विश्व व भारतीय डाक दिवस कब मनाया जाता है

विश्व डाक दिवस World Post Day 9 October

किसी समय लोग खत के माध्यम से अपने सुख-दुख के बारे में बातें करते थे, अपने बारे में बताते थे, प्रेम तथा भावनाओं को व्यक्त करते थे। लोग अपने परिवार जनों का खत पाने के लिए डाकिए का इंतजार करते थे, क्योंकि वही डाकिया लोगों को उनके पत्र पहुँचाता था, तथा कुछ लोगों की खत पढ़ने में सहायता भी करता था। इसलिए समाज में डाकिये को एक सम्मान की दृष्टि से देखते हैं, तथा उसका इंतजार करते हैं।

आज के आधुनिक युग में कोरियर की शुरुआत हो गई है। इंटरनेट की मदद से ईमेल कर सकते हैं, वीडियो कॉल कर सकते हैं ,परंतु आज भी सरकारी डाक घर की कीमत कम नहीं हुई है। आज भी राखी के अवसर पर राखी भेजने के डाक घर के आगे बहनों की लंबी लाइन लगती है। साथ ही साथ डाक विभाग ने अन्य कई कई सेवाओं की शुरुआत की है।

आशा है की हमारे विश्व डाक दिवस पर लेख के जरिए आपको डाक दिवस के बारे मे पूरी जानकारी प्राप्त होगी ।

विश्व डाक दिवस कब मनाया जाता है?

विश्व डाक दिवस हर वर्ष 9 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1969 में जापान के टोक्यो शहर में आयोजित यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन कांग्रेस की एक सभा में की गई। इसका उद्देश्य लोगों को डाक घरों के महत्व के बारे में जागरूक करना तथा डाक व्यवस्था को मजबूत व आधुनिक बनाना है। इस दिन संदेश वाहको को याद किया जाता है। जो कि हर मौसम में परिस्थिति का सामना करते हुए हमारे संदेश पहुँचाते हैं।

भारतीय डाक दिवस कब मनाया जाता है?

जहां विश्व डाक दिवस 9 अक्टूबर को मनाया जाता है वहीं भारतीय डाक दिवस हर वर्ष 10 अक्टूबर को मनाया जाता है। इस दिन डाक विभाग के उत्थान के लिए कार्यक्रम चलाए जाते हैं तथा जागरूकता फैलाई जाती है साथ ही साथ नई योजनाओं रणनीतियां का भी शुभारंभ किया जाता है।

विश्व डाक का इतिहास

विश्व स्तर पर डाक की आवाजाही में आ रही दिक्कतों के समाधान के लिए 9 अक्टूबर, 1874 को जनरल पोस्टल यूनियन का गठन किया गया। इसके लिए बर्न स्विटज़रलैंड में 22 देशों ने स्वीकृति दी। इसे 1 जुलाई, 1875 से लागू किया गया। 1 अप्रैल, 1879 में इस संस्था का नाम बदलकर यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन UPU कर दिया गया। इसकी वजह से विश्व स्तर पर संचार क्रांति की शुरुआत हुई।

यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन UPU 1948 मैं संयुक्त राष्ट्र का एक हिस्सा बनी। इसका संविधान 1964 में वियना पोस्टल कांग्रेसमें स्वीकारा गया, तथा 1966 में इसे लागू किया गया। वर्तमान समय में 192 देश यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन के सदस्य हैं। यह संस्था वैश्विक स्तर पर डाक से संबंधित दिक्कतों को दूर करने का प्रयास करती हैं।

भारतीय डाक दिवस का इतिहास व भारत में डाक प्रणाली की शुरुआत कब हुई?

भारतीय डाक का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। प्राचीन समय में राजा महाराजा एक दूसरे राज्य को संदेश भेजने के लिए दूत भेजते थे, या फिर कबूतरों की सहायता ली जाती थी। इसके लिए हुमर प्रजाति के कबूतरों का प्रयोग किया जाता था। परिवहन के साधनों के विकास के साथ डाक व्यवस्था में एक बड़ा परिवर्तन आया।

भारत में 1766 में लॉर्ड क्लाइव ने भारत में डाक प्रणाली की शुरुआत की। 1774 में कोलकाता में जर्नल पोस्ट ऑफिर GPO की स्थापना की गई। इसके बाद मद्रास जर्नल पोस्ट ऑफिर की स्थापना 1786 में की गई, तथा मुंबई जनरल पोस्ट ऑफिस की स्थापना 1793 में की गई। सन 1837 में भारतीय डाक अधिनियम बनाया गया। इसके फलस्वरूप भारतीय डाक व्यवस्था के एकाधिकार की शुरुआत हुई। इसके बाद कोलकाता मद्रास में मुंबई के सभी डाक संगठनों को मिलाया गया। 1854 में पोस्ट ऑफिस अधिनियम लागू हुआ, जो कि आज की बुनियादी डाक प्रणाली का आधार बना हुआ है। इसके अनुसार ब्रिटिश क्षेत्रों में डाक लाने ले जाने अधिकार भारतीय डाक घरों को दिया गया, तथा रेल डाक की शुरुआत की गई।

भारत से चीन में ब्रिटेन में डाक ले जाने के लिए समुद्री डाक की भी शुरुआत की गई। 1 जुलाई 1852 को सिंध में डाक मोहर बनाई गई, तथा 1854 में पहली बार आधा आना एक आना और दो आना का डाक टिकट जारी किया गया। इस डाक टिकट पर महारानी विक्टोरिया की तस्वीर थी। उस समय सालाना 1 करोड़ 20 लाख पत्र भेजे जाते थे। जो संख्या 1550 करोड़ तक पहुंच चुकी है।

भारत की आजादी के बाद 21 नवंबर, 1947 को आजाद भारत का पहला डाक टिकट जय हिंद के नारे के साथ जारी किया गया। विश्व का सबसे बड़ा डाक तंत्र भारत में है। दुनिया में 6 लाख 40 हजार डाकघर हैं। जिनमें से 1 लाख 55 हजार भारत में है। आजादी के समय देश में 23 हजार 344 डाक घर थे। जिनमें से 19,184 गांव में स्थित थे। वर्तमान में कुल 1 लाख 55 हजार 531 डाक घर है।इनमें से 90% गांव में स्थित है। इन डाक घरों में लाखों कर्मचारी कार्य करते हैं।

भारतीय डाक में क्या सुधार किए गए?

भारतीय डाक दुनिया की सबसे बड़ी डाक व्यवस्था है। तथा समय-समय पर इसमें सुधार किए जाते रहे हैं, जो इस प्रकार हैं।

1930 में भारतीय पोस्टल आर्डर शुरू किया गया। 1972 में पोस्टल इंडेक्स नंबर PIN की शुरुआत की गई। 1977 में VPP पार्सल और बीमा पार्सल की शुरुआत की गई। 1985 में डाक व दूरसंचार विभाग को अलग कर दिया गया। 1986 में स्पीड पोस्ट की शुरुआत हुई। NIT आधुनिकरण परियोजना, प्रोजेक्ट एरो, MNOP नेटवर्क में सुधार के लिए पर योजनाएं लाई गई हैं। पत्रों की तेजी से छटनी के लिए स्वचालित डाक प्रोसेसिंग केंद्र स्थापित किए गए है।

14 जुलाई, 2013 को तार सेवा को कम होती मांग के कारण बंद कर दिया गया। पत्रों, स्पीड पोस्ट, रजिस्ट्री पार्सल और मनी ऑर्डर के लिए ट्रैक और ट्रैस सुविधा बनाई गई है। डाक घरों को वाइड एरिया नेटवर्क WAN से जोड़ा गया है। एक्सप्रेस पार्सल, बिज़नेस पार्सल, कैश ऑन डिलीवरी, ऑनलाइन मनी ट्रांसफर, ई ग्रीटिंग सेवा आदि शुरू की गई हैं।

1 सितंबर, 2018 को इंडियन पोस्ट पेटेंट बैंक IPPB की शुरुआत हुई। इसकी शुरुआत आपका बैंक आपके द्वार नारे के साथ शुरू हुई। IPPB खातों की संख्या 1 करोड़ से अधिक हो चुकी है, तथा इनके साथ डाक बचत के खातों को भी जोड़ा जा रहा है। जिससे कि एक बड़ा सुधार आएगा।

भारतीय डाक में आ रही मुश्किलें

उदारीकरण की नीति के कारण बाजार में बहुत सी प्राइवेट कोरियर सेवाएं आ गई है। जिस कारण लोगों ने डाकघर से पत्र व्यवहार तथा कोरियर आदि भेजना कम कर दिया है। भारतीय डाक ने 1997-98 में 15 अरब 74 करोड़ पत्र बांटे थे तथा जो घटकर 2006-07 में 6 अरब 39 करोड़ रह गए। 2016 में भारतीय डाक का राजस्व घाटा 6 हजार 7 करोड़ रुपए था। जो कि 2019 में15हजार करोड़ रुपए हो गया है।

आज इंटरनेट का युग है। इसमें बढ़ते आधुनिकरण के कारण लोग डाक का कम उपयोग कर रहे हैं। आजकल लोग सीधा ईमेल, वीडियो कॉल, वॉइस कॉल, टेक्स्ट मैसेज आदि का उपयोग करते हैं। जिससे कि समय की भी काफी बचत हो रही है। इसलिए डाक विभाग को पत्राचार के अलावा भी कई कार्य सौंप दिए गए हैं। जैसे पहचान पत्र बनाना, पासपोर्ट बनाना, बचत योजनाएं, बीमा योजनाएं आदि बहुत सी सेवाएं डाकघर को सौंप दी गई हैं।

निष्कर्ष

संचार क्रांति के कारण पूरी दुनिया में डाकघर धीरे-धीरे बंद हो रहे हैं, या उनका दायरा कम हो रहा है। परंतु भारतीय डाक आज भी लगातार फैल रहा है, तथा देश में डाक संचार व्यवस्था की नींव बनी हुई है। आज भी बहुत से लोग प्राइवेट संसाधनों के बजाय डाक व्यवस्था पर पूर्ण विश्वास करते हैं। सरकारी डाक सारी की सारी भारतीय डाक विभाग ही भेजता है। आधुनिकरण की दौड़ में भारतीय डाक विभाग को भी पूर्णतया आधुनिक बनाया जा रहा है, जिससे कि वह समय के साथ अपनी सेवाओं को भी डिजिटल बना सकें।

आशा है की हमारे विश्व डाक दिवस पर लेख से आपको काफी कुछ जानकारी मिली होगी ।
धन्यवाद

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