से होने वाली मौतें रोकी जा सकती हैं। इसके लिए सही दवा, सही व्यक्ति को मिलनी चाहिए तथा सही मात्रा में व सही समय पर मिलनी चाहिए। डॉक्टर को चाहिए कि वह मरीज को दवा लेने का  तरीका व समय ठीक से समझाएं, ताकि इसमें कोई गलती ना हो, तथा इस लापरवाही की वजह से होने वाली परेशानी से बचा जा सके।

अंतरराष्ट्रीय रोगी सुरक्षा दिवस कब मनाया जाता है?

अंतर्राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा दिवस की घोषणा कब की गई?

हर वर्ष 17 सितंबर को विश्व रोगी सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। इसकी घोषणा 72 वीं वर्ल्ड हेल्थ असेंबली में मई 2019 में की गई थी। इसकी घोषणा WHA72.6 रेजोल्यूशन के अंतर्गत की गई। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना है, तथा इसके बारे में जागरूकता फैलाना है, तथा इस कारण हो रही विकलांगता व मृत्यु दर को कम करना है।

विश्व रोगी सुरक्षा दिवस का थीम 2020 “Health Worker Safety: A Priority for Patient Safety”

विश्व रोगी सुरक्षा दिवस का स्लोगन 2020 “Safe Health Workers, Safe Patients”

अंतर्राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा दिवस का उद्देश्य

विश्व रोगी सुरक्षा दिवस मनाए जाने का उद्देश्य रोगियों की सुरक्षा व स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता को बढ़ाना है, तथा इसके लिए सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके द्वारा वैश्विक स्तर पर समाज को जागरूक किया जाएगा, साथ ही साथ वैश्विक स्तर पर रोगी और स्वास्थ्य कर्मी की सुरक्षा को भी बढ़ावा देना है।

रोगी की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को अनुशासित व सुरक्षित बनाना होगा, तथा उन्हें समाज के प्रति जवाबदेह होना होगा। 2020 में COVID 19 महामारी के कारण विश्व स्वास्थ्य सेवाओं पर बहुत भारी दबाव पड़ रहा है। इस समय में स्वास्थ्य कर्मियों में रोगियों की सुरक्षा ही सबसे बड़ी समस्या है, इसलिए ऐसे समय में स्वास्थ्य सेवाओं को कुशल व सुरक्षित करने के लिए सभी को मिलकर योगदान देना चाहिए। इसके लिए हेल्थ वर्कर की सुरक्षा के लिए आवाज़ उठाओ का नारा भी दिया गया है। ऐसे कार्यों के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।

रोगी सुरक्षा क्या होती है?

किसी भी मरीज के इलाज के दौरान कई बार गलत दवाओं का प्रयोग हो जाता है, या दवा की मात्रा कम या ज्यादा दी जा सकती है, या फिर दवा देने के समय में गलती हो सकती है। इससे बहुत बड़ा ख़ामियाज़ा उठाना पड़ता है। कई बार मरीज की देखभाल के समय कोई दुर्घटना हो जाती है, या फिर कोई जटिल सर्जरी के दौरान मरीज बच नहीं पाता है आदि कई अन्य कारण हैं। जिनसे रोगी को जान का खतरा हो सकता है।

इन समस्याओं के लिए जागरूकता व अनुशासन की आवश्यकता होती है, ताकि रोगी सुरक्षित तरीके से अपने रोग का इलाज करवा सके। ऐसा करने के लिए रोगी के साथ-साथ स्वास्थ्य कर्मियों को सही रणनीति का प्रयोग करना चाहिए। सुरक्षा साधनों में सुधार करना चाहिए। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पेशेवर व कुशल स्वास्थ्य कर्मियों को ही ज़िम्मेदारी दी जानी चाहिए, तथा उन्नत किस्म की स्वास्थ्य सेवाएं रोगी को मुहैया करवाने चाहिए। ऐसा करने में अगर स्वास्थ्य कर्मियों को किसी प्रकार की दिक्कत आ रही है तो, उन समस्याओं का समाधान करना भी सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी है।

रोगी की सुरक्षा को क्या खतरे हैं?

एक अनुमान के अनुसार हर वर्ष खराब गुणवत्ता व स्वास्थ्य देखभाल में हुई त्रुटियों के कारण लाखों रोगी समय से पहले जान गवा बैठते हैं। इनमें से कुछ त्रुटियों का वर्णन नीचे किया गया है।

गलत दवा दी जाना – जब स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक दबाव पड़ता है तो कई बार मरीज को कोई गलत दवा दी जा सकती है, या फिर दवाई की पैकिंग के दौरान कोई असावधानी के कारण गलत दवा गलत पैकेट में पैक हो सकती है, या कई बार डॉक्टर मरीज को दवा ठीक से नहीं समझा पाता है। जिससे मरीज दवा को कम या अधिक मात्रा में ले लेता है, या फिर ठीक समय पर नहीं लेता है। जिससे मरीज को इसका ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ता है।

स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा संक्रमण फैलना – स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा  कई बार मरीज़ों की देखभाल के दौरान किसी संक्रामक रोग वाले मरीज के संपर्क में आने से यह रोग दूसरे रोगियों तक पहुंच जाता है, तथा दूसरे रोगी भी उस रोग के शिकार हो जाते हैं। इसलिए स्वास्थ्य कर्मियों को  कुशलता व अनुशासन से कार्य करना चाहिए।

असुरक्षित जटिल सर्जरी – कई बार कई गंभीर रोगों में सर्जरी के दौरान कई प्रकार की जटिलताएँ आ जाती हैं, जिनसे रोगी अपनी जान गवा बैठते हैं।

टीकाकरण की ग़लतियाँ – कई बार असुरक्षित तरीके से टीकाकरण किए जाने के कारण कई संक्रामक रोग तेजी से फैल सकते हैं। जैसे कि एचआईवी एड्स, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी आदि कई तरह के संक्रामक रोग होते हैं। ऐसे लोगों का पता काफी समय बीत जाने के बाद चलता है।

इसके अलावा और भी कई कारण हो सकते हैं जिसके कारण अस्पतालों में रोगियों को खतरा हो सकता है, जैसे कि रेडिएशन का खतरा, रक्त के थक्के जमना आदि इस तरह की दिक्कतें उपचार के योग्य हैं। परंतु इन पर अधिक ध्यान न दिए जाने के कारण यह काफी नुकसानदायक सिद्ध होते हैं।

अंत में हम यही कह सकते हैं कि, विश्व रोगी सुरक्षा दिवस  मनाए जाने का उद्देश्य इलाज के दौरान रोगियों को आ रही परेशानियों के बारे में विश्व का ध्यान इस ओर आकर्षित करना है। तथा इस क्षेत्र में उचित बदलाव किए जाने पर ध्यान देना है। इसके साथ साथ स्वास्थ्य कर्मियों के स्वास्थ्य उनकी सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाना इसका एक उद्देश्य है, क्योंकि इलाज के दौरान संक्रामक रोगों का सबसे अधिक खतरा स्वास्थ्य कर्मियों को ही होता है। इसलिए हमें मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं को ऊँचे दर्जे का व कुशलता पूर्ण बनाने की तरफ ध्यान देना चाहिए।

धन्यवाद।

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