विश्व हेपेटाइटिस दिवस, 28 जुलाई

विश्व हेपेटाइटिस दिवस क्यों मनाया जाता है? (World Hepatitis Day, 28th July)

यह दिन हेपेटाइटिस बी वायरस के खोजकर्ता Dr. Baruch S. Blumberg (1995-2011) के जन्मदिन के अवसर पर मनाया जाता है। सन 1976 में Dr. Blumberg ने औषधियों में नोबेल पुरस्कार जीता था। Dr. Baruch Blumberg व उनके सह कर्मियों द्वारा 1967 में हेपेटाइटिस बी वायरस की खोज की गई, और इस वायरस का पता लगाने के लिए खून की जांच का तरीका विकसित कियाI और उन्होंने अपने अथक प्रयासों से 1969 में हेपेटाइटिस बी के लिए पहली दवा खोज निकाली।

WHO की 2017 की रिपोर्ट के अनुसार विश्व हेपेटाइटिस दिवस 28 जुलाई के अवसर पर विश्व भर के सभी देशों में जागरूकता फैलाई जाएगी, तथा इस वायरस जनित रोग के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे इस रोग के उन्मूलन में सहायता मिलेगी। आज के समय में इसके उन्मूलन में सबसे बड़ी बाधा कम जांच होना व कम इलाज होना है। सन 2030 तक इस रोग के उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

विश्व हेपेटाइटिस दिवस क्या है? (Hepatitis B)

हेपेटाइटिस बी एक वायरस जनित रोग है। जो कि व्यक्ति के यकृत (liver) पर हमला करता है। इसके फैलने का कारण किन्ही दो मनुष्य के रक्त या कोई और तरल पदार्थ का संपर्क में आना है। यह वायरस जन्म के समय मां से बच्चे में फैल सकता है। और यही इसके फैलने का प्रमुख कारण है।
WHO का अनुमान है कि वर्ष 2015 में 25 करोड़ 70 लाख व्यक्ति विश्व भर में इस बीमारी से संक्रमित हुए थे। और इस वजह से यह बीमारी लगभग 8 लाख 87 हजार लोगों की मृत्यु का कारण बनीI 2016 में 27 करोड़ लोगों के संक्रमित होने का अनुमान लगाया गया, जो की कुल आबादी का लगभग 10.5 प्रतिशत थी। इस बीमारी को हेपेटाइटिस बी के टीके द्वारा रोका जा सकता हैI जो आसानी से उपलब्ध है, तथा सुरक्षित है।

हेपेटाइटिस रोग कैसे फैलता है?

इस रोग के फैलने का मुख्य कारण बच्चे में जन्म से पहले उसकी मां द्वारा फैलना है। यह रोग इसके अलावा रोगी व्यक्ति के शरीर के किसी भी तरल पदार्थ के संपर्क में आने से फैलता है, जैसे कि रक्त, लार, वीर्य आदिI इसके फैलने का मुख्य कारण जीवन के प्रारंभिक काल में होता है। इस समय संक्रमण 95% तक होता है। जबकि व्यस्को में यह 5% फैलता है। यह सुई को दोबारा इस्तेमाल करने या दंत चिकित्सा आदि के समय वह कई अन्य तरीकों से फैलता है। यह वायरस शरीर से बाहर 7 दिन तक जीवित रह सकता है। अगर किसी व्यक्ति ने हेपेटाइटिस बी का टीका नहीं लगवाया है, तो यह वायरस उसे संक्रमित कर देता है। जो आने वाले समय में यकृत के कैंसर या कई लंबी बीमारियों का प्रमुख कारण बनता है।

हेपेटाइटिस बी के लक्षण

कुछ नए संक्रमित होने वाले व्यक्तियों में इसका कोई लक्षण नहीं दिखाई देता है। जबकि कुछ लोगों में पुराने रोग बढ़ जाते हैंI इससे आँखें, त्वचा, नाखून पीले दिखाई देने लगते हैं। जिसे पीलिया कहा जाता हैI इससे व्यक्ति को पीला पेशाब आता है। उसे अत्यधिक थकान, पेट दर्द, जी मिचलाना आदि कई लक्षण महसूस होते हैं। इससे कई बार यकृत(Liver) कार्य करना बंद कर देता है। जो मृत्यु का कारण बनता हैI इसके द्वारा यकृत का कैंसर भी हो सकता है, जो कि अत्यधिक घातक व मृत्यु कारक सिद्ध होता है।

हेपेटाइटिस बी का उपचार

हेपेटाइटिस बी अत्यधिक फैलने पर इसका कोई उपचार नहीं है। इसके मरीज को आराम की आवश्यकता होती है। इसके लक्षण जैसे दस्त जी मिचलाना आदि का उपचार किया जाता है। इस बीमारी के दौरान अनावश्यक दवाइयाँ न लेने पर बल दिया जाता है। जैसे पेरासिटामोल उल्टी आदि की दवाइयाँI इसके अलावा क्रॉनिक हेपिटाइटिस बी में इसका उपचार संभव है। यह इलाज एंटीवायरल दवाओं द्वारा किया जाता है। जिससे वायरस का फैलना थोड़ा कम हो जाता है। और व्यक्ति की जीवन रेखा को थोड़ा बढ़ाया जा सकता है। इसके उपचार के लिए लिए tonofovir or entecavir दवाई मौखिक रूप से देना सबसे अधिक फ़ायदेमंद माना गया है। इसकी एक गोली प्रतिदिन लेना सरल विधि है। इससे कई साइड इफेक्ट होते हैं। इसलिए इसमें चिकित्सक के परामर्श की बहुत अधिक आवश्यकता है। इससे लीवर का कैंसर होने पर उपचार का खर्च बहुत अधिक बढ़ जाता है। जिससे गरीब देशों में लोग उपचार के दौरान मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। और अमीर लोग कुछ उपायों द्वारा जैसे कि कीमोथेरेपी, सर्जरी या लीवर प्रत्यारोप द्वारा जीवन को थोड़ा ज्यादा दिन तक खींच सकते हैं।

हेपेटाइटिस बी से बचाव

इसके बचाव का सबसे कारगर उपाय हेपेटाइटिस बी का टीका है। यह टीका जन्म के बाद जितना जल्दी हो सके लगा दिया जाना चाहिए। इसे जन्म के 24 घंटे के भीतर लगाया जाना चाहिए। इसलिए विश्व भर में इसका प्रचार किया गया है। 2017 में एक अनुमान के अनुसार 84% शिशुओं को यह टीका लगाया गया था। इसकी वैक्सीन का तीन खुराक का शेड्यूल है। जो कि डिप्थीरिया, काली खांसी और टेटनस के लिए दिए जाते हैं। जिन देशों में यह टीका करण नहीं किया जाता है। वहां पर इस बीमारी के फैलने की दर सबसे ज्यादा पाई जाती है।

WHO के निर्देश

WHO ने हेपेटाइटिस के निदान के लिए 2015 में निर्देश दिएI सतत विकास एजेंडा 2030 के तहत हेपेटाइटिस की रोकथाम के लिए WHO लगातार कार्य कर रहा है। इसके तहत इसकी रोकथाम के लिए संसाधन जुटाना, जागरूकता फैलाना तथा विश्व की साझेदारी को सुनिश्चित करना है। WHO इसकी रोकथाम के लिए किए गए कार्यों का डाटा तैयार करता है। तथा इसके साथ साथ इसके फैलने को रोकने के लिए कार्य करता है। इसकी जांच उपचार आदि व्यवस्थाओं पर ध्यान देता है।

अंत में हम यही कह सकते हैं, कि हेपेटाइटिस बी वायरस के उन्मूलन के लिए सबसे बड़ा हथियार वैश्विक स्तर पर जागरूकता का होना है। तथा इसके टीका करण की व्यवस्था का होना है इसमें समाज को भी अपनी सहभागिता निभानी चाहिए।

धन्यवाद

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