वाई 2के बग क्या है (Y2k bug)

जिस समय सभी व्यक्ति नए साल की खुशियो के लिए इंतजार कर रहे थे और लोगों को एक नई दुनिया की उम्मीद थी, वही दुनिया भर के सॉफ्टवेयर उद्योग गहरी चिंता में थे क्योंकि उनके सामने एक बहुत बड़ी चुनोती थी।

पूरे दुनिया के सभी कंप्युटर सन 2000 को बदलने मे निपुण नहीं था क्योंकि सभी कंप्युटर के सॉफ्टवेयर मे एक बग था जोकि सन् 2000 को मानने को तयार नहीं था । कंप्यूटर के लिए 1900 और 2000 के बीच अंतर करने में असमर्थता थी। यदि समय पर समाधान प्राप्त नहीं किया जाता तो कई व्यापारिक राजस्व के रूप में कई अरब डॉलर खो देते।

ये समस्या केवल तब तक ही रही, जब तक भारतीय कंप्यूटर इंजीनियरों ने इस बग से निपटकने के लिए पैच(patch) बनाकर नहीं छोड़ा.

इसके पीछे भारतीयों की कड़ी परिश्रम और मेहनत थी.

वाई 2के बग क्या है (Y2k bug)

Y2K बग, जिसे वर्ष 2000 बग या मिलेनियम बग(Millennium Bug) भी कहा जाता है, कंप्यूटराइज्ड सिस्टम के कोडिंग में एक समस्या थी । उस समय लगभग पूरी दुनिया में कंप्यूटर सिस्टम में साल को प्रदर्शित करने के लिए 4 अंकों की जगह पर 2 अंकों का प्रयोग ही होता था.उद्धारण के तोर पर कंप्युटर सन् 1999 को सिर्फ 99 समझता था, इसी वजह से अगर सन् 2000 आता तो वह 00 समझता यनिकी वापिस सन् 1900 मे चला जाता ।

इस तरह से 1 जनवरी 2000 को कंप्यूटरों में दिखने वाली तारीख 01/01/1900 ही रहती.सरल सबदों मे हम 100 साल पीछे चले जाते कंप्युटर की दुनिया मे पर ये हमारी असल जिंदगी मे भी बहुत गहरा परभाव डालती।

वाई 2के(Y2k) के परिणाम क्या होते

इससे कई उद्योगों को झटका लग सकता था, बैंकिंग उद्योग अव्यवस्थित था क्योंकि 31 दिसंबर को एक दिन के बजाय y2k समस्या 100 वर्षों के लिए ब्याज दर की गणना करेगी। परिवहन और पावरप्लांट गंभीर रूप से प्रभावित होंगे क्योंकि एक गलत तारीख परेशान कर सकती है और पर्यावरण को जोखिम में डाल सकती है। सरकारें अपने रोजमर्रा के काम करने में असमर्थ हो सकती थीं, व्यवसाय चौपट हो जाते. एटीएम और बैंक बुरी तरह से फेल हो सकते थे। क्योंकि उस समय हमारे सभी काम कंप्युटर के ऊपर निर्भर हो गए थे।

सबसे आसान उपाय यह था कि वर्ष को चार अंकों की संख्या में संग्रहीत करने के लिए सभी प्रणालियों को अपडेट किया जाए। इसी बीच अमेरिका राष्ट्रपति क्लिंटन द्वारा कानून वाई 2के अधिनियम लाया गया, जिसका मतलब था कि संसाधनों को वाई 2के समस्याओं को ठीक करने को बढ़ावा देने के लिए समर्पित किया न कि तुच्छ मुकदमों से लड़ने की दिशा में।

वाई 2के(Y2k) मे भारत का सहयोग

सबसे जादा अमेरिकी कंपनियों में हाहाकार मच गया था क्योंकि इन सभी को कंप्यूटिंग प्रणाली मे बदलाव करने की जरूरत थी अगर समय रहते नहीं करते तो पता नहीं कितना बुरा परिणाम झेलना पड़ता ।

इसके लिए कंप्यूटर ढांचे में बदलाव किया जाना था, जिसके लिए बड़ी संख्या में कंप्यूटर इंजीनियरों की जरूरत थी.

भारत के लिए, वाई 2के (मिलेनियम बग) एक वरदान रहा है। उस समय तक भारत में 100 से अधिक भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी Y2K बग को ठीक करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे जिनमे इंफोसिस का बहुत बड़ा योगदान रहा है । इस समस्या को ठीक करने में काफी धन खर्च हुआ अनुमान $300 बिलियन यू.एस.डॉलर (सभी देशों का मिला के)

हैदराबाद और बैंगलोर जैसे कई शहर दुनिया भर में अपनी सेवाओं के माध्यम से आईटी हब में पहचाने गए।

विश्व बैंक के एक सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए शीर्ष स्थान बन गया है, जो अपनी सॉफ़्टवेयर ज़रूरतों को पूरा करना चाहती हैं।

और इसी तरह इस बग को ठीक करने के लिए काफी कमियों को पैच(coding) के माध्यम से ठीक किया गया । इसी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कंपनियों ने अपनी एक अलग पहचान बनाई और आज भारतीय सॉफ्टवेयर व्यवसाय एक मिसाल बना हुआ है पूरे संसार के सामने।

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